उमाकांत त्रिपाठी।NDA Meeting Parliament March के बीच संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म दिखाई दिया। एनडीए सांसदों के मंगल मिलन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले तिरंगा फहराया गया। कार्यक्रम में वंदे मातरम्, भारत माता की जय, हर-हर महादेव और जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनाई दी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं हाथों में तिरंगा लिए नजर आए। कार्यक्रम के बाद एनडीए सांसद संसद तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे और विपक्ष के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच NDA Meeting Parliament March को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार और विपक्ष के बीच छात्रों के प्रदर्शन, लाठीचार्ज और अन्य मुद्दों को लेकर लगातार टकराव बना हुआ है।
NDA सांसदों ने तिरंगा लेकर संसद तक किया पैदल मार्च
एनडीए सांसदों के मंगल मिलन कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में सभी सांसद संसद भवन की ओर पैदल मार्च करते हुए निकले। मार्च के दौरान सांसदों के हाथों में तिरंगा था और राष्ट्रभक्ति से जुड़े नारे लगाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य संसद में चर्चा शुरू कराने और विपक्ष पर दबाव बनाने का माना जा रहा है।
मार्च के दौरान कई सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ पोस्टर भी हाथों में लिए हुए थे। पोस्टरों में दावा किया गया कि गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के प्रदर्शन के मुद्दे पर संसद में चर्चा करने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष चर्चा से बच रहा है।
विपक्ष पर लगाए चर्चा से भागने के आरोप
बीजेपी सांसदों ने इस दौरान विपक्ष पर तीखा हमला बोला। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी को झारखंड में छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज पर जवाब देना चाहिए। उनका कहना था कि विपक्ष केवल राजनीतिक आरोप लगाने में व्यस्त है, जबकि सरकार संसद में चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
बीजेपी सांसदों का कहना है कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही नहीं चलने देना चाहता। इसी वजह से लगातार संसद में गतिरोध बना हुआ है।
कंगना रनौत और साक्षी महाराज ने भी साधा निशाना
बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि चर्चा से इनकार किया जा रहा है तो यह देश को गुमराह करने जैसा है। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि संसद में बहस हो और सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाए।
वहीं बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि विपक्ष किसी भी हालत में चर्चा नहीं चाहता। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अलग-अलग राज्यों के मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक रुख अपनाता है। उनके मुताबिक जंतर-मंतर और झारखंड जैसे मामलों में विपक्ष की नीति अलग दिखाई देती है।
मनोज तिवारी बोले- राहुल गांधी चर्चा से मत भागिए
बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने राहुल गांधी से अपील करते हुए कहा कि चर्चा से भागने की बजाय सदन में मौजूद रहकर सरकार की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बहस ही सबसे मजबूत माध्यम है और संसद का उद्देश्य भी यही है।
मनोज तिवारी ने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर है तो उसे सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए, ताकि सरकार अपना पक्ष रख सके।
संसद में क्यों बना हुआ है गतिरोध?
संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से गतिरोध जारी है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज और राम मंदिर चंदा चोरी जैसे मुद्दों पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब दें। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि अमित शाह चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन विपक्ष पहले सदन की कार्यवाही चलने दे।
सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि जैसे ही चर्चा शुरू होगी, गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देंगे। इसके बावजूद संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
राजनीतिक संदेश देने की कोशिश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि- NDA Meeting Parliament March केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसके जरिए एनडीए ने विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। तिरंगा यात्रा, राष्ट्रवादी नारों और संसद तक पैदल मार्च के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया गया कि सरकार संसद में चर्चा चाहती है, जबकि विपक्ष पर चर्चा से बचने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
अब सभी की निगाहें संसद की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो छात्रों के प्रदर्शन सहित अन्य विवादित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। वहीं यदि गतिरोध जारी रहता है तो मानसून सत्र के महत्वपूर्ण विधायी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में NDA Meeting Parliament March आने वाले दिनों की संसदीय राजनीति का अहम केंद्र बन गया है।














