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कितने दिनों तक बिना खाए रह सकता है सांप? जानें हैरान करने वाला साइंस

खबर इंडिया की।नागपंचमी के मौके पर देशभर में नाग देवता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष से राहत और परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलने की बात कही जाती है। लेकिन सांपों की दुनिया सिर्फ धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं तक सीमित नहीं है। Snake Science के नजरिए से देखें तो सांपों की शारीरिक क्षमता और उनके जीवित रहने का तरीका भी बेहद हैरान करने वाला है।

अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर सांप बिना खाना खाए कितने समय तक जिंदा रह सकता है? इंसानों के लिए लंबे समय तक भोजन के बिना रहना बेहद मुश्किल है, लेकिन सांपों का शरीर इसके लिए काफी अलग तरीके से काम करता है। कई प्रजातियों के सांप कई महीनों तक बिना भोजन के जीवित रह सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका धीमा मेटाबॉलिज्म, शरीर में जमा ऊर्जा और जरूरत के मुताबिक अपनी शारीरिक गतिविधियों को कम करने की क्षमता है।

Snake Science: सांप कई महीनों तक भूखे कैसे रह लेते हैं?

Snake Science में सांपों की यह क्षमता सबसे दिलचस्प विषयों में से एक है। सांप गर्म खून वाले स्तनधारी जीवों की तरह लगातार बड़ी मात्रा में ऊर्जा खर्च नहीं करते। वे ठंडे खून वाले यानी एक्टोथर्मिक जीव होते हैं। इसका मतलब है कि उनके शरीर का तापमान काफी हद तक बाहरी वातावरण पर निर्भर करता है।

इसी कारण सांपों को अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए इंसानों और कई अन्य जानवरों जितनी ऊर्जा लगातार खर्च नहीं करनी पड़ती। जब भोजन उपलब्ध नहीं होता, तो सांप अपने शरीर में जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं।

सांप के शरीर में मौजूद चर्बी लंबे समय तक ऊर्जा का स्रोत बनी रह सकती है। भोजन न मिलने पर उनका मेटाबॉलिज्म भी काफी धीमा हो जाता है। इससे शरीर की ऊर्जा खपत कम होती है और उपलब्ध फैट बहुत धीरे-धीरे इस्तेमाल होता है।

यही Snake Science यह समझने में मदद करता है कि जंगल में रहने वाला कोई सांप लंबे समय तक शिकार न मिलने के बावजूद कैसे जीवित रह सकता है।

वैज्ञानिकों ने छह महीने तक सांपों को बिना भोजन के रखा

सांपों की इस असाधारण क्षमता को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने भी अध्ययन किए हैं। साल 2007 में अमेरिका में शोधकर्ता मार्शल मैक्यू के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में रैट स्नेक, वेस्टर्न डायमंडबैक रैटलस्नेक और बॉल पायथन जैसी तीन प्रजातियों के कुल 62 सांपों को करीब छह महीने तक बिना भोजन के रखा गया।

इस प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने सांपों के शरीर में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया। अध्ययन से पता चला कि भोजन नहीं मिलने पर सांप अपनी सामान्य मेटाबॉलिज्म दर को लगभग 72 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

यह Snake Science का बेहद महत्वपूर्ण पहलू है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर को चलाने के लिए लगातार ऊर्जा की जरूरत होती है, लेकिन सांप भूखे रहने के दौरान ऊर्जा की खपत को बहुत कम कर देते हैं। इससे उनके शरीर में मौजूद ऊर्जा का भंडार लंबे समय तक चल सकता है।

दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि भोजन की कमी के बावजूद सांपों की लंबाई जरूरी नहीं कि रुक जाए। कुछ सांपों में शरीर की लंबाई बढ़ने की प्रक्रिया भी जारी रह सकती है। वैज्ञानिकों के लिए यह तथ्य सांपों के शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल को समझने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।

भूखा रहने पर सांप के शरीर में क्या होता है?

Snake Science के अनुसार जब सांप को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता, तो उसके शरीर में ऊर्जा इस्तेमाल करने का तरीका बदल जाता है। सबसे पहले शरीर में जमा फैट यानी चर्बी ऊर्जा के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल होने लगती है।

यह प्रक्रिया केवल सांपों तक सीमित नहीं है। इंसानों और दूसरे जानवरों के शरीर में भी भोजन की कमी होने पर जमा फैट ऊर्जा में बदला जाता है। हालांकि सांपों की खासियत यह है कि उनका मेटाबॉलिज्म पहले से ही काफी धीमा होता है और वे ऊर्जा की खपत को बहुत कम कर सकते हैं।

अगर भोजन की कमी लंबे समय तक बनी रहे और शरीर में मौजूद फैट कम होने लगे, तो कुछ प्रजातियां शरीर के प्रोटीन का इस्तेमाल भी ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कर सकती हैं। रैट स्नेक जैसी कुछ प्रजातियों में लंबे समय तक भूखे रहने के दौरान ऐसी शारीरिक प्रक्रियाएं देखी गई हैं।

यानी सांप का शरीर जरूरत के अनुसार अपनी ऊर्जा व्यवस्था को बदल सकता है। यही कारण है कि शिकार की कमी के बावजूद कई सांप अपेक्षाकृत लंबे समय तक जीवित रह पाते हैं।

जंगल में सांपों के लिए भूखा रहना असामान्य नहीं

अगर जंगल की जिंदगी को देखें तो सांपों के लिए हर दिन भोजन मिलना जरूरी नहीं है। शिकार की उपलब्धता मौसम, तापमान और उनके रहने वाले क्षेत्र पर निर्भर करती है। कई बार सांप को लंबे समय तक शिकार नहीं मिलता।

ठंडे क्षेत्रों में यह स्थिति और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकती है। सर्दियों के दौरान कई सांप ब्रूमेशन नाम की अवस्था में चले जाते हैं। इसे कुछ हद तक स्तनधारी जीवों की हाइबरनेशन यानी शीतनिद्रा जैसी अवस्था माना जा सकता है।

ब्रूमेशन के दौरान सांपों की गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं। वे कम सक्रिय रहते हैं और भोजन की जरूरत भी घट जाती है। शरीर की ऊर्जा खपत कम होने के कारण वे लंबे समय तक उपलब्ध ऊर्जा भंडार पर निर्भर रह सकते हैं।

Snake Science के नजरिए से यह सांपों के सर्वाइवल मैकेनिज्म का एक शानदार उदाहरण है। जब वातावरण अनुकूल नहीं होता, तो सांप अपने शरीर की गतिविधियों और ऊर्जा की जरूरत को कम करके मुश्किल समय को पार करने की कोशिश करते हैं।

सांपों को सालभर में कितना भोजन चाहिए?

सांपों की भोजन संबंधी जरूरत भी इंसानों से बिल्कुल अलग होती है। ठंडे इलाकों में रहने वाले कुछ सांपों को पूरे साल में अपने शरीर के वजन के मुकाबले अपेक्षाकृत कम मात्रा में भोजन की जरूरत होती है।

उदाहरण के लिए, करीब डेढ़ किलोग्राम वजन वाला बॉल पायथन सालभर में लगभग 3 से 5.5 किलोग्राम तक भोजन से गुजारा कर सकता है। हालांकि यह कोई सार्वभौमिक आंकड़ा नहीं है। वास्तविक भोजन की जरूरत सांप की प्रजाति, उम्र, आकार, तापमान, गतिविधि और उपलब्ध शिकार पर निर्भर करती है।

यही वजह है कि यह कहना सही नहीं होगा कि हर सांप निश्चित संख्या में महीनों तक बिना खाना खाए रह सकता है। कुछ सांप कुछ हफ्तों तक भोजन के बिना रह सकते हैं, जबकि कुछ परिस्थितियों में बड़ी प्रजातियां कई महीनों तक भोजन के बिना जीवित रह सकती हैं।

पानी और भोजन की जरूरत को एक जैसा नहीं समझें

Snake Science से जुड़ी एक जरूरी बात यह भी है कि भोजन और पानी की जरूरत अलग-अलग होती है। सांप लंबे समय तक भोजन के बिना रह सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे हर परिस्थिति में पानी के बिना भी उतने ही लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं।

पानी की जरूरत प्रजाति, वातावरण और तापमान पर निर्भर करती है। गर्म और शुष्क वातावरण में शरीर से पानी की कमी तेजी से हो सकती है। इसलिए सांप के लंबे समय तक भूखे रहने की क्षमता को पानी के बिना रहने की क्षमता से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

नागपंचमी पर धार्मिक मान्यता के साथ समझें विज्ञान

नागपंचमी भारत की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है और इस दिन नागों की पूजा की जाती है। सांपों से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के साथ उनके वैज्ञानिक पहलुओं को समझना भी रोचक है।

Snake Science बताता है कि सांपों का लंबे समय तक बिना भोजन के रह पाना किसी रहस्य या चमत्कार की वजह से नहीं, बल्कि उनके शरीर की प्राकृतिक और वैज्ञानिक संरचना का परिणाम है। धीमा मेटाबॉलिज्म, शरीर में जमा ऊर्जा का इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर ऊर्जा की खपत को कम कर देना उन्हें कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद करता है।

इसलिए अगली बार जब नागपंचमी पर सांपों से जुड़ी कोई लोककथा या मान्यता सुनें, तो उनके पीछे मौजूद प्राकृतिक विज्ञान को समझना भी उतना ही दिलचस्प होगा। Snake Science की यही जानकारी बताती है कि प्रकृति ने हर जीव को उसके वातावरण के अनुसार अलग-अलग तरह की अद्भुत क्षमताएं दी हैं।

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