धर्म -अध्यात्म

जानें मां शैलपुत्री की पूजा का विधि-विधान, आज नवरात्रि का प्रथम दिन

आज से चैत्र नवरात्र की शुरूआत हो गई है। इसकी शुरूआत हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ 13 अप्रैल दिन मंगलवार से हो रहा है।

नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना का विधान है। उसके बाद मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरुप की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले ही दिन से व्रत रखा जाता है।

अगर आप भी इस बार नवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं तो आपको मां शैत्रपुत्री की पूरी पूजा विधि के बारे में बता रहे हैं, जिससे आपको व्रत रखने में काफी आसानी होगी।

मां शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। जो पर्वतराज हिमालय की कन्या हैं। पिछले जन्म में यह सती के नाम से जानी जाती थीं और प्रजापति दक्ष की कन्या थीं।

मां शैलपुत्री की पूजा उपरांत व्यक्ति को शांति, उत्साह और निडरता प्राप्त होता है। मां भय का नाश करती हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति को यश, कीर्ति, धन, विद्या और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

प्रतिपदा को कलश स्थापना के उपरांत नवरात्रि की पूजा और व्रत का संकल्प करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें। उनको लाल फुल, सिंदूर, अक्षत, धूप और गंध आदि चढ़ाएं।

फिर सच्चे मन से माता के मंत्रों का उच्चारण करें। दुर्गा चालीसा का पाठ करें। पूजा के अंत में गाय के घी से दीपक या कपूर से आरती करें। माता रानी को जिन फलों और मिठाई का भोग लगाया है, उसे पूजा के बाद प्रसाद स्वरूप लोगों में बांट दें।

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