उमाकांत त्रिपाठी। PM Modi on Cyber Fraud. डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोबाइल फोन और डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर फ्रॉड और डीपफेक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास करने का आह्वान किया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जितना बढ़ रहा है, उतना ही जरूरी इनके सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना भी है।
PM Modi on Cyber Fraud से जुड़ा यह बयान ऐसे समय में आया है, जब डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन भुगतान और मोबाइल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने टेक्नोलॉजी के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने और भ्रष्टाचार व लीकेज रोकने की बात भी कही।
DBT से 50 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करके अब तक 50 लाख करोड़ रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर किया गया है।
पीएम मोदी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से करीब 5 लाख करोड़ रुपये की लीकेज रोकने में मदद मिली है। DBT के जरिए सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है। इसका उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका कम करना और सरकारी सहायता को अधिक पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से सरकारी सेवाओं की डिलीवरी में बदलाव आया है। उन्होंने उन लोगों पर भी टिप्पणी की, जिनकी कथित तौर पर गलत तरीके से होने वाली कमाई डिजिटल व्यवस्था के कारण बंद हुई है।
उन्होंने कहा, “जिन लोगों की आसानी से होने वाली कमाई बंद हो गई है, क्या वे मोदी को पसंद करेंगे? वे चाहे जितना शोर-शराबा कर लें, लेकिन मैं इसी दिशा में आगे बढ़ता रहूंगा।”
साइबर फ्रॉड और डीपफेक से निपटने के लिए वैश्विक प्रयास जरूरी
प्रधानमंत्री ने डिजिटल टेक्नोलॉजी के साथ सामने आ रही सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर जोर दिया। मोबाइल फोन, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर फ्रॉड और डीपफेक जैसी समस्याएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
डीपफेक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो में इस तरह बदलाव किया जा सकता है कि वह वास्तविक दिखाई दे। इसका इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने, लोगों को धोखा देने या किसी की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
ऐसे मामलों से निपटने के लिए तकनीकी सुरक्षा के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में वैश्विक स्तर पर मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई।
डिजिटल सेवाओं के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और साइबर अपराधों पर कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
डिजिटल डिवाइड से आगे बढ़ा भारत: पीएम मोदी
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने साल 2022 में इसी मंच से 5G सेवा की शुरुआत का भी जिक्र किया। उन्होंने एक दशक पहले की स्थिति को याद करते हुए कहा कि उस समय डिजिटल डिवाइड यानी डिजिटल सुविधाओं तक पहुंच में असमानता एक बड़ी चुनौती थी।
पहले नई टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं का लाभ समाज के सीमित वर्ग तक पहुंचता था। लेकिन टेलीकॉम क्षेत्र में हुए बदलावों ने कनेक्टिविटी का विस्तार किया है। अब डिजिटल टेक्नोलॉजी सरकारी सेवाओं, स्थानीय भाषाओं में कंटेंट और गेमिंग जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा दे रही है।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, टेक्नोलॉजी का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से हो और लोगों का भरोसा बना रहे।
डिजिटल इंडिया के साथ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि टेलीकॉम और डिजिटल टेक्नोलॉजी आज अहम भूमिका निभा रही हैं। इसलिए इनसे जुड़े सिक्योरिटी फ्रेमवर्क को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और फर्जी डिजिटल कंटेंट जैसी चुनौतियों से निपटना जरूरी हो गया है। इसके लिए तकनीकी कंपनियों, सरकारों और संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है।
डिजिटल सुरक्षा के प्रति आम लोगों की सतर्कता भी अहम है। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध कॉल पर निजी जानकारी साझा करने या बिना जांचे किसी वीडियो पर भरोसा करने से बचना चाहिए।
प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल लोगों की सुविधा और विकास के लिए होना चाहिए, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार तभी प्रभावी होगा, जब लोगों को ऑनलाइन सेवाओं पर भरोसा हो और साइबर अपराधों से बचाव के लिए मजबूत व्यवस्था मौजूद हो।
नोट: DBT से 50 लाख करोड़ रुपये के ट्रांसफर और करीब 5 लाख करोड़ रुपये की लीकेज रोकने के आंकड़े प्रधानमंत्री के संबोधन में किए गए दावे के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।















