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देश के आईआईटी, छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने वाले मंदिरों के समान : प्रधान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ऐसे मंदिर हैं जो छात्रों में वैज्ञानिक सोच को विकसित करते हैं तथा मानवता के भविष्य को आकार प्रदान करते हैं ।

शिक्षा मंत्री प्रधान ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास में एक समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही ।

मंत्री ने टीवीएस मोटर कंपनी से सहायता प्राप्‍त और आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित स्वदेशी जीडीआई इंजन और आईआईटी (एम) में इनक्यूबेट की गई किफायती सब्जी गाड़ी का भी उद्घाटन किया। निदेशक, आईआईटी मद्रास, प्रो. वी. कामाकोटी, प्रो. महेश पंचगनुला, प्रो. ए. रमेश, प्रो. अभिजीत देशपांडे और आईआईटी मद्रास के छात्रों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

मंत्री ने प्रदर्शन देखने के लिए 5जी टेस्ट बेड, उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी विकास केंद्र, आईआईटी मद्रास स्थित स्टार्ट-अप अग्निकुल कॉसमॉस की रॉकेट फैक्ट्री, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र और आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल के अलावा अन्य शोध केंद्रों जैसे कि सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर और कैंपस में स्थित प्रथम थ्रीडी-प्रिंटेड हाउस का दौरा किया।

इस अवसर पर प्रधान ने अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में इन पहलों के उद्घाटन और शुभारंभ पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी सिर्फ शैक्षणिक संस्थान ही नहीं हैं, बल्कि वे वैज्ञानिक सोच विकसित करने और मानवता का उज्‍ज्‍वल भविष्य सुनिश्चित करने वाले मंदिर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे समाज को समस्‍त आईआईटी से काफी उम्मीदें हैं। आईआईटी में शिक्षा प्राप्‍त करने वाले हमारे विद्यार्थि‍यों को प्रगति और विकास का पथ प्रदर्शक बनना होगा। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब पूरी दुनिया ब्रेन रिसर्च सेंटर से लाभान्वित होने के लिए आईआईटी मद्रास आएगी। थ्रीडी-प्रिंटिंग तकनीक जैसे नायाब आइडिया निर्माण क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं, विस्थापन के मुद्दों को हल करने में काफी मदद कर सकते हैं और गरीबों को सम्मानजनक जीवन दे सकते हैं।

प्रधान ने कहा कि भारत में समाज को वापस लाभान्वित करने की संस्कृति है और भारत समाज की बेहतरी के लिए अभिनव उपाय करता रहता है। आईआईटी मद्रास की तकनीकी क्षमता की बदौलत भारत वर्ष 2023 के आखिर तक स्वदेशी 5G को चालू कर देगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आईआईटी के टैलेंट पूल से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ जाता है। हमारे छात्रों को अपने अंदर की उत्‍कृष्‍ट क्षमता को फिर से जगाने की जरूरत है, अपनी ‘चेतना’ को फिर से जगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारे छात्रों को कुछ बड़ा सोचना होगा, सामाजिक बदलाव लाना होगा और नौकरी तलाशने वालों के बजाय नौकरी देने वाला बनना होगा।

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हम सभी से ‘पंच प्राण’ अपनाने की अपील की है। भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में आईआईटी मद्रास जैसे संस्थानों की अहम भूमिका है। अगले 25 साल हम सभी के लिए अत्‍यंत महत्वपूर्ण हैं। ‘अमृत काल’ में प्रवेश करते समय हम एक ऐसे देश को पछाड़ कर उससे आगे निकल गए, जिसने हमें उपनिवेश बना लिया था। भारत अभूतपूर्व गति से विकास कर रहा है। उन्होंने कहा कि काफी तेजी से विकसित हो रहे भारत की घरेलू जरूरतें अत्‍यंत बड़ी होंगी जिन्‍हें हमारे समस्‍त आईआईटी को पूरा करना होगा।

मंत्री ने आईआईटी मद्रास से उद्यमिता, आम जनता की भलाई के लिए पेटेंट दाखिल करने और सबसे गरीब लोगों के जीवनयापन को आसान बनाने में छात्रों द्वारा हासिल विशिष्‍ट उपलब्धियों पर एक विशेष दिन मनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

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