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आखिर कोशिश भी हुई नाकाम, मां का दूध लैब में नहीं बना पाए वैज्ञानिक, जानिए हर बार कहां अटक जाते हैं?

खबर इंडिया की।Breast Milk Formula को लेकर दुनिया भर में दशकों से रिसर्च जारी है, लेकिन आज तक कोई भी वैज्ञानिक मां के दूध की हूबहू नकल नहीं कर पाया है। अरबों डॉलर के निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीन इंजीनियरिंग, आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक लैब्स के बावजूद Breast Milk Formula ऐसा तैयार नहीं हो सका जो मां के प्राकृतिक दूध जैसा प्रभाव दे सके।

हर साल 1 से 7 अगस्त के बीच World Breastfeeding Week मनाया जाता है। इस अवसर पर एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि जब विज्ञान इतनी तरक्की कर चुका है, तो फिर मां के दूध जैसा फॉर्मूला क्यों नहीं बनाया जा सका? इसका जवाब मां के दूध की जटिल संरचना और उसके जीवित जैविक तत्वों में छिपा है।

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार मां का दूध केवल पोषण देने वाला भोजन नहीं है, बल्कि यह नवजात शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच भी है। इसमें मौजूद कई ऐसे जैविक तत्व हैं जिन्हें प्रयोगशाला में दोबारा बनाना आज भी संभव नहीं हो पाया है।

मां का दूध सिर्फ पोषण नहीं, प्राकृतिक सुरक्षा कवच भी

विशेषज्ञ बताते हैं कि मां के दूध में प्रोटीन, वसा, विटामिन और मिनरल्स के अलावा हजारों जैविक यौगिक मौजूद होते हैं। इनमें जीवित कोशिकाएं, एंटीबॉडी, हार्मोन, सक्रिय एंजाइम और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले तत्व शामिल हैं।

यही कारण है कि मां का दूध बच्चे को संक्रमण, वायरस और कई बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह नवजात के इम्यून सिस्टम को विकसित करने में मदद करता है, जबकि सामान्य फॉर्मूला मिल्क केवल पोषण उपलब्ध करा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि- मां का दूध बच्चे की जरूरतों के अनुसार लगातार बदलता रहता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जिसे विज्ञान अब तक समझ तो पाया है लेकिन पूरी तरह दोहरा नहीं सका।

HMOs क्यों हैं सबसे बड़ी चुनौती?

मां के दूध में Human Milk Oligosaccharides (HMOs) नाम के विशेष प्रीबायोटिक शुगर मॉलिक्यूल पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इंसानी दूध में 200 से अधिक प्रकार के HMOs मौजूद होते हैं।

ये शुगर सीधे ऊर्जा नहीं देते बल्कि बच्चे की आंत में मौजूद लाभदायक बैक्टीरिया, विशेष रूप से Bifidobacterium, को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ये हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को शरीर में चिपकने से रोकने में भी मदद करते हैं।

यही HMOs विज्ञान के सामने सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इनमें से अधिकांश मॉलिक्यूल इतने जटिल होते हैं कि इन्हें बड़े स्तर पर प्रयोगशाला में बनाना लगभग असंभव माना जाता है।

इसी वजह से कई बायोटेक कंपनियां और विश्वविद्यालय जीन-इंजीनियरिंग तकनीक की मदद से पौधों में इन शुगर मॉलिक्यूल्स को विकसित करने पर काम कर रहे हैं। हालांकि अभी तक यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल नहीं हो सकी है।

जीवित कोशिकाओं की वजह से असंभव हो जाती है नकल

फॉर्मूला मिल्क और मां के दूध के बीच सबसे बड़ा अंतर जीवित जैविक तत्वों का है।

मां के दूध में सक्रिय इम्यून कोशिकाएं, एंटीबॉडी, हार्मोन और एंजाइम लगातार काम करते रहते हैं। दूसरी ओर फॉर्मूला मिल्क को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस तरह प्रोसेस किया जाता है कि उसमें कोई जीवित तत्व न बच सके।

यही कारण है कि फॉर्मूला मिल्क चाहे कितना भी आधुनिक क्यों न हो, वह मां के दूध की प्रतिरक्षा क्षमता प्रदान नहीं कर सकता।

हर मां का दूध अलग होता है

वैज्ञानिकों के अनुसार, कोई भी दो माताओं का दूध पूरी तरह एक जैसा नहीं होता।

एक ही महिला का दूध भी सुबह, शाम, बच्चे की उम्र, बीमारी और फीडिंग के समय के अनुसार बदलता रहता है। यहां तक कि मां की जेनेटिक्स भी दूध की संरचना को प्रभावित करती है।

रिसर्च बताती है कि जिन महिलाओं में FUT2 (Secretor Gene) सक्रिय होता है, उनके दूध में कुछ विशेष HMOs पाए जाते हैं, जबकि अन्य महिलाओं में इनकी मात्रा अलग होती है।

यानी हर मां का दूध उसके बच्चे की जरूरतों के अनुसार प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक किसी एक निश्चित फॉर्मूले से इसकी पूरी तरह नकल नहीं कर सकते।

वैज्ञानिक क्या कर रहे हैं?

दुनिया के कई प्रमुख विश्वविद्यालय और बायोटेक कंपनियां बेहतर Breast Milk Formula विकसित करने पर काम कर रही हैं।

AI आधारित प्रोटीन विश्लेषण, सिंथेटिक बायोलॉजी, जीन एडिटिंग और माइक्रोबायोम रिसर्च के जरिए वैज्ञानिक ऐसे फॉर्मूला तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं जो मां के दूध के अधिक करीब हो।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में फॉर्मूला मिल्क पहले से बेहतर जरूर होगा, लेकिन प्राकृतिक मां के दूध की पूरी तरह बराबरी करना बेहद कठिन रहेगा।

विशेषज्ञों की क्या है राय?

आयरलैंड की यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के नियोनेटोलॉजी विशेषज्ञ प्रोफेसर टोनी रायन का मानना है कि फॉर्मूला मिल्क में लगातार सुधार संभव है, लेकिन यह मां के दूध की पूरी तरह नकल कभी नहीं कर पाएगा।

उनके अनुसार मां का दूध एक जीवित जैविक प्रणाली है, जो केवल पोषण ही नहीं बल्कि बच्चे के शरीर, इम्यून सिस्टम और आंत के माइक्रोबायोम को भी विकसित करता है।

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