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दिमाग पर हुई नई रिसर्च ने खोला 50 करोड़ साल पुराना राज, नए डाटा से चौंक गए वैज्ञानिक

खबर इंडिया की।क्या हमारा दिमाग वास्तव में एक ही तरह की शुरुआती कोशिकाओं से बनता है? Human Brain Development को लेकर वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने इस सवाल को एक नए नजरिए से देखने का मौका दिया है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की अगुवाई में हुई एक स्टडी में पता चला है कि इंसानी दिमाग के आगे और पीछे के हिस्सों का विकास शुरुआती भ्रूण अवस्था में अलग-अलग सेल सिस्टम से होता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिमाग के इन हिस्सों की विकास यात्रा शुरुआत से ही अलग हो सकती है। इस खोज से न सिर्फ मानव मस्तिष्क के विकास को समझने में मदद मिल सकती है, बल्कि कुछ गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर रिसर्च के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।

रिसर्च में खास तौर पर Hindbrain यानी पश्च मस्तिष्क से जुड़े मोटर न्यूरॉन्स को लैब में तैयार करने की दिशा में सफलता हासिल की गई है। वैज्ञानिकों के लिए यह उपलब्धि इसलिए अहम है क्योंकि इन कोशिकाओं को लैब में सही तरीके से विकसित करना लंबे समय से चुनौती रहा है।

दिमाग के तीन प्रमुख हिस्से कौन से हैं?

इंसानी दिमाग को सामान्य तौर पर तीन प्रमुख हिस्सों में बांटकर समझा जाता है—Forebrain यानी अग्रस्तिष्क, Midbrain यानी मध्य मस्तिष्क और Hindbrain यानी पश्च मस्तिष्क।

अग्रस्तिष्क दिमाग का वह हिस्सा है जो सोचने, तर्क करने, भाषा, याददाश्त और चेतना जैसी जटिल क्षमताओं से जुड़ा है। इंसानी व्यवहार और उच्च स्तर की मानसिक गतिविधियों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

मध्य मस्तिष्क कई महत्वपूर्ण न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों और शरीर से आने-जाने वाले संकेतों के समन्वय में भूमिका निभाता है।

वहीं पश्च मस्तिष्क शरीर की कई बुनियादी गतिविधियों से जुड़ा है। इसमें सांस लेने, दिल की धड़कन, नींद और चेहरे की कुछ मांसपेशियों के नियंत्रण जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

अब तक दिमाग के इन हिस्सों के विकास को समझने के लिए वैज्ञानिकों के सामने कई सवाल रहे हैं। नई रिसर्च ने इनमें से एक महत्वपूर्ण सवाल के जवाब की दिशा में कदम बढ़ाया है।

दिमाग के आगे और पीछे के हिस्से का विकास अलग-अलग

स्टडी के मुताबिक, भ्रूण के विकास के शुरुआती चरण में दिमाग के आगे और पीछे के हिस्से अलग-अलग सेल सिस्टम से विकसित होते हैं।

इसका मतलब यह है कि दिमाग के इन हिस्सों की कोशिकाओं की विकासात्मक पहचान शुरुआत से ही अलग हो सकती है। वैज्ञानिकों के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लैब में अलग-अलग प्रकार के न्यूरॉन्स तैयार करते समय कोशिकाओं की शुरुआती पहचान और विकास का रास्ता बेहद अहम होता है।

रिसर्च से यह समझने में मदद मिली कि कुछ ऐसी कोशिकाएं जिन्हें पहले एक खास प्रकार के दिमागी सेल के तौर पर विकसित किया जा रहा था, उनकी वास्तविक विकासात्मक पहचान अलग हो सकती है।

यही वजह उन चुनौतियों को समझाने में मदद कर सकती है, जिनका सामना वैज्ञानिकों को इंसानी Hindbrain की कोशिकाओं को लैब में विकसित करते समय करना पड़ा।

पहली बार लैब में तैयार किए गए Hindbrain Motor Neurons

नई जानकारी के आधार पर स्टैनफोर्ड की रिसर्च टीम ने स्टेम सेल की मदद से इंसानी Hindbrain motor neurons तैयार किए।

मोटर न्यूरॉन्स शरीर में दिमाग और मांसपेशियों के बीच संकेत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन कोशिकाओं के प्रभावित होने पर शरीर की मांसपेशियों की गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

लैब में इन न्यूरॉन्स को तैयार करने की क्षमता वैज्ञानिकों को बीमारी से जुड़े सेलुलर बदलावों का अध्ययन करने में मदद कर सकती है। इसका एक बड़ा फायदा यह है कि रिसर्चर्स अब नियंत्रित लैब परिस्थितियों में इन कोशिकाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

यह भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से जुड़े प्रयोगों और संभावित उपचारों की शुरुआती जांच के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

ALS और SMA जैसी बीमारियों की रिसर्च में क्यों अहम है यह खोज?

नई रिसर्च का संभावित महत्व ALS (Amyotrophic Lateral Sclerosis) और SMA (Spinal Muscular Atrophy) जैसी बीमारियों के अध्ययन में भी हो सकता है।

इन बीमारियों में मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं। लेकिन मरीज के शरीर से ऐसी विशिष्ट कोशिकाओं को सीधे निकालकर उनका अध्ययन करना आसान नहीं होता।

ऐसे में अगर वैज्ञानिक स्टेम सेल से संबंधित न्यूरॉन्स को लैब में तैयार कर सकें, तो बीमारी के दौरान कोशिकाओं में होने वाले बदलावों का अध्ययन करना आसान हो सकता है।

इसके अलावा, भविष्य में संभावित दवाओं या अन्य उपचारों की शुरुआती टेस्टिंग में भी ऐसी कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इस रिसर्च को किसी बीमारी का तैयार इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसके चिकित्सकीय इस्तेमाल तक पहुंचने के लिए आगे कई स्तरों पर रिसर्च और परीक्षण जरूरी होंगे।

50 करोड़ साल पुराने विकासक्रम से क्या संबंध है?

इस रिसर्च का सबसे दिलचस्प पहलू मानव दिमाग के विकास के इतिहास से जुड़ा है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, दिमाग के इन अलग-अलग विकासात्मक रास्तों की जड़ें बहुत पुराने विकासक्रम में हो सकती हैं। यह अवधि करीब 50 करोड़ साल पहले तक जाती है।

इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग जीवों में नर्वस सिस्टम और दिमाग के विभिन्न हिस्सों का विकास किस तरह हुआ।

हालांकि, इस विकासवादी संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है। वैज्ञानिक अब यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या नर्वस सिस्टम के दूसरे हिस्सों और रीढ़ की हड्डी में भी इसी तरह अलग-अलग विकासात्मक रास्तों का इतिहास मौजूद रहा है।

मेडिकल साइंस के लिए आगे क्या मायने?

यह खोज फिलहाल मुख्य रूप से मानव दिमाग के विकास और न्यूरॉन्स को लैब में तैयार करने की वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाती है। इसका सीधा इलाज में इस्तेमाल अभी भविष्य की बात है।

फिर भी, बीमारी से जुड़ी कोशिकाओं को लैब में विकसित करने की क्षमता न्यूरोलॉजिकल रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। वैज्ञानिक इन कोशिकाओं का इस्तेमाल बीमारी के कारणों को समझने, कोशिकाओं में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने और संभावित उपचारों की जांच के लिए कर सकते हैं।

आने वाले समय में अगर शोधकर्ता यह साबित कर पाते हैं कि नर्वस सिस्टम के दूसरे हिस्से भी इसी तरह अलग-अलग विकासात्मक सेल सिस्टम से जुड़े हैं, तो मानव मस्तिष्क और पूरे नर्वस सिस्टम के विकास को समझने का नजरिया और व्यापक हो सकता है।

यानी यह रिसर्च फिलहाल किसी बीमारी के इलाज का दावा नहीं करती, लेकिन Human Brain Development को समझने और लैब में विशिष्ट न्यूरॉन्स तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक कदम जरूर है।

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