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Drone Attack Threat Alert: देश के इन ठिकानों पर हो सकता है ड्रोन अटैक? केंद्र सरकार का एजेंसियों को अलर्ट, इन जगहों पर बढ़ाई गई सुरक्षा बढ़ाएं, एंटी ड्रोन सिस्टम हुआ तैनात

नई दिल्ली: Drone Attack Threat Alert को लेकर केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। सीमावर्ती इलाकों और देश के महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमलों की आशंका के बीच सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत विभिन्न एजेंसियां अब संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज कर रही हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने जमीन और समुद्री सीमाओं के पास स्थित महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों, बंदरगाहों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन हमले की संभावना को लेकर अलर्ट जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारत को अपनी महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।

सरकार ने क्यों जारी किया ड्रोन हमले का अलर्ट?

हाल के वर्षों में दुनिया भर में ड्रोन तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। जहां एक ओर इसका इस्तेमाल निगरानी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कार्यों में हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कई संघर्ष क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग हमलों और जासूसी गतिविधियों के लिए भी किया गया है।

इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने चेतावनी दी है कि सीमाओं के पास मौजूद महत्वपूर्ण सैन्य, औद्योगिक और समुद्री ठिकाने दुश्मन तत्वों के निशाने पर हो सकते हैं।

सरकारी पत्र में कहा गया है कि आधुनिक ड्रोन न केवल निगरानी कर सकते हैं, बल्कि आवश्यक सेवाओं और रणनीतिक ढांचों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता भी रखते हैं। इसलिए समय रहते सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन हमलों का खतरा पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से अलग है क्योंकि छोटे आकार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन को पहचानना कई बार मुश्किल हो सकता है।

BSF और CISF ने शुरू की तैयारी

ड्रोन खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के तहत एक विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति की जिम्मेदारी भारत के लिए सबसे प्रभावी एंटी-ड्रोन तकनीकों का परीक्षण और मूल्यांकन करना है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब और अन्य संवेदनशील इलाकों में इन प्रणालियों की तैनाती की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। कई स्थानों पर परीक्षण भी शुरू हो चुके हैं।

इसके अलावा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने भी एक संयुक्त तकनीकी टीम बनाई है। इस टीम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और BSF के अधिकारी शामिल हैं।

यह टीम देशभर के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, एयरपोर्ट, बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों का दौरा कर रही है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस स्थान पर किस प्रकार का एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाया जाना चाहिए।

एंटी-ड्रोन सिस्टम कैसे करेगा काम?

एंटी-ड्रोन सिस्टम आधुनिक सुरक्षा तकनीक का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ये सिस्टम रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग तकनीक की मदद से काम करते हैं।

इनका मुख्य उद्देश्य संदिग्ध ड्रोन की पहचान करना, उसकी लोकेशन ट्रैक करना और आवश्यकता पड़ने पर उसके संचार तंत्र को बाधित करना होता है।

कुछ उन्नत प्रणालियां ड्रोन को नियंत्रित करने वाले सिग्नल को जाम कर देती हैं, जबकि कुछ सिस्टम ड्रोन को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने में सक्षम होते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य की सुरक्षा रणनीति में एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ने वाली है।

तमिलनाडु के बंदरगाह पर लगा देश का पहला आधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम

भारत में एंटी-ड्रोन सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम तमिलनाडु के थूथुकुडी स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर उठाया गया है।

फरवरी 2026 में यहां अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित किया गया। यह देश का पहला ऐसा बंदरगाह बना जहां इस स्तर की तकनीक को लागू किया गया।

सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के सहयोग से विकसित यह प्रणाली 360 डिग्री निगरानी क्षमता से लैस है। यह संदिग्ध ड्रोन की पहचान करने के साथ-साथ उसे निष्क्रिय करने की क्षमता भी रखती है।

यह परियोजना भारत सरकार के ‘अमृत काल विजन 2047’ और ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ के तहत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाई भारत की क्षमता

ड्रोन खतरों से निपटने में भारत की क्षमता पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों ने दुश्मन के कई ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया था।

भारतीय वायुसेना के रडार और एयर डिफेंस नेटवर्क ने संदिग्ध हवाई गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी और कई संभावित खतरों को समय रहते निष्प्रभावी किया।

इस अभियान ने स्पष्ट किया कि भारत न केवल पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम है, बल्कि आधुनिक ड्रोन युद्ध की चुनौतियों का भी प्रभावी जवाब देने की क्षमता रखता है।

देश के महत्वपूर्ण ठिकानों पर संभावित ड्रोन हमलों की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। BSF, CISF, DRDO और अन्य एजेंसियों के समन्वय से एंटी-ड्रोन सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा रहा है।

आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणालियों की तैनाती आने वाले समय में भारत की सीमाओं, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को नए प्रकार के खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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