खबर इंडिया की। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का प्रस्तावित सीमांचल दौरा सुरक्षा और विकास दोनों ही दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। किशनगंज, अररिया और पूर्णिया में होने वाले उनके कार्यक्रमों के दौरान सीमा पार घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज नेटवर्क और बदलते जनसंख्या स्वरूप जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उठ सकते हैं।
पिछले चुनावी अभियान के दौरान भी अमित शाह ने सीमांचल क्षेत्र में अवैध घुसपैठ को बड़ी चुनौती बताया था। ऐसे में यह दौरा जमीनी स्तर पर कार्रवाई और नई रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, ठीक उसी तरह जैसे बीते वर्षों में माओवादियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया था।
सीमांचल और देश के रणनीतिक ‘चिकन नेक’ क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए केंद्र सरकार आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में जुटी है। किशनगंज में सेना स्टेशन के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही एसएसबी मुख्यालय, सीआरपीएफ और बीएमपी कैंप की स्थापना की योजना है। रेलवे कनेक्टिविटी सुधारने के लिए करीब 40 किलोमीटर लंबी टनल परियोजना प्रस्तावित है, वहीं पैरा कमांडो ट्रेनिंग सेंटर की तैयारी को भी सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
घुसपैठ के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। पिछले वर्ष एसएसबी ने एक युवक को पकड़ा, जिसके पास बांग्लादेशी पहचान पत्र सहित भारतीय दस्तावेजों की प्रतियां मिली थीं। इससे स्पष्ट होता है कि घुसपैठ केवल सीमा पार करने तक सीमित नहीं, बल्कि पहचान बदलकर व्यवस्था में घुलने तक फैली हुई है।
फर्जी आधार कार्ड रैकेट और आतंकी कनेक्शन के खुलासों ने भी एजेंसियों को सतर्क किया है। बदलती डेमोग्राफी और नई बस्तियों के विस्तार की चर्चा ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस को तेज किया है। ऐसे में अमित शाह का सीमांचल दौरा सुरक्षा, विकास और नीति निर्धारण के लिहाज से बड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।














