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छत्तीसगढ़ स्थापना की 25वीं वर्षगांठ में शामिल होंगे पीएम मोदी, 5 दिनों तक चलेगा राज्योत्सव, जानें पूरी डिटेल

उमाकांत त्रिपाठी। साल 2025 में छत्तीसगढ़ अपनी 25वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. जिसकी तैयारियां अभी से शुरु हो चुकी हैं.जानकारी के मुताबिक इस बार छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का कार्यक्रम 5 दिनों का होगा.जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी आने की संभावना है.ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री जब छत्तीसगढ़ की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर प्रदेश में आएंगे तो विकास से जुड़ी बड़ी सौगात देंगे.

बस्तर पर सरकार का फोकस : आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में अभी सबसे ज्यादा चर्चा बस्तर के विकास की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन नवम्बर में होना है.लिहाजा इससे पहले 120 दिनों के अंदर बस्तर की तस्वीर पहले से और भी ज्यादा अच्छी करनी है. वहीं पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद नक्सली खात्मे की डेडलाइन यानी 31 मार्च 2026 को भी 120 दिन बाकी रह जाएंगे.सरकार की कोशिश है कि इस डेडलाइन को आखिरी समय से पहले ही पूरा करके एक बड़ा संदेश पूरे भारत को दिया जाए.

नए विधानसभा भवन का उद्घाटन संभव : माना ये भी जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद नई रणनीति भी तैयार की जाएगी. क्योंकि नवम्बर आने के बाद 4 महीने के अंदर बीजेपी के छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे सबसे बड़े नक्सल अभियान के समापन का भी समय होगा.वहीं नवा रायपुर में नए विधानसभा का उद्घाटन भी होना है.जिसमें इस बार शीतकालीन सत्र का आयोजन निर्धारित किया गया है. इसकी भी तैयारी अब अंतिम चरणों में है.इसलिए ये भी संभव है कि नए विधानसभा भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ही हाथों हो.

1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आया छत्तीसगढ़ : आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ पूरे विश्व में धान का कटोरा नाम से विख्यात है. 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ प्रदेश के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. जिसे मध्यप्रदेश से विभाजित करके अलग राज्य का दर्जा दिया गया.छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग साल 1924 से हुई थी. लेकिन इस सपने को पूरा होने में 75 साल से भी अधिक का समय लग गया.

जानिए- क्यों हुई छत्तीसगढ़ की स्थापना : छत्तीसगढ़ को एक अलग राज्य बनाने की मांग यहां की संस्कृति,रीति रिवाज और भाषा के कारण हुई.साथ ही साथ इस राज्य के आर्थिक संसाधन और आदिवासी क्षेत्रों की मांग मध्यप्रदेश से बिल्कुल अलग थी. इस राज्य में छत्तीसगढ़ बोलने वाले लोग अधिक संख्या में थे. जिसके कारण ये जरुरी हो गया कि यहां भाषा और संस्कृति को अलग पहचान मिले. 1990 के दशक में मध्यप्रदेश से अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने की मांग ने जोर पकड़ा.

 

आंदोलन में शामिल शख्स ने बताई दास्तां : छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन में शामिल जागेश्वर प्रसाद ने ईटीवी भारत को बताया कि सही मायने में छत्तीसगढ़ राज्य के मूल उद्देश्य को लेकर 16 मई 1965 से छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी (छसपा) की स्थापना हुई. उसी दिन से प्रथम छत्तीसगढ़ी अधिवेशन रायपुर के आरडी तिवारी स्कूल में आयोजित किया गया था. वहां छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का शंखनाद किया गया. जिसके बाद साल 1965 से लेकर जब तक छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बना तब तक लगातार आंदोलन जारी रहा.

छत्तीसगढ़ी समाज ने 16 जनवरी 1967 को सर्वप्रथम राष्ट्रपति को मांग पत्र प्रेषित किया. जिसमें 5 हजार से ज्यादा लोगों ने हस्ताक्षर किया था. यह प्रस्ताव रायपुर के ईदगाहभाटा में आयोजित आम सभा में पास किया गया. सभा की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ी समाज के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय रामानंद शुक्ला ने की थी.

साल 1971 में छत्तीसगढ़ी को संवैधानिक रूप से मातृभाषा का दर्जा देने की मांग रखकर आंदोलन किए गए. बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के काउंटरों पर कब्जा कर छत्तीसगढ़ी भाषा में अनाउंसमेंट करवाया गया. साथ ही 1971 में जनगणना कार्य में मात्र भाषा कॉलम पर छत्तीसगढ़ी भाषा लिखवाने का भी काम किया गया था.

2 दिसंबर 1978 को छसपा (छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी) के संस्थापक और तत्कालीन अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र दुबे, 15 प्रतिनिधि मंडल सहित तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ राज्य की अनिवार्यता और गठन के संबंध में विस्तार पूर्वक चर्चा की गई.

छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को लेकर किए गए आंदोलन
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए 21 नवंबर 1978 को दिल्ली रैली करने जा रहे हजारों कार्यकर्ताओं को झांसी में रोक दिया गया. छत्तीसगढ़ी समाज के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली जाने वाली सभी ट्रेनों को कई घंटे तक रोके रखा. जिसकी वजह से सैकड़ों लोग ट्रेन में फंसे रह गए. फिर रेलवे प्रशासन ने सभी की वापसी के लिए स्पेशल ट्रेन की व्यवस्था की. उस समय भोपाल में उतरकर रैली के जरिए कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा.

इसी तरह साल 1984, 1988, में विशाल रैली प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया.

10 मई 1989 को छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण एवं धारा 170 (ख) के मुद्दे को लेकर विधानसभा में पर्चा फेंका गया था. जिससे 3 लोगों को विधानसभा उठते तक सजा हुई थी.

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