उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भारत की सांस्कृतिक विरासत, विज्ञान के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि और देशभक्ति से जुड़े प्रेरक प्रयासों का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने नीदरलैंड से भारत लाई गई चोल वंश की प्राचीन ताम्र पट्टिकाओं, देशभर में बढ़ती एस्ट्रोनॉमी गतिविधियों और तमिलनाडु के विद्यार्थियों द्वारा सैनिकों के लिए जुटाए गए फंड की चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि- हाल ही में उन्हें नीदरलैंड जाने का अवसर मिला, जहां एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गईं। इस समारोह में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। पीएम ने कहा कि इन ताम्र पट्टिकाओं की वापसी को लेकर देश और विदेश से उन्हें बड़ी संख्या में संदेश मिले हैं और लोग इस उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं।
उन्होंने बताया कि- इन ताम्र पट्टिकाओं में 21 बड़ी और तीन छोटी पट्टिकाएं शामिल हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोल के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख मिलता है। साथ ही चोल वंश की उपलब्धियों और उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था का भी विस्तृत वर्णन दर्ज है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि- विशेषज्ञ इन अभिलेखों को एक हजार वर्ष से अधिक पुराना मानते हैं। प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई ये ताम्र पट्टिकाएं उस दौर की शासन व्यवस्था, धर्म, संस्कृति और सामाजिक जीवन को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने युवाओं में बढ़ती खगोल विज्ञान यानी एस्ट्रोनॉमी के प्रति रुचि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में खगोल विज्ञान का विशेष महत्व रहा है। नेविगेशन, पंचांग और विभिन्न पर्व-त्योहारों का संबंध आकाशीय घटनाओं और तारों से जुड़ा रहा है।
उन्होंने बताया कि- देशभर में एस्ट्रोनॉमी क्लब तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बेंगलुरु एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी नियमित रूप से ऑब्जर्वेशनल सेशन आयोजित कर रही है। वहीं ‘खगोल मंडल’ नामक टीम ने 30 घंटे का एक नवाचारी कोर्स शुरू किया है। केरल और गुजरात सहित कई राज्यों में भी खगोल विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नागरकोइल में अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए शिक्षिका गिरिजा अम्मा की सराहना की। उन्होंने बताया कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूलों का संचालन करती हैं, जिनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय प्रमुख है।
पीएम ने कहा कि गिरिजा अम्मा ने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। उन्होंने अपने स्कूलों के विद्यार्थियों से अपील की कि वे हर दिन एक रुपया देश के वीर जवानों के लिए बचाएं। इस पहल के तहत प्रत्येक छात्र ने सालभर में 365 रुपये का योगदान दिया। छोटे-छोटे योगदानों से करीब 40 लाख रुपये की राशि एकत्र हुई, जिसे सैनिकों के कल्याण के लिए समर्पित किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में देशभक्ति, सेवा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं तथा नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देते हैं।














