उमाकांत त्रिपाठी।बिहार के चंपारण में 18 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है. यह दौरा न केवल चंपारण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि बिहार की सियासत में एनडीए के मजबूत गढ़ को बनाए रखने और नए समीकरण साधने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
आपको बता दें कि- मोतिहारी ऐतिहासिक रूप से महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन का केंद्र रहा है, लेकिन अब एनडीए के लिए एक सियासी मंच बनने जा रहा है जहां से वह अपनी ताकत और जनता के बीच पैठ को दिखाएगा. पीएम मोदी से पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे एनडीए के बड़े नेताओं के दौरे हो चुके हैं और गठबंधन ने अपनी रणनीति बनाने पर काम शुरू कर दिया है. मोतिहारी में होने वाली इस सभा से एनडीए न केवल सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश करेगा, बल्कि विकास और सुशासन का नया नारा भी बुलंद करेगा. पीएम मोदी के इस दौरे को 2025 विधानसभा चुनावों की जमीन तैयार को और पुख्ता करने और चुनावी लिहाज से मास्टरस्ट्रोक बनाने की रणनीति कही जा रही है.
एनडीए की रणनीति और समीकरण- प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा एनडीए के लिए कई समीकरण साधने का अवसर है. दरअसल, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिलों में बंटा चंपारण क्षेत्र सामाजिक और आर्थिक रूप से विवधताओं से भरा हुआ क्षेत्र है. यहां ऊंची जातियां, ओबीसी, अति पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों का मिला जुला मतदाता आधार है. एनडीए पीएम मोदी के इस दौरे के जरिए सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना चाहता है. खासकर फोकस ओबीसी और अति पिछड़ा वर्ग को साधने पर है. सीएम नीतीश कुमार की जेडीयू ने पहले ही जातिगत जनगणना और ओबीसी-ईबीसी आरक्षण को बढ़ाने का कार्ड खेला है. इसके अतिरिक्त केंद्र की बड़ी महत्व वाली परियोजनाओं और नीतीश सरकार के विकास कार्यों को बताकर जनता को अपने पाले में रखने की कवायद भी है. बीते दो विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में एनडीए का प्रदर्शन को जानेंगे तो समझ जाएंगे कि यह एनडीए का मजबूत किला क्यों है.















