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पालतू कुत्ते के लिए खरीदी थी गाय, आज 90 लाख सालाना टर्नओवर, इस इंजीनियर ने डेयरी बिजनेस खड़ा कर रचा इतिहास

उमाकांत त्रिपाठी |Engineer Ravi Bharti Dairy Business आज झारखंड के पलामू जिले में सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। कहा जाता है कि अगर सोच नई हो और मेहनत सच्ची हो, तो छोटी शुरुआत भी बड़ी उपलब्धि में बदल सकती है। इस कहावत को सच साबित किया है पलामू जिले के सदर प्रखंड के जोरकट गांव निवासी रवि भारती ने। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में जुटे रवि ने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय अवसर तलाशा और आज एक सफल डेयरी उद्यमी बनकर सामने आए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि उनके डेयरी व्यवसाय की शुरुआत किसी बड़े निवेश या बिजनेस प्लान से नहीं, बल्कि उनके पालतू कुत्ते की जरूरत से हुई थी। आज उनका कारोबार सालाना 80 से 90 लाख रुपये तक पहुंच चुका है और इसके माध्यम से करीब 20 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

कुत्ते के लिए खरीदी गाय, यहीं से बदली किस्मत

रवि भारती ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने आरजीपीवी विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। डिग्री हासिल करने के बाद वे नौकरी की तलाश कर रहे थे, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें अपने गांव लौटना पड़ा।

घर लौटने के बाद उन्होंने एक स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उनके पास ‘सैम’ नाम का एक पालतू कुत्ता था, जो बाजार का दूध पीने से परहेज करता था। उसकी जरूरत को पूरा करने के लिए रवि ने 18 हजार रुपये में एक गाय खरीद ली।

संयोग से वह गाय प्रतिदिन 17 से 18 लीटर दूध देने लगी। घर की जरूरत पूरी करने के बाद बचा हुआ दूध उन्होंने आसपास के लोगों को बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे दूध की मांग बढ़ती गई और उन्हें महसूस हुआ कि इस क्षेत्र में बड़ा अवसर मौजूद है।

चार गायों से शुरू हुआ विस्तार, बना बड़ा डेयरी नेटवर्क

दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए रवि ने एक-एक करके चार और गायें खरीदीं। इसके बाद उन्होंने डेयरी व्यवसाय को संगठित रूप देने का निर्णय लिया। उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में दूध उपलब्ध है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण और बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था सीमित है।

इसी सोच के साथ उन्होंने ‘श्री अर्पण’ नाम से अपना डेयरी उद्यम शुरू किया। वर्तमान में वे लेस्लीगंज, रेड़मा, मेदिनीनगर और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों से दूध संग्रह करते हैं। किसानों से दूध लेने के बाद उसे आधुनिक चिलिंग और पैकेजिंग प्रक्रिया के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है।रवि का यह मॉडल न केवल उनके लिए बल्कि आसपास के डेयरी किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। किसानों को उनके दूध का उचित मूल्य मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर डेयरी उद्योग को नई पहचान मिल रही है।

गुणवत्ता पर विशेष ध्यान, हर बूंद दूध की जांच

रवि भारती का मानना है कि डेयरी व्यवसाय में ग्राहकों का भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होता है। इसी कारण वे गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते।

उनके डेयरी केंद्र पर आने वाले प्रत्येक दूध के सैंपल की पहले जांच की जाती है। इसके बाद केमिकल टेस्टिंग और मिल्क एनालाइजर की मदद से दूध की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाता है। दूध में स्टार्च, डिटर्जेंट, यूरिया, फार्मलिन और सोडा जैसी मिलावटों की भी जांच की जाती है।

सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही दूध को बल्क मिल्क कूलर में रखा जाता है। इसके बाद चिलिंग प्रक्रिया पूरी होने पर ताजा दूध बाजार में भेजा जाता है। यही वजह है कि उनके उत्पादों पर ग्राहकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

700 लीटर प्रतिदिन कारोबार, 20 लोगों को मिला रोजगार

आज रवि भारती का डेयरी व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है। वे प्रतिदिन 700 लीटर से अधिक दूध का कारोबार कर रहे हैं। उनके पास 2500 लीटर क्षमता वाला आधुनिक बल्क मिल्क कूलर भी मौजूद है, जिससे दूध की गुणवत्ता और ताजगी बनाए रखने में मदद मिलती है।

वर्तमान में उनका मासिक कारोबार 7 से 8 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। सालाना टर्नओवर 80 से 90 लाख रुपये के बीच है। इतना ही नहीं, उनके इस उद्यम से करीब 20 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिला है।

ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने में उनका यह मॉडल एक सफल उदाहरण बन चुका है।

अब पाश्चराइज्ड दूध बाजार में उतारने की तैयारी

रवि भारती भविष्य को लेकर भी बड़े लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। उनका अगला उद्देश्य दूध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करना है, ताकि ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाला पाश्चराइज्ड दूध उपलब्ध कराया जा सके।

वे बताते हैं कि उनकी प्राथमिकता हमेशा ताजा दूध उपलब्ध कराना है। सुबह संग्रहित दूध को उसी दिन बाजार तक पहुंचाया जाता है। कई दिनों तक स्टोर किए गए दूध को बेचने की उनकी कोई योजना नहीं है।

वर्तमान में वे 60 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध बेच रहे हैं। इसके अलावा 1450 रुपये प्रति किलो की दर से देसी घी और 450 रुपये प्रति किलो की दर से पनीर भी उपलब्ध करा रहे हैं।

प्रेरणा बनी एक छोटी शुरुआत

रवि भारती की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सफलता के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। एक पालतू कुत्ते की जरूरत को पूरा करने के लिए खरीदी गई गाय ने आज उन्हें एक सफल उद्यमी बना दिया है। उनकी मेहनत, दूरदर्शिता और गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें पलामू जिले के सफल डेयरी उद्यमियों की सूची में शामिल कर दिया है।उनकी यह यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा है कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए तो गांव में रहकर भी बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है।

 

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