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India Poverty Report 2026: 12 साल में 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए: PM मोदी ने वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट का किया जिक्र, गरीबी दर 27.1% से घटकर 2.6% हुई

उमकांत त्रिपाठी। India Poverty Report 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में गरीबी घटने और रोजगार के अवसर बढ़ने को लेकर वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि साल 2011 से 2023 के बीच भारत में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। इस दौरान अत्यधिक गरीबी की दर में करीब 90% की गिरावट दर्ज की गई। India Poverty Report 2026 को लेकर प्रधानमंत्री ने ये बातें इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहीं।

पीएम मोदी के मुताबिक, पिछले 6 साल में देश में रोजगार के 13.4 करोड़ नए अवसर बढ़े हैं। यह संख्या इसी अवधि में कामकाजी उम्र वाली आबादी में हुई बढ़ोतरी से करीब दोगुनी है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में आर्थिक असमानता कम हुई है और गरीबी खत्म करना सरकार के लिए सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि पक्का संकल्प है।

दरअसल, वर्ल्ड बैंक ने अक्टूबर 2026 में ‘India Poverty and Equity Brief’ नाम से रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत में गरीबी, रोजगार, उपभोग और आर्थिक असमानता से जुड़े आंकड़े पेश किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011 में भारत की अत्यधिक गरीबी की दर 27.1% थी, जो 2023 में घटकर 2.6% रह गई।

पीएम मोदी बोले- गरीबी खत्म करना सरकार के लिए सिर्फ नारा नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, भारत दुनिया में सबसे तेजी से गरीबी कम करने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने गरीबी उन्मूलन को सरकार का पक्का संकल्प बताया।

मोदी ने आर्थिक असमानता का जिक्र करते हुए कहा कि इसे मापने वाले गिनी इंडेक्स में 20% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह घटकर 23.0 पर पहुंच गया है।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का गिनी इंडेक्स 2011-12 में 28.8 था, जो 2023 में घटकर 23.0 रह गया। यह आंकड़ा उपभोग आधारित असमानता को दर्शाता है। हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी बताया कि देश में अमीर और गरीब कामगारों की कमाई के बीच बड़ा अंतर अब भी मौजूद है। 2023 में सबसे ज्यादा कमाने वाले 10% कामगारों की औसत कमाई सबसे कम कमाने वाले 10% कामगारों से करीब 13 गुना थी।

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गरीबी के ये आंकड़े सामने आए

वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में गरीबी को दो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर मापा गया है। इसमें अत्यधिक गरीबी और निम्न-मध्यम आय वाले देशों की गरीबी रेखा के आंकड़े शामिल हैं।

  • अत्यधिक गरीबी: 2011 में भारत की आबादी के 27.1% लोग अत्यधिक गरीबी में थे। 2023 में यह आंकड़ा घटकर 2.6% रह गया।

  • निम्न-मध्यम आय वाली गरीबी: प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम पर जीवनयापन करने वाली आबादी का अनुपात 57.7% से घटकर 16.1% रह गया।

  • गरीबी से बाहर आए लोग: 2011 से 2023 के बीच अनुमानित 49.6 करोड़ लोग 4.20 डॉलर वाली गरीबी रेखा से ऊपर पहुंचे।

  • आर्थिक असमानता: गिनी इंडेक्स 28.8 से घटकर 23.0 हो गया।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि 49.6 करोड़ लोगों का आंकड़ा 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा से जुड़ा है, जबकि 27.1% से 2.6% की गिरावट 3 डॉलर प्रतिदिन वाली अत्यधिक गरीबी रेखा के आधार पर है। दोनों अलग-अलग पैमाने हैं।

गरीबी घटने की 3 बड़ी वजहें: खपत बढ़ी, महिलाओं को रोजगार मिला

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भारत में गरीबी कम होने के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण बताए गए हैं। इनमें लोगों की खपत में बढ़ोतरी, रोजगार के अवसर और सरकारी सहायता प्रमुख हैं।

1. आम लोगों की कमाई और खर्च करने की क्षमता बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में घरेलू खपत में बढ़ोतरी गरीबी कम होने का एक बड़ा कारण रही है। लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गरीबी के स्तर में गिरावट दर्ज की गई।

2. ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले

पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसर बढ़ने से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में भी सुधार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वरोजगार और दूसरे कमाई वाले कामों से जुड़ीं। इससे परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिली।

प्रधानमंत्री मोदी ने भी पिछले 6 साल में 13.4 करोड़ रोजगार के नए अवसर बढ़ने की बात कही है। हालांकि, रोजगार के आंकड़ों के साथ यह देखना भी जरूरी है कि लोगों को किस तरह का काम और कितनी आमदनी मिल रही है।

3. सरकारी योजनाओं से गरीब परिवारों को मदद मिली

वर्ल्ड बैंक ने गरीबी कम होने में सामाजिक सहायता योजनाओं की भूमिका भी बताई है। इसमें सब्सिडी वाला खाद्यान्न और सरकार की ओर से मिलने वाली दूसरी आर्थिक सहायता शामिल है।

मुफ्त राशन और बैंक खातों में सीधे पैसे भेजने जैसी योजनाओं ने गरीब परिवारों की जरूरतों को पूरा करने में मदद की है।

नॉन-मॉनेटरी गरीबी में भी आई बड़ी गिरावट

गरीबी का मतलब सिर्फ कम आमदनी या पैसों की कमी नहीं है। लोगों के पास रहने के लिए पक्का मकान, बिजली, साफ पानी, शौचालय, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, यह भी गरीबी का महत्वपूर्ण पैमाना है। इसे नॉन-मॉनेटरी या बहुआयामी गरीबी कहा जाता है।

भारत में पिछले दो दशकों के दौरान इन बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में सुधार दर्ज किया गया है।

  • रहन-सहन का स्तर सुधरा: पहले की तुलना में ज्यादा परिवारों तक पक्के मकान, बिजली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं पहुंची हैं।

  • 20 साल में बड़ा बदलाव: ऑक्सफोर्ड और UNDP की बहुआयामी गरीबी से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, 2005-06 में भारत की 53.8% आबादी बहुआयामी गरीबी में थी। 2019-21 तक यह घटकर 16.4% रह गई।

  • वर्ल्ड बैंक का आकलन: वर्ल्ड बैंक के अक्टूबर 2026 के आकलन में भी 2022-23 के दौरान बहुआयामी गरीबी का स्तर 15.5% बताया गया है।

    गरीबी कम होने के बावजूद इन राज्यों में बड़ी चुनौती

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में गरीबी घटने के साथ देश के सामने मौजूद चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल गरीबों में से लगभग 57% लोग उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैले क्षेत्र में रहते हैं।

इसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी घटने के बावजूद कुछ राज्यों और क्षेत्रों में आर्थिक पिछड़ापन अब भी बड़ी समस्या है। इन इलाकों में बेहतर रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है।

युवाओं में बेरोजगारी की चुनौती

रिपोर्ट में युवाओं के रोजगार को लेकर भी चिंता जताई गई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, युवाओं में बेरोजगारी की दर 14.6% से बढ़कर 15.9% हो गई है। इसमें ग्रामीण युवा महिलाओं की स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है।

कमाई वाले रोजगार की कमी

रोजगार के अवसर बढ़ने के बावजूद सभी लोगों की आमदनी में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं हुई है। कई लोगों को कम वेतन वाले और अस्थायी कामों में रोजगार मिला है। ऐसे में सिर्फ रोजगार की संख्या बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेहतर वेतन और स्थायी रोजगार भी जरूरी हैं।

2028 तक और कम हो सकती है गरीबी

वर्ल्ड बैंक ने आने वाले वर्षों को लेकर भी अनुमान जारी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 4.20 डॉलर प्रतिदिन वाली गरीबी रेखा के आधार पर भारत में गरीबी की दर 2026 में अनुमानित 14.2% से घटकर 2028 तक 12.1% हो सकती है।

हालांकि, यह अनुमान है और इसमें भविष्य के आर्थिक विकास, रोजगार तथा महंगाई जैसे कारकों का असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत में गरीबी कम होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण रोजगार, युवाओं की बेरोजगारी और क्षेत्रीय असमानता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

क्या कहते हैं गरीबी के ये आंकड़े?

वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट भारत में गरीबी के स्तर में आई बड़ी गिरावट को दर्शाती है। 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोगों का 4.20 डॉलर वाली गरीबी रेखा से ऊपर आना और अत्यधिक गरीबी की दर का 27.1% से घटकर 2.6% होना महत्वपूर्ण बदलाव है।

हालांकि, गरीबी का आकलन करते समय अलग-अलग गरीबी रेखाओं, महंगाई और खरीदने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। रोजगार की गुणवत्ता और आमदनी में अंतर भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में गरीबी कम करने के साथ लोगों को बेहतर रोजगार और स्थायी आमदनी उपलब्ध कराना आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौती होगी।

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