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WFH पर लौटने की तैयारी में नामी कंपनियां, PM मोदी की अपील का दिख रहा असर, सामने आया पूरा प्लान

उमाकांत त्रिपाठी ईरान में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के असर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब देश के कॉरपोरेट सेक्टर में भी दिखने लगा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप समेत कई बड़ी कंपनियां फिर से वर्क फ्रॉम होम मॉडल लागू करने पर विचार कर रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की थी। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, यात्रा कम करने और सोने की खरीद घटाने समेत कुल 7 सुझाव दिए थे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा वर्क फ्रॉम होम मॉडल को लेकर हो रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहयोगी कंपनियों में फिलहाल हाइब्रिड मॉडल लागू है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि पीएम मोदी की अपील के बाद कंपनी इस बात का आकलन कर रही है कि इस व्यवस्था को और प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जा सकता है।
टाटा ग्रुप ने भी संकेत दिए हैं कि समूह की कंपनियों में इस मुद्दे पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी तक कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया गया है।
आईटी सेक्टर की कई कंपनियों में फिलहाल भी वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल जारी है। कोरोना महामारी के बाद ज्यादातर कंपनियों ने कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से ऑफिस बुलाना शुरू किया था, लेकिन अब दोबारा पुराने मॉडल पर लौटने की संभावना बढ़ती दिख रही है।
कई कंपनियों में फिलहाल हाइब्रिड सिस्टम लागू है। इसके तहत सीनियर कर्मचारियों को ऑफिस आना पड़ता है, जबकि जूनियर स्टाफ को घर से काम करने की सुविधा दी जा रही है। कुछ संस्थानों में कर्मचारियों को वैकल्पिक दिनों में ऑफिस बुलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी और डिजिटल सेक्टर में वर्क फ्रॉम होम को आसानी से लागू किया जा सकता है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण क्षेत्र की कंपनियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण होगा। एल एंड टी जैसी कंपनियों के अधिकांश कर्मचारी ऑनसाइट काम करते हैं, इसलिए वहां पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम संभव नहीं माना जा रहा।
हालांकि कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को अनावश्यक यात्रा कम करने और ईंधन बचाने की सलाह दी जा रही है।
कोरोना काल के दौरान बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाया गया था। उस समय ज्यादातर कॉरपोरेट कंपनियों ने डिजिटल वर्क सिस्टम विकसित किया था। बाद में हालात सामान्य होने पर कंपनियों ने दोबारा वर्क फ्रॉम ऑफिस को बढ़ावा देना शुरू कर दिया।
अब यदि ईंधन बचत और वैश्विक हालात को देखते हुए फिर से वर्क फ्रॉम होम नीति लागू होती है, तो कई कंपनियों को अपनी पुरानी नीतियों में बदलाव करना पड़ सकता है।
कॉरपोरेट सेक्टर फिलहाल इस बात पर मंथन कर रहा है कि कामकाज प्रभावित किए बिना किस तरह ईंधन की बचत और संचालन दोनों को संतुलित रखा जाए।

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