PM Modi Dussehra Speech: उमाकांत त्रिपाठी।दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में विजयादशमी के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रावण दहन किया और देशवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में PM Modi Dussehra Speech के दौरान उन्होंने देश की एकता, मान-सम्मान और संस्कृति की रक्षा का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने ऐसी तीन चुनौतियों का जिक्र किया, जिनका मुकाबला करने के लिए देशवासियों को एकजुट रहने की जरूरत बताई।
पीएम मोदी ने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। यह पर्व भगवान राम के आदर्शों को याद करने और उनके बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने राम राज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए ऐसे शासन की बात की, जहां हर व्यक्ति को न्याय मिले, किसी के साथ भेदभाव न हो और सभी को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।
पीएम मोदी ने बताए देश के तीन दुश्मन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज में फूट डालने वाले लोग और भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली सोच ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना मिलकर करना जरूरी है।
पीएम मोदी के मुताबिक, देश की एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। विजयादशमी का पर्व भी यही संदेश देता है कि बुराई के खिलाफ खड़े होने और सही रास्ते पर चलने के लिए साहस, दृढ़ संकल्प और एकजुटता जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब देश के लोग एकजुट होकर आगे बढ़ते हैं, तो बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। देश की अखंडता और आपसी विश्वास बनाए रखना भी इसी सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
राम राज्य में सभी को मिले न्याय और समान अवसर
पीएम मोदी ने भगवान राम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए राम राज्य की अवधारणा को समझाया। उन्होंने कहा कि राम राज्य का मतलब ऐसी व्यवस्था है, जहां शासन का उद्देश्य जनता का कल्याण हो और हर व्यक्ति को न्याय मिले।
राम राज्य की कल्पना में भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने का अवसर देने और लोगों के हितों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया जाता है।
प्रधानमंत्री के संबोधन में गरीबों और वंचितों की सेवा का विषय भी प्रमुख रहा। उन्होंने ऐसी व्यवस्था की अहमियत बताई, जिसमें जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ने के लिए मदद मिले और विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।
आत्मनिर्भर भारत के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए देश के सामर्थ्य और संसाधनों पर भरोसा करने की जरूरत बताई। उन्होंने मेहनत, जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बताया।
पीएम मोदी के संदेश के मुताबिक, जब देशवासी किसी साझा लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करते हैं, तो मुश्किलों का सामना करना आसान हो जाता है। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी और देश की क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने विजयादशमी के संदेश को देश की प्रगति से जोड़ते हुए सही सोच, साहस और एकता की अहमियत रेखांकित की। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी भी जरूरी है।
विजयादशमी का पर्व देता है बुराई पर जीत का संदेश
विजयादशमी का त्योहार भगवान राम की रावण पर विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर रावण दहन बुराई के अंत और अच्छाई की जीत का संदेश देता है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इसी परंपरा को देश की मौजूदा चुनौतियों से जोड़ते हुए एकता, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण पर जोर दिया। उनका संदेश था कि देश को मजबूत बनाने के लिए नागरिकों को साझा उद्देश्यों के साथ आगे बढ़ना होगा।
दशहरे का पर्व लोगों को अन्याय और बुराई के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री के संबोधन में भी राष्ट्रीय एकता, समान अवसर, गरीबों की सेवा और आत्मनिर्भरता जैसे विषय प्रमुख रहे।














