उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के दौरान राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। Amit Shah Punjab Visit के दौरान उन्होंने मानसा में परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात की और मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का भरोसा दिया। इसके बाद लुधियाना पहुंचे अमित शाह ने नशे के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे का कारोबार बेलगाम हो चुका है और राज्य सरकार इसे रोकने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।
लुधियाना के दरेसी मैदान में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में गृह मंत्री ने 121 फीट ऊंचे रावण का दहन भी किया। इस दौरान उन्होंने पंजाब से नशे को खत्म करने का संकल्प दोहराया और कहा कि 31 दिसंबर 2029 तक राज्य से नशे को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया जाएगा।
परविंदर सिंह झोटा मामले में CBI जांच का भरोसा
अमित शाह अपने पंजाब दौरे के दौरान मानसा में परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मिलने पहुंचे। परिवार के साथ करीब 20 मिनट तक बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराने का भरोसा दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि बुधवार दोपहर 12 बजे तक CBI की टीम मानसा पहुंचकर जांच शुरू कर सकती है।
इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले की जांच CBI को सौंपने की जानकारी दी थी। अमित शाह ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि दोषियों को कानून के सामने लाया जाएगा, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।
गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री से अन्य दो मामलों की जांच भी CBI को सौंपने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन मामलों में भी निष्पक्ष जांच के जरिए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की जरूरत है।
लुधियाना में अमित शाह ने 121 फीट के रावण का किया दहन
मानसा के बाद अमित शाह लुधियाना पहुंचे, जहां दरेसी मैदान में दशहरा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यहां उन्होंने राज्य के सबसे ऊंचे बताए जा रहे 121 फीट के रावण का दहन किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए।
गृह मंत्री के दौरे को देखते हुए संबंधित जिलों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मानसा में सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने 20 अक्टूबर को ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया था।
अमित शाह का यह दौरा ऐसे समय हुआ, जब पंजाब में नशे की समस्या और आपराधिक घटनाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। गृह मंत्री ने अपने भाषण में नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
पंजाब सरकार पर नशे के मुद्दे पर तीखा हमला
लुधियाना में जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने भगवंत मान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे का कारोबार रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
अमित शाह ने कहा कि पंजाब में कई परिवारों ने नशे की वजह से अपने परिजनों को खोया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में हालात चिंताजनक हैं और सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब सरकार चुनाव के दौरान तीन महीने में नशा खत्म करने का वादा करके सत्ता में आई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित परिणाम नहीं दिखे हैं। गृह मंत्री ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय ठोस कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र के बंदरगाहों पर पकड़ी गई बड़ी मात्रा में ड्रग्स का जिक्र करते हुए भी राज्य सरकार के सवालों का जवाब दिया। उनका कहना था कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए तस्करी के पूरे तंत्र और उसे मिलने वाले कथित संरक्षण की जांच होनी चाहिए।
PIT-NDPS कानून के तहत पंजाब में एक भी मामला दर्ज नहीं होने का दावा
अमित शाह ने अपने भाषण में PIT-NDPS कानून का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में देशभर में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज किए गए, जबकि पंजाब में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
गृह मंत्री के मुताबिक, यह कानून नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के दूसरे हिस्सों में इस कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो पंजाब में इसका उपयोग क्यों नहीं किया गया।
इस बयान के जरिए अमित शाह ने राज्य सरकार की नशा विरोधी नीति पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके इस दावे और आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से की जानी जरूरी है।
31 दिसंबर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने का संकल्प
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार नशे के खिलाफ लड़ाई को गंभीरता से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने दावा किया कि देशभर में इस विषय पर राज्यों के साथ 48 बैठकें की गई हैं और पंजाब सरकार की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का संकल्प लिया है और नशामुक्त भारत इस दिशा में महत्वपूर्ण लक्ष्य है। गृह मंत्री ने दोहराया कि 31 दिसंबर 2029 तक पंजाब से नशे को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
अमित शाह ने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान में सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एकजुट होना चाहिए। उनके मुताबिक, नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि इससे परिवारों और युवाओं का भविष्य भी प्रभावित होता है।
गुरदासपुर से मानसा तक परिवारों से मुलाकात
पंजाब दौरे के दौरान अमित शाह गुरदासपुर, संगरूर और मानसा पहुंचे। गुरदासपुर में उन्होंने विक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात कर दुख साझा किया। इसके बाद संगरूर और मानसा में भी उनका कार्यक्रम रहा।
मानसा में परविंदर सिंह झोटा के परिवार से मुलाकात और CBI जांच का भरोसा इस दौरे का प्रमुख घटनाक्रम रहा। वहीं, लुधियाना में दशहरा कार्यक्रम के दौरान नशे के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरकर उन्होंने पंजाब की राजनीति में एक नया सियासी संदेश देने की कोशिश की।
कुल मिलाकर, अमित शाह के पंजाब दौरे में CBI जांच, नशे के खिलाफ कार्रवाई और राज्य सरकार की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे रहे। अब सबकी नजर CBI जांच की औपचारिक प्रक्रिया और पंजाब में नशे के खिलाफ उठाए जाने वाले अगले कदमों पर रहेगी।














