उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 23 और 24 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में केंद्र सरकार के कामकाज, सरकारी योजनाओं की पहुंच और भविष्य की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मंत्रियों को योजनाओं की स्थिति की समीक्षा करने, कमियों और चुनौतियों की पहचान करने तथा पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
PM Modi Chintan Shivir में मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर चर्चा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने अलग-अलग समूहों के साथ बातचीत की और इसके बाद सभी मंत्रियों को संबोधित किया। बैठक का एक प्रमुख मुद्दा यह रहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन सभी पात्र लोगों तक पहुंचे, जो इसके हकदार हैं।
40-45 प्रमुख सरकारी योजनाओं की जानकारी रखने के निर्देश
चिंतन शिविर में मंत्रियों से कहा गया कि वे सरकार की करीब 40-45 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की पूरी जानकारी रखें। इन योजनाओं के बारे में लोगों को प्रभावी तरीके से जानकारी देने और पात्र लाभार्थियों तक उनका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकारी योजनाएं बनाने के साथ-साथ उनकी अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकार का फोकस योजनाओं की डिलीवरी व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोगों के सामने आने वाली परेशानियों को कम करने पर रहा।
मंत्रियों से योजनाओं की कमियां पहचानने को कहा
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से अपने-अपने मंत्रालयों की योजनाओं और कामकाज की समीक्षा करने को कहा। इसमें योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही दिक्कतों, कमियों और चुनौतियों की पहचान कर जरूरी सुधार करने पर जोर दिया गया।
चिंतन शिविर में सरकारी नीतियों के लागू होने की स्थिति, मंत्रालयों के बीच तालमेल, समय प्रबंधन और लोगों को सरकारी सेवाएं बेहतर तरीके से उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सरकार की ओर से हाल के समय में मंत्रालयों को अपनी गतिविधियों के लाइव डैशबोर्ड तैयार करने, काम की प्रगति की नियमित समीक्षा करने और कर्मचारियों से सुझाव लेने जैसे कदम उठाने को कहा गया है।
मीडिया से बातचीत से पहले मुद्दों की पूरी जानकारी लेने का निर्देश
मंत्रियों को मीडिया से बातचीत करने से पहले संबंधित मुद्दों और समस्याओं की पूरी जानकारी रखने की सलाह दी गई। साथ ही चिंतन शिविर में दूसरे मंत्रियों के अनुभवों और उनसे मिली सीख को साझा करने पर भी जोर दिया गया।
सरकार आने वाले समय में जनता के साथ संवाद को और बेहतर बनाने पर भी ध्यान देगी। मंत्रियों से कहा गया कि वे कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाएं।
महिलाओं और युवाओं तक योजनाओं की पहुंच पर चर्चा
चिंतन शिविर के पहले दिन शासन व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और महिलाओं तथा युवाओं तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए योजनाओं की डिलीवरी व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विचार किया गया।
बैठक में ‘जन विश्वास से जन भागीदारी’, सरकारी सुधारों और विकसित भारत@2047 की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई। दो दिवसीय बैठक का उद्देश्य सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करने के साथ आगे की प्राथमिकताओं और सुधारों की दिशा तय करना था।
विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ाने की कवायद
सरकार के अनुसार, विकसित भारत@2047 के लिए विजन तैयार करने की प्रक्रिया 2021 से चल रही है। इसके तहत सचिवों के 10 क्षेत्रीय समूह बनाए गए हैं, जो देश के विकास के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने पर काम कर रहे हैं।
इस प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद के सामने अब तक विकसित भारत@2047 के अलग-अलग पहलुओं पर आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं। मौजूदा चिंतन शिविर इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।
सरकारी कामकाज को आसान बनाने पर भी जोर
चिंतन शिविर में लोगों का जीवन आसान बनाने, नियमों और अनुपालन का बोझ कम करने तथा सरकारी सेवाओं की डिलीवरी में सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सरकार का जोर मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ नीतियों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने पर है। इसके अलावा योजनाओं की प्रगति की निगरानी और सरकारी कामकाज में सुधार के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले भी मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को लोगों के लिए ज्यादा आसान और उपयोगी बनाने पर जोर दिया था। चिंतन शिविर में भी सरकार और जनता के बीच बेहतर संवाद को आगे की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।
दो दिवसीय चिंतन शिविर में हुई चर्चाओं का व्यापक उद्देश्य सरकारी योजनाओं की समीक्षा, मंत्रालयों के बीच समन्वय बढ़ाना, सुधारों की पहचान करना और विकसित भारत@2047 के लिए आगे की कार्ययोजना को गति देना रहा।














