Kenya Cult Death Case. केन्या में धर्म के नाम पर लोगों को भूखा रखकर मौत के मुंह में धकेलने के मामले में बड़ा फैसला आया है। Kenya Cult Death Case में धर्मगुरु पॉल मैकेंजी और उसके करीब 30 साथियों को 191 लोगों की मौत के मामले में दोषी ठहराया गया है। मृतकों में बड़ी संख्या बच्चों की बताई गई है। अदालत अब 6 नवंबर को दोषियों की सजा सुनाएगी।

मामला केन्या के शाकाहोला जंगल से जुड़ा है, जहां पुलिस को सामूहिक कब्रें मिली थीं। जांच के दौरान सैकड़ों शव बरामद किए गए। आरोप है कि मैकेंजी ने अपने अनुयायियों को दुनिया खत्म होने से पहले भूखे रहने के लिए कहा था। वह दावा करता था कि ऐसा करने से उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति होगी। हालांकि, मैकेंजी ने हत्या के आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने किसी को जबरन भूखा रहने के लिए मजबूर नहीं किया।
शाकाहोला जंगल में मिली थीं सामूहिक कब्रें
इस मामले का खुलासा मार्च 2023 में होना शुरू हुआ था। उस समय एक स्थानीय व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि उसके भाई और भाभी ने मैकेंजी के आदेश पर जंगल में अपने बच्चों को भूखा रखकर मार दिया था। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और मैकेंजी को गिरफ्तार किया।

शुरुआती कार्रवाई के बाद मैकेंजी जमानत पर रिहा हो गया था। हालांकि, अप्रैल 2023 में उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अधिकारियों ने शाकाहोला जंगल में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान सामूहिक कब्रों का पता चला और शवों को निकालने का काम शुरू किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, जंगल से अब तक 400 से ज्यादा शव मिल चुके हैं। अदालत में सोमवार को 191 लोगों की मौत से जुड़े मामले में फैसला सुनाया गया। अन्य मौतों की जांच और उनसे जुड़े कानूनी मामले अभी जारी हैं।
तीन चरणों में लोगों को भूखा रखने की थी योजना
सरकारी वकीलों के मुताबिक, मैकेंजी गुड न्यूज इंटरनेशनल चर्च के माध्यम से ईसाई धर्म के नाम पर एक ऐसा समूह चला रहा था, जिसके अनुयायियों के बीच दुनिया खत्म होने की बातें कही जाती थीं। आरोप है कि उसने लोगों को भूखा रखने की योजना अलग-अलग चरणों में बनाई थी।

योजना के मुताबिक, सबसे पहले बच्चों को भूखा रखा जाना था। इसके बाद महिलाओं और जवान लड़कों की बारी आती और आखिर में बाकी पुरुषों को भूखा रखने की योजना थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान जज डायना कावेद्जा मोचाचे ने बताया कि कुछ मामलों में बच्चों को उनके परिवारों से अलग कर दिया गया था। उन्हें खाना नहीं दिया गया, जबकि उनके माता-पिता के सामने यह सब होता रहा।
मैकेंजी ने अदालत में हत्या के आरोपों को खारिज किया। उसका कहना था कि उसने किसी को भूखा रहने के लिए बाध्य नहीं किया। हालांकि, अदालत ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उसे अन्य आरोपियों के साथ दोषी ठहराया।
हिरासत में रहते हुए 52 लोगों की मौत का निर्देश देने का आरोप
शाकाहोला जंगल में हुई मौतों के अलावा मैकेंजी पर दूसरे मामले भी चल रहे हैं। इनमें आतंकवाद से जुड़े आरोप शामिल हैं, जिनसे उसने इनकार किया है।
सरकारी वकीलों का आरोप है कि हिरासत में रहने के दौरान भी मैकेंजी ने जंगल से करीब 30 किलोमीटर दूर एक गांव में 52 लोगों की मौत का निर्देश दिया था। इस मामले में भी उसने खुद को निर्दोष बताया है।
मैकेंजी के रिश्तेदारों के मुताबिक, जमानत पर रिहा होने के बाद उसने दुनिया खत्म होने की तारीख को और करीब कर दिया था। हालांकि, इन दावों और अलग-अलग मामलों की कानूनी स्थिति को संबंधित जांच और अदालती कार्यवाही के आधार पर ही समझा जाना चाहिए।
बच्चों को स्कूल और अस्पताल जाने से भी रोकता था
जांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, मैकेंजी अपने अनुयायियों को बच्चों को स्कूल भेजने से रोकता था। परिवार में कोई बीमार पड़ता, तो उसे अस्पताल ले जाने की भी अनुमति नहीं दी जाती थी। वह कथित तौर पर स्कूलों और अस्पतालों को शैतान से जुड़ी संस्थाएं बताता था।
उसके अनुयायी जंगल में प्लास्टिक की चादरों और सूखी घास से बनी अस्थायी झोपड़ियों में रहते थे। मैकेंजी ने वहां रहने वाले समूहों के इलाकों के नाम बाइबिल से जुड़े रखे थे। इनमें यरुशलम और यहूदिया जैसे नाम शामिल थे।
इन परिस्थितियों ने जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी खड़ा किया कि धार्मिक मान्यताओं और कथित निर्देशों के नाम पर लोगों को सामान्य जीवन, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं से दूर कैसे रखा गया।
परिवारों ने खोए अपने करीबी, लंबे समय से फैसले का इंतजार
इस घटना ने कई परिवारों को गहरा सदमा पहुंचाया है। 62 वर्षीय फ्रांसिस वांजे ने इस मामले में अपने परिवार के आठ सदस्यों को खो दिया। मरने वालों में उनके दो नाती-पोते भी शामिल थे।
फैसले से पहले उन्होंने रॉयटर्स से कहा कि इस घटना के कारण उनका परिवार लंबे समय से मानसिक परेशानी से गुजर रहा है। वे अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान मृत बच्चों की कब्रों से जुड़ी तस्वीरें और मामले के अन्य पहलू भी सामने आए। पीड़ित परिवारों के लिए यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है। दोषियों को कितनी सजा मिलेगी, यह 6 नवंबर को स्पष्ट होगा।
2017 से पुलिस की नजर में था मैकेंजी
शाकाहोला जंगल की घटना ने केन्या में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मैकेंजी 2017 से अधिकारियों की नजर में था। उस साल पुलिस ने उसके ठिकाने की तलाशी ली थी।
पुलिस ने 2019 में उसके चर्च को बंद करा दिया था। इसके बाद वह शाकाहोला जंगल में रहने चला गया। इसके बावजूद वह लंबे समय तक अपनी गतिविधियां चलाता रहा।
इस घटना के बाद केन्या में चर्च और अन्य धार्मिक संगठनों की निगरानी सख्त करने की मांग उठी। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, अंधविश्वास, प्रशासनिक जवाबदेही और कमजोर लोगों के शोषण जैसे गंभीर सवाल सामने लाता है।
फिलहाल, पॉल मैकेंजी और उसके साथियों को 191 लोगों की मौत के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है। अब सभी की नजरें 6 नवंबर को होने वाली सजा की घोषणा पर हैं।














