खबर इंडिया की।गाजा में युद्ध और विस्थापन के बीच महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा का खतरा लगातार बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA (United Nations Population Fund) की सितंबर 2026 में जारी रिपोर्ट में बाल विवाह, जबरन शादी, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच गाजा में रिपोर्ट किए गए जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123% की बढ़ोतरी हुई है।
UNFPA की रिपोर्ट ‘I Want to Feel Safe Again: Women’s Voices From Displacement Camps in Khan Younis and Gaza City’ 17 सितंबर को जारी हुई थी। यह रिपोर्ट गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं से बातचीत और 16 फोकस ग्रुप चर्चाओं पर आधारित है। ये बातचीत दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच की गई थी।
14 साल की बेटी की आटे के बदले शादी का दावा
रिपोर्ट में युद्ध और भुखमरी जैसी परिस्थितियों के बीच परिवारों पर बढ़ते दबाव का जिक्र किया गया है। सामने आए मामलों में एक पिता ने कथित तौर पर अपनी 14 साल की बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी।
UNFPA ने बताया कि गाजा में भोजन, आय, सुरक्षित रहने की जगह और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी ने परिवारों की स्थिति बेहद मुश्किल कर दी है। ऐसे हालात में कुछ परिवार कम उम्र की लड़कियों की शादी को आर्थिक या सुरक्षा से जुड़ी मजबूरी के तौर पर देखने लगे हैं।
UNFPA के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के दौरान जबरन और बाल विवाह के रिपोर्टेड मामलों में 123% वृद्धि हुई। संस्था ने यह भी कहा है कि बाल विवाह के साथ किशोरियों में गर्भधारण का खतरा बढ़ता है, जबकि युद्ध के कारण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले ही गंभीर रूप से प्रभावित है।
रेप के बाद आरोपियों से शादी कराने के मामले
रिपोर्ट में यौन हिंसा के ऐसे मामलों का भी जिक्र है, जिनमें पीड़िताओं को सामाजिक बदनामी से बचाने के नाम पर चुप कराने या उनकी शादी कराने की कोशिश की गई।
महिलाओं ने UNFPA को बताया कि टेंट, स्कूलों, सड़कों और समुद्र किनारे जैसे स्थानों पर भी यौन हिंसा की घटनाओं की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में आरोपी पीड़िता को पहले से जानता था। ऐसे मामलों में परिवार या समुदाय की ओर से घटना को छिपाने का दबाव भी बताया गया।
कुछ मामलों में पीड़िता की शादी कथित आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से कराने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में महिलाओं ने बताया कि सामाजिक बदनामी और परिवार की ‘इज्जत’ बचाने की सोच के कारण पीड़िताओं की स्थिति और मुश्किल हो जाती है।
स्कूल में घटना, अगले दिन वहीं शादी और जश्न
रिपोर्ट में एक महिला के हवाले से बताया गया कि स्कूलों को विस्थापित लोगों के लिए शरणस्थल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे स्थानों पर यौन हिंसा की घटनाओं की जानकारी भी सामने आई।
एक महिला ने UNFPA से बातचीत में दावा किया कि स्कूल में रेप की घटना सामने आने के अगले ही दिन उसी जगह शादी और जश्न आयोजित किया जाता था। महिला के मुताबिक, युद्ध से पहले ऐसी घटनाओं की कल्पना करना भी मुश्किल था।
यह बयान रिपोर्ट में दर्ज महिलाओं के व्यक्तिगत अनुभवों का हिस्सा है। UNFPA ने रिपोर्ट को गाजा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समझने और मानवीय सहायता की योजना बनाने के लिए तैयार किया है।
दिव्यांग लड़कियों पर भी बढ़ा खतरा
UNFPA रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को विशेष रूप से जोखिम में बताया गया है। विस्थापन, असुरक्षित रहने की जगह और सहायता सेवाओं तक सीमित पहुंच के कारण उनके लिए हिंसा से बचना और घटना के बाद मदद हासिल करना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
रिपोर्ट में गाजा सिटी की एक महिला के हवाले से एक ऐसी लड़की का मामला बताया गया, जो करीब सात घंटे तक लापता रही। वापस लौटने पर वह रो रही थी। परिवार ने इसे डर के कारण हुई प्रतिक्रिया समझा, लेकिन लगभग दो महीने बाद पता चला कि वह गर्भवती थी और उसके साथ कथित तौर पर रेप हुआ था।
एक अन्य मामले में करीब 20 साल की ऐसी महिला का जिक्र है, जिसे बातचीत और परिस्थितियों को समझने में कठिनाई होती थी। उसके बारे में बताया गया कि कई युवकों ने उसका उत्पीड़न किया और उनमें से एक ने कथित तौर पर उसके साथ रेप किया।
माता-पिता की मौत के बाद 14-15 साल की लड़कियों की शादी
युद्ध में माता-पिता या देखभाल करने वाले लोगों को खो चुकी किशोरियां भी बाल विवाह के जोखिम का सामना कर रही हैं।
रिपोर्ट में गाजा सिटी की एक महिला के हवाले से दो लड़कियों का मामला बताया गया है, जिनकी उम्र 14 और 15 साल थी। उनके माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने कथित तौर पर दोनों की शादी कर दी।
महिला के मुताबिक, चाचा लड़कियों की जिम्मेदारी और खर्च उठाना नहीं चाहते थे। ऐसे में दोनों की शादी इतनी कम उम्र में कर दी गई कि वे शादी और आगे की जिंदगी की जिम्मेदारियों को पूरी तरह समझ भी नहीं पा रही थीं।
UNFPA की पहले की रिपोर्टिंग भी बताती है कि गाजा में विस्थापन, गरीबी, परिवार से अलगाव और सुरक्षा की कमी बाल विवाह के बढ़ते जोखिम से जुड़े प्रमुख कारण हैं।
परिवार के अंदर भी यौन हिंसा के मामले
रिपोर्ट में घरेलू और पारिवारिक स्तर पर यौन हिंसा का एक मामला भी दर्ज किया गया है। एक महिला ने बताया कि पति की मौत के बाद उसके देवर ने सोते समय उसके साथ कथित तौर पर रेप किया। बाद में महिला गर्भवती हो गई।
मामले की जानकारी परिवार को मिलने के बाद आरोपी के परिवार की ओर से दोनों की शादी कराने की कोशिश की गई। मामला जज तक पहुंचा, लेकिन शादी नहीं हो सकी।
यह मामला दिखाता है कि यौन हिंसा के बाद पीड़िता को न्याय और सहायता मिलने के बजाय सामाजिक दबाव का सामना भी करना पड़ सकता है।
युद्ध के साथ घरेलू हिंसा भी बढ़ी
UNFPA की रिपोर्ट में महिलाओं ने केवल बाहरी खतरे की बात नहीं की, बल्कि परिवार के भीतर बढ़ती हिंसा का भी जिक्र किया है। महिलाओं के मुताबिक, युद्ध के दौरान घर तबाह होने, विस्थापन, आर्थिक संकट और लगातार तनाव ने परिवारों के भीतर भी तनाव बढ़ाया है।
कुछ महिलाओं ने पति, पिता, भाई और ससुराल के सदस्यों की ओर से मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न की घटनाओं के बारे में बताया।
एक महिला ने कहा कि युद्ध से पहले उसका पति उस पर गुस्सा नहीं करता था, लेकिन घर और रोजमर्रा की जिंदगी तबाह होने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया और वह अपना गुस्सा पत्नी और बच्चों पर निकालने लगा।
UNFPA की सितंबर 2026 की जानकारी के मुताबिक, गाजा में 2026 के पहले छह महीनों में रिपोर्ट किए गए कुल जेंडर-बेस्ड वायलेंस मामलों में भी बढ़ोतरी हुई। संस्था ने बताया कि जनवरी-मार्च की तुलना में अप्रैल-जून में रिपोर्टेड मामलों में 27% और जनवरी-मार्च में पिछली तिमाही के मुकाबले 32% की वृद्धि दर्ज हुई।
UNFPA का कहना है कि गाजा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए जेंडर-बेस्ड वायलेंस से बचाव और पीड़ितों को सहायता देने वाली सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। संस्था ने यह भी कहा है कि विस्थापन शिविरों में सुरक्षित स्थानों तक महिलाओं और लड़कियों की पहुंच बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि कई पीड़िताएं इन्हीं स्थानों पर हिंसा की जानकारी सुरक्षित तरीके से साझा कर पाती हैं।














