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अस्पताल की जगह घर में हुआ बच्चे का जन्म तो होगी सजा, इस राज्य की सरकार ला रही नया नियम

उमाकांत त्रिपाठी।तमिलनाडु सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राज्य में Tamil Nadu Home Delivery यानी घर पर प्रसव कराने की व्यवस्था को लेकर सरकार सख्त नियम बनाने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विधानसभा में बताया कि सरकार घर पर होने वाली डिलीवरी और मेडिकल संस्थानों के बाहर होने वाले प्रसव को दंडनीय अपराध बनाने के लिए कानूनी प्रावधान करने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

फिलहाल भारत में सामान्य परिस्थितियों में घर पर बच्चे को जन्म देना अपने आप में कोई ऐसा अपराध नहीं है, जिसके लिए कानूनन सजा का सामान्य प्रावधान हो। देश के कई हिस्सों में आज भी कुछ परिवार परंपरा, सुविधा, खर्च या अस्पताल से दूरी जैसे कारणों से घर पर प्रसव को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, तमिलनाडु सरकार का मानना है कि प्रसव के दौरान अचानक पैदा होने वाली जटिलताओं से निपटने के लिए मेडिकल सुविधा उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलाव के बाद Tamil Nadu Home Delivery को लेकर नियम काफी सख्त हो सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में अलग से संशोधन लाने की तैयारी कर रहा है, जबकि नए पब्लिक हेल्थ एक्ट में भी इससे जुड़े प्रावधान शामिल किए जाने की बात कही गई है।

87 साल पुराने कानून में बदलाव की तैयारी

स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग के लिए अनुदान की मांग पर चर्चा के दौरान तमिलनाडु के मौजूदा सार्वजनिक स्वास्थ्य कानून को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि Tamil Nadu Public Health Act, 1939 लगभग 87 साल पुराना हो चुका है। सरकार का मानना है कि वर्तमान समय की स्वास्थ्य चुनौतियों को देखते हुए इस पुराने कानून में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।

मंत्री के मुताबिक, सरकार जल्द ही नया तमिलनाडु पब्लिक हेल्थ एक्ट लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित कानून में कई नए स्वास्थ्य प्रावधानों को शामिल किया जाएगा। इनमें मेडिकल संस्थानों के बाहर होने वाले प्रसव और Tamil Nadu Home Delivery से संबंधित नियम भी महत्वपूर्ण होंगे।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई 115 घोषणाओं में यह घोषणा प्रमुख शुरुआती घोषणाओं में शामिल रही। सरकार का तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं में समय के साथ बदलाव आया है और नई परिस्थितियों के अनुरूप कानून को भी अपडेट करना जरूरी है।

घर पर डिलीवरी को लेकर सरकार क्यों हुई सख्त?

Tamil Nadu Home Delivery पर सरकार की सख्ती के पीछे हाल ही में सामने आया एक मामला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोयंबटूर जिले में घर पर प्रसव के बाद एक महिला की मौत की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षित प्रसव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

जानकारी के मुताबिक, जून में उथुकुली के पास पुंजई थलाइविपालयम की रहने वाली 32 वर्षीय शशिकला ने अपने दूसरे बच्चे को घर पर जन्म दिया था। प्रसव के करीब चार दिन बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और एक निजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद घर पर प्रसव के दौरान महिलाओं को होने वाले संभावित जोखिमों को लेकर चर्चा तेज हो गई। सरकार का मानना है कि प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, हाई ब्लड प्रेशर, बच्चे की स्थिति में अचानक बदलाव या अन्य मेडिकल इमरजेंसी होने पर तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता जरूरी हो सकती है।

अस्पताल या मान्यता प्राप्त मेडिकल संस्थान में प्रसव होने पर डॉक्टर, नर्स, दवाएं, जरूरी उपकरण और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इसके विपरीत, Tamil Nadu Home Delivery के दौरान किसी जटिलता की स्थिति में अस्पताल पहुंचने में लगने वाला समय मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।

जल्द पेश होगा अलग संशोधन

स्वास्थ्य सचिव दराज अहमद ने भी संकेत दिया है कि नया पब्लिक हेल्थ एक्ट जल्द लाया जा सकता है। हालांकि, Tamil Nadu Home Delivery से जुड़े मामले को तत्काल प्रभाव से संबोधित करने के लिए अलग से संशोधन पेश किए जाने की तैयारी है।

इसका मतलब यह है कि सरकार नए व्यापक स्वास्थ्य कानून के आने का इंतजार किए बिना घर पर प्रसव से जुड़े नियमों में बदलाव करना चाहती है। सरकार की प्राथमिकता सुरक्षित प्रसव और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बताया जा रहा है।

हालांकि, प्रस्तावित नियमों को लेकर यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कानून में किन परिस्थितियों को शामिल किया जाता है। भारत में कुछ परिवार अस्पताल से दूर ग्रामीण इलाकों में रहते हैं और कई बार आपात स्थिति या समय पर परिवहन उपलब्ध नहीं होने के कारण घर पर ही प्रसव हो जाता है। ऐसे मामलों और जानबूझकर बिना चिकित्सकीय निगरानी के घर पर प्रसव कराने के बीच कानूनी अंतर स्पष्ट करना जरूरी होगा।

महिलाओं की सुरक्षा पर रहेगा फोकस

सरकार की ओर से Tamil Nadu Home Delivery पर कार्रवाई का प्रमुख आधार महिलाओं की सुरक्षा बताया जा रहा है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान कई ऐसी जटिलताएं हो सकती हैं, जिनका पहले से अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से संस्थागत प्रसव और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी को सुरक्षित विकल्प मानते रहे हैं।

नए कानून में केवल प्रतिबंध या सजा का प्रावधान ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने और सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में अस्पतालों तक आसान पहुंच, एंबुलेंस सेवा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर जांच जैसी सुविधाएं मजबूत करना जरूरी होगा।

यदि Tamil Nadu Home Delivery को दंडनीय बनाने का प्रावधान लागू होता है, तो इसके साथ सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गर्भवती महिलाओं के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हों। इससे परिवारों को सुरक्षित प्रसव के लिए अस्पताल जाने में परेशानी नहीं होगी।

नए कानून से क्या बदल सकता है?

प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद तमिलनाडु में घर पर प्रसव कराने को लेकर मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का उद्देश्य लोगों को मेडिकल संस्थानों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना और ऐसे मामलों को रोकना है, जहां बिना पर्याप्त चिकित्सा सुविधा के प्रसव कराया जाता है।

हालांकि, अंतिम तस्वीर नया कानून और उसके नियम सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि Tamil Nadu Home Delivery के मामले में सजा किसे दी जाएगी, किन परिस्थितियों में कानून लागू होगा और प्राकृतिक या आपात स्थिति में घर पर हुए प्रसव के लिए क्या प्रावधान रखे जाएंगे।

फिलहाल सरकार ने संकेत दे दिया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर तमिलनाडु में नियमों को और सख्त किया जा सकता है। नए पब्लिक हेल्थ एक्ट और प्रस्तावित संशोधन के सामने आने के बाद Tamil Nadu Home Delivery को लेकर कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद

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