खबर इंडिया की। सोनपुर की एक लड़की… जो मेहनत करके अपनी पहचान बनाना चाहती थी। नाम है रोजी नेहा सिंह। रोजी कोई सेलिब्रिटी नहीं, कोई मॉडल नहीं, वो बस एक लड़की है…जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी।

मेकअप आर्टिस्ट के तौर पर 10 साल काम किया। सैलरी समय पर नहीं मिली। नौकरी छोड़ी…और रांची की सड़कों पर एक छोटी सी चिकन-लिट्टी की दुकान खोल ली। लेकिन असली जंग यहीं से शुरू हुई। लोग खाने नहीं आते थे… लोग उसे देखने आते थे। कहते थे— “इतनी गोरी कैसे हो?” “रशियन है क्या?” “6000 में चलेगी?” “BMW है मेरे पास, लॉन्ग ड्राइव पर चलो।”

ये सब बातें… खुली सड़क पर, भीड़ में, दिन-दहाड़े। सोशल मीडिया पर वीडियो डाला, दुकान चली… लेकिन मुसीबत और बढ़ गई।

70% लोग खाने नहीं, उसे घूरने आते थे। इंस्टाग्राम पर ऑफर आने लगे— 300 में, 6000 में… धमकियां मिलने लगीं। रात को घर लौटते वक्त पीछा किया जाने लगा।

वो बिजनेस करना चाहती थी… ‘धंधा’ नहीं। अपने गहने बेचकर दुकान खोली थी। 6-7 किलो चिकन रोज बिकता था। मुनाफा हो रहा था। लेकिन मानसिक यातना ने उसे दुकान बंद करने पर मजबूर कर दिया। आज रोजी टूटी नहीं है। वो फिर से शुरुआत करना चाहती है। इस बार सुरक्षित जगह पर। स्टाफ और सुरक्षा के साथ।

ये कहानी सिर्फ रोजी की नहीं… ये हर उस लड़की की कहानी है जो कुछ करना चाहती है, लेकिन समाज पहले उसे नज़र से तौलता है, नीयत से नहीं।













