उमाकांत त्रिपाठी।भारतीय सेनाओं को आधुनिक हथियार और सैन्य तकनीक जल्द उपलब्ध कराने के लिए सरकार रक्षा खरीद से जुड़े वित्तीय अधिकारों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत रक्षा मंत्री और वित्त मंत्रालय की खरीद मंजूरी की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बड़े रक्षा सौदों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना है।
सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री की मौजूदा वित्तीय मंजूरी सीमा ₹2,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹5,000 करोड़ करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। वहीं, वित्त मंत्रालय की मंजूरी सीमा को ₹3,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹10,000 करोड़ करने पर भी विचार किया जा रहा है।
बड़े रक्षा सौदों में CCS की मंजूरी का इंतजार घटेगा
मौजूदा व्यवस्था में ₹3,000 करोड़ से अधिक के बड़े रक्षा खरीद प्रस्तावों को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी यानी CCS (सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति) की मंजूरी की जरूरत होती है।
अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है, तो बड़ी संख्या में रक्षा खरीद के फैसले मंत्रालय स्तर पर ही लिए जा सकेंगे। इससे प्रस्तावों को CCS तक भेजने और मंजूरी मिलने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
सरकार का फोकस ऐसी सैन्य तकनीक को जल्द हासिल करने पर है, जिसमें लगातार तेजी से बदलाव हो रहा है। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए हथियारों और सैन्य उपकरणों की समय पर खरीद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब एक तिहाई बड़े सौदों पर असर
प्रस्तावित वित्तीय अधिकार लागू होने के बाद करीब एक तिहाई बड़े रक्षा सौदों को CCS की मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं पड़ सकती है।
दैनिक भास्कर की पिछले पांच साल के रक्षा खरीद फैसलों की पड़ताल में कम से कम 13 ऐसे बड़े अनुबंध सामने आए, जिनकी कीमत ₹3,000 करोड़ से ज्यादा थी और जिन्हें CCS की मंजूरी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य खास तौर पर उन मामलों में निर्णय प्रक्रिया को आसान करना है, जहां मंत्रालय स्तर पर ही खरीद को मंजूरी दी जा सकती है।
घरेलू रक्षा खरीद को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा
प्रस्तावित बदलाव का सबसे ज्यादा असर घरेलू रक्षा उद्योग से होने वाली खरीद पर पड़ने की संभावना है। दैनिक भास्कर की 2021 से 2025 तक के सरकारी रिकॉर्ड की पड़ताल में ₹3,000 करोड़ से अधिक मूल्य के 14 बड़े घरेलू रक्षा खरीद मामले सामने आए। इनकी कुल कीमत करीब ₹3.01 लाख करोड़ थी।
इन सौदों में तेजस लड़ाकू विमान, प्रचंड और ध्रुव हेलिकॉप्टर, सुखोई विमान और उनके इंजन, ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका गोला-बारूद, ATAGS तोप, रडार और नौसेना के फ्लीट सपोर्ट शिप जैसे रक्षा उपकरण शामिल रहे हैं।
रक्षा क्षेत्र में सरकार लगातार स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के साथ खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने पर भी जोर दे रही है। ऐसे में वित्तीय अधिकारों की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव घरेलू रक्षा कंपनियों से होने वाली बड़ी खरीद के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
HAL ने वायुसेना को तेजस और HTT-40 सौंपे
इसी बीच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारतीय वायु सेना को दो लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) टू-सीटर ट्रेनर तेजस सौंपे हैं।
इसके अलावा HAL ने वायुसेना को हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40 (HTT-40) बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट भी सौंपे। कंपनी ने पवनहंस लिमिटेड को चार नेक्स्ट जेनरेशन ध्रुव हेलिकॉप्टर भी सौंपे हैं।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी प्लेटफॉर्म और तकनीक की हिस्सेदारी बढ़ाने के सरकार के प्रयासों के बीच इन डिलीवरी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।














