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Allahabad High Court Ayush Malik Case: मुस्लिम लड़की से प्यार, दवा कारोबारी का बेटा हिंदू से बना मुस्लिम, कोर्ट ने सुनाया ये फैसला

Allahabad High Court Ayush Malik Case डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के शामली के रहने वाले आयुष मलिक का मामला इन दिनों चर्चा में है। आयुष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाने और अपनी गर्लफ्रेंड चांदनी कुरैशी से शादी करने की इच्छा जताई। अदालत ने कहा कि बालिग व्यक्ति को अपने धर्म, निवास और जीवनसाथी के चुनाव से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। केवल परिवार की असहमति के आधार पर उसके व्यक्तिगत फैसलों पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

इस मामले में आयुष के पिता देवराज मलिक ने चांदनी कुरैशी पर उनके बेटे का जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। मामले के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने विरोध किया और पुलिस ने चांदनी, उनके पिता समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। हालांकि, आयुष ने हाईकोर्ट में कहा कि उसने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया है और वह चांदनी से शादी करना चाहता है।

चांदनी के परिवार ने क्या आरोप लगाए?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, चांदनी कुरैशी के परिवार ने आरोप लगाया कि इस मामले में उनके कई रिश्तेदारों को भी फंसाया गया। चांदनी के ममेरे भाई मोहम्मद सलीम ने कहा कि चांदनी और आयुष की मुलाकात मेडिकल स्टोर और फिजियोथेरेपी सेंटर के आसपास हुई थी।

सलीम के मुताबिक, आयुष अपनी मां को लेकर उस अस्पताल में आता था, जहां चांदनी फिजियोथेरेपी का काम करती थी। उन्होंने दावा किया कि चांदनी ने शुरुआत में ही आयुष से कहा था कि दोनों अलग-अलग धर्मों से हैं और वह यह रिश्ता नहीं रखना चाहती।

सलीम ने आरोप लगाया कि चांदनी के परिवार को साजिश के तहत मामले में फंसाया गया और कई रिश्तेदारों को जेल जाना पड़ा। उनका कहना था कि परिवार के कुछ ऐसे लोगों को भी आरोपी बनाया गया, जिन्हें दस्तखत तक करने नहीं आते।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके घर के ताले तोड़े गए और उन्हें परेशान किया गया। ये आरोप चांदनी के परिवार की ओर से लगाए गए हैं।

आयुष के पिता ने लगाया था जबरन धर्मांतरण का आरोप

आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक शामली के दवा कारोबारी बताए जाते हैं। वह भारत मेडिकल स्टोर चलाते हैं और शामली जिले के केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।

6 जून 2026 को देवराज मलिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि चांदनी कुरैशी ने उनके बेटे को प्रेमजाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण करा दिया और उसका नाम मोहम्मद अली रख दिया।

शिकायत के मुताबिक, आयुष ने दाढ़ी बढ़ानी शुरू कर दी थी और मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने लगा था। उसकी टोपी पहनकर नमाज पढ़ने की तस्वीर भी सामने आई थी। इसके बाद हिंदू संगठनों ने मामले को लेकर विरोध जताया।

योग साधना आश्रम के महंत स्वामी यशवीर ने भी वीडियो जारी कर इस मामले पर प्रतिक्रिया दी थी। विरोध बढ़ने के बाद पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

रिपोर्ट के मुताबिक, 7 जून को चांदनी और उनके पिता समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। करीब डेढ़ महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 24 जुलाई को पिता-बेटी को जमानत मिली।

आयुष ने वीडियो जारी कर हिंदू धर्म में लौटने की बात कही थी

मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब आयुष ने वीडियो जारी कर कहा कि वह अपनी मां की परेशानी को देखते हुए अपने मूल धर्म हिंदू धर्म में लौट आया है। वीडियो में उसने परिवार से माफी भी मांगी थी।

इसके बाद 9 सितंबर को आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि आयुष को जबरन घर में कैद करके रखा जा रहा है।

अदालत ने इस मामले में आयुष के पिता को उसे लेकर कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया। इसके बाद 16 सितंबर को आयुष को हाईकोर्ट में पेश किया गया।

हाईकोर्ट में आयुष ने क्या कहा?

जस्टिस संदीप जैन की बेंच के सामने आयुष मलिक ने अपनी उम्र करीब 31 साल बताई। उसने कहा कि उसने बी.फार्मा तक पढ़ाई की है और वर्ष 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था।

आयुष ने अदालत को बताया कि वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहता है, लेकिन उसके पिता और परिवार को यह फैसला मंजूर नहीं है। उसने यह आरोप भी लगाया कि उसे धमकियां दी गईं और जून 2026 से घर में नजरबंद रखा गया।

दूसरी ओर, पिता देवराज मलिक ने बेटे के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनके बेटे का ब्रेनवॉश किया है और वह एक पिता के तौर पर उसके भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

हाईकोर्ट ने कहा- बालिग को अपने फैसले लेने का अधिकार

अदालत ने कहा कि आयुष मलिक बालिग है और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने में सक्षम है। उसे अपनी इच्छा के अनुसार धर्म का पालन करने, अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने और कानून के मुताबिक विवाह करने का अधिकार है।

कोर्ट ने यह भी माना कि पिता का अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि, परिवार की चिंता किसी बालिग नागरिक के संवैधानिक अधिकारों से ऊपर नहीं हो सकती।

अदालत की टिप्पणी का मुख्य आधार यह था कि किसी बालिग व्यक्ति के व्यक्तिगत फैसलों पर केवल परिवार की असहमति के कारण रोक नहीं लगाई जा सकती। धर्म, निवास और जीवनसाथी का चुनाव व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं।

चांदनी के परिवार ने कहा- हमें झूठे मामले में फंसाया गया

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद चांदनी के परिवार ने अपनी परेशानी का जिक्र किया। मोहम्मद सलीम ने दावा किया कि यदि चांदनी का उद्देश्य आयुष को फंसाना होता, तो वह उससे कोर्ट मैरिज कर सकती थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मामले में परिवार के अन्य रिश्तेदारों को क्यों आरोपी बनाया गया।

सलीम ने कहा कि परिवार को आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब होने के कारण उनके परिवार को निशाना बनाया गया।

इन आरोपों पर शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मामला अदालत में विचाराधीन है। पुलिस फिलहाल इसमें हस्तक्षेप नहीं कर रही है। यदि कोई नई शिकायत मिलती है, तो उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

पिता बोले- आयुष मेरा बेटा है और रहेगा

हाईकोर्ट के आदेश के बाद देवराज मलिक ने कहा कि आयुष उनका बेटा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि वह अपने बेटे के बिना नहीं रह सकते और चाहते हैं कि वह परिवार के साथ रहे।

देवराज मलिक ने यह भी कहा कि अदालत का फैसला उन्हें मान्य है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में आयुष का बाद का कोई अलग बयान सामने नहीं आया था।

निष्कर्ष: आयुष मलिक का मामला धर्म परिवर्तन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और परिवार की असहमति से जुड़े सवालों को सामने लाता है। हाईकोर्ट ने बालिग व्यक्ति की पसंद और संवैधानिक अधिकारों के महत्व पर जोर दिया। वहीं, चांदनी के परिवार ने मामले में खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने का आरोप लगाया है। मामले से जुड़े आरोपों और दावों को अदालत के निष्कर्षों से अलग समझना जरूरी है।

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