Flat Buying Documents: खबर इंडिया की।भारत में अपना घर खरीदना ज्यादातर लोगों का सबसे बड़ा सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए लोग सालों तक बचत करते हैं, होम लोन लेते हैं और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा फ्लैट खरीदने में लगा देते हैं। लेकिन कई बार जल्दबाजी में लोग सिर्फ लोकेशन, कीमत, सुविधाओं और सोसायटी देखकर फ्लैट बुक कर लेते हैं। वे जरूरी कानूनी दस्तावेजों की जांच करना भूल जाते हैं। यही गलती भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
Flat Buying Documents की सही तरीके से जांच करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि किसी प्रॉपर्टी का अच्छा दिखना या बिल्डर का भरोसा दिलाना उसके कानूनी रूप से सुरक्षित होने की गारंटी नहीं है। दस्तावेजों में गड़बड़ी होने पर खरीदार को कब्जा मिलने में देरी, बैंक लोन में परेशानी, मालिकाना हक को लेकर विवाद या निवेश की रकम फंसने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए अगर आप भी नया या रीसेल फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बुकिंग या एग्रीमेंट करने से पहले इन 10 जरूरी दस्तावेजों की जांच जरूर करें।
1. टाइटल डीड और मालिकाना हक के दस्तावेज जरूर देखें
फ्लैट खरीदने से पहले सबसे जरूरी काम यह पता करना है कि जिस जमीन पर बिल्डिंग बनी है, उसका कानूनी मालिक कौन है। इसके लिए टाइटल डीड यानी मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की जांच करें।
अगर बिल्डर जमीन का मालिक नहीं है, तो यह पता करें कि उसे जमीन पर निर्माण करने और फ्लैट बेचने का कानूनी अधिकार मिला है या नहीं। जमीन के पुराने मालिकों से लेकर वर्तमान मालिक तक की रजिस्ट्री और दस्तावेजों की कड़ी भी जांचनी चाहिए।
अगर आप किसी व्यक्ति से रीसेल फ्लैट खरीद रहे हैं, तो उसकी मौजूदा रजिस्ट्री जरूर देखें। यह भी सुनिश्चित करें कि फ्लैट बेचने वाला व्यक्ति वास्तव में उसका कानूनी मालिक है। जरूरत पड़ने पर प्रॉपर्टी वकील से टाइटल सर्च कराएं।
2. एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC) की जांच करें
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट यानी EC एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इससे पता लगाने में मदद मिलती है कि प्रॉपर्टी पर कोई रजिस्टर्ड कर्ज, गिरवी या वित्तीय बोझ तो नहीं है।
अगर किसी जमीन या फ्लैट पर बैंक का लोन है या उसे किसी वित्तीय लेनदेन के लिए गिरवी रखा गया है, तो संबंधित जानकारी EC में दिखाई दे सकती है।
इसे संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। दस्तावेज की जांच करते समय प्रॉपर्टी के पिछले लेनदेन का रिकॉर्ड भी देखें।
ध्यान रखें कि EC में हर तरह का कानूनी विवाद या दावा दर्ज होना जरूरी नहीं है। इसलिए सिर्फ इस सर्टिफिकेट के आधार पर प्रॉपर्टी को पूरी तरह विवादमुक्त नहीं मानना चाहिए।
3. RERA रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जरूर चेक करें
अगर आप निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीद रहे हैं, तो उसका RERA रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर जांचें। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) का उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाना है।
संबंधित राज्य की RERA वेबसाइट पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर डालें। वहां आपको प्रोजेक्ट की मंजूरी, निर्माण की स्थिति, प्रस्तावित कब्जे की तारीख और बिल्डर के खिलाफ दर्ज शिकायतों जैसी जानकारियां मिल सकती हैं।
अगर आप उत्तर प्रदेश में फ्लैट खरीद रहे हैं, तो UPRERA पोर्टल पर जानकारी देख सकते हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली और दूसरे राज्यों के अपने RERA पोर्टल हैं।
बुकिंग से पहले यह भी देखें कि बिल्डर ने जिस टावर या फ्लैट को बेचने का प्रस्ताव दिया है, वह संबंधित RERA रजिस्ट्रेशन में शामिल है या नहीं।
4. स्वीकृत नक्शा और लेआउट प्लान देखें
बिल्डर से प्रोजेक्ट का अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान और लेआउट प्लान जरूर मांगें। ये दस्तावेज संबंधित विकास प्राधिकरण या सक्षम सरकारी विभाग से मंजूर होने चाहिए।
इनमें यह जानकारी होती है कि प्रोजेक्ट में कितने टावर बनेंगे, कितनी मंजिलें होंगी, कितने फ्लैट होंगे और पार्किंग, गार्डन, लिफ्ट जैसी सुविधाओं के लिए कितनी जगह निर्धारित है।
मौके पर बनी इमारत और मंजूर नक्शे में अंतर होने पर भविष्य में कानूनी परेशानी हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर बिल्डर ने मंजूरी से ज्यादा मंजिलें बना दी हैं या कॉमन एरिया का इस्तेमाल बदल दिया है, तो खरीदारों को परेशानी हो सकती है।
इसलिए केवल मॉडल फ्लैट या ब्रोशर देखकर फैसला न करें। वास्तविक निर्माण की तुलना मंजूर नक्शे से भी करें।
5. कमेंसमेंट सर्टिफिकेट और जरूरी NOC की जांच करें
निर्माणाधीन फ्लैट खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि बिल्डर को निर्माण शुरू करने की अनुमति मिली है या नहीं। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण से जारी कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (Commencement Certificate) की जांच करें।
इसके अलावा प्रोजेक्ट के आकार और स्थान के अनुसार अग्निशमन विभाग, पर्यावरण विभाग और अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों से जरूरी मंजूरियां या NOC भी लेनी पड़ सकती हैं।
बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी से जुड़ी मंजूरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। अगर प्रोजेक्ट के लिए जरूरी अनुमति नहीं मिली है, तो निर्माण या कब्जे के समय समस्या आ सकती है।
इसलिए बिल्डर से सभी लागू मंजूरियों की कॉपी मांगें और संबंधित विभाग से उनकी वैधता की पुष्टि करें।
6. बिल्डर-बायर एग्रीमेंट ध्यान से पढ़ें
फ्लैट खरीदने के दौरान बिल्डर-बायर एग्रीमेंट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक होता है। इसमें खरीदार और बिल्डर के बीच होने वाली शर्तों का विवरण दर्ज होता है।
इसमें फ्लैट का कारपेट एरिया, कुल कीमत, भुगतान का तरीका, अतिरिक्त चार्ज, कब्जे की तारीख और देरी होने पर मुआवजे जैसी शर्तें शामिल हो सकती हैं।
एग्रीमेंट में यह भी देखें कि अगर खरीदार बुकिंग रद्द करता है, तो कितनी रकम वापस मिलेगी और किन परिस्थितियों में कटौती की जा सकती है।
बिल्डर के मौखिक वादों पर भरोसा करने के बजाय सभी जरूरी सुविधाओं और शर्तों को लिखित समझौते में शामिल कराएं। एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करने से पहले किसी प्रॉपर्टी वकील से इसकी समीक्षा कराना बेहतर रहेगा।
7. कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) देखें
अगर आप तैयार फ्लैट खरीद रहे हैं, तो कब्जा लेने से पहले कंप्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की जांच जरूर करें।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) संबंधित प्राधिकरण की ओर से जारी किया जाता है। यह बताता है कि निर्माण निर्धारित मंजूरी और स्वीकृत योजना के अनुसार पूरा हुआ है।
वहीं ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) इमारत के इस्तेमाल और उसमें रहने की अनुमति से जुड़ा दस्तावेज है। इससे यह पुष्टि करने में मदद मिलती है कि संबंधित प्राधिकरण ने भवन को रहने या इस्तेमाल करने के लिए मंजूरी दी है।
सिर्फ बिल्डर के यह कहने पर कब्जा न लें कि प्रोजेक्ट पूरी तरह तैयार है। यह भी देखें कि OC और CC संबंधित टावर और आपके फ्लैट पर लागू होते हैं या नहीं।
8. प्रॉपर्टी टैक्स और दूसरे बकाये की रसीदें जांचें
रीसेल फ्लैट खरीदते समय प्रॉपर्टी टैक्स और दूसरे बकाया भुगतानों की जांच करना जरूरी है। कई बार पुराने मालिक पर नगर निगम का टैक्स, बिजली बिल, पानी का बिल या सोसायटी मेंटेनेंस का पैसा बकाया होता है।
अगर खरीदार बिना जांच किए फ्लैट खरीद लेता है, तो भविष्य में इन बकायों को लेकर विवाद हो सकता है।
इसलिए नगर निगम की टैक्स रसीदें, बिजली और पानी के बिल तथा हाउसिंग सोसायटी का नो-ड्यूज सर्टिफिकेट जरूर मांगें।
निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में बिल्डर से भी प्रॉपर्टी से जुड़े टैक्स और दूसरे भुगतान की स्थिति स्पष्ट कराएं।
9. बैंक NOC और लोन क्लोजर दस्तावेज लें
अगर फ्लैट या उस जमीन पर पहले से बैंक का लोन चल रहा है, तो इसकी जानकारी लेना बेहद जरूरी है। कई बार बिल्डर या मौजूदा मालिक प्रॉपर्टी पर लोन होने की जानकारी खरीदार को स्पष्ट रूप से नहीं देते।
ऐसी स्थिति में संबंधित बैंक से NOC यानी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मांगें। अगर लोन पहले ही चुकाया जा चुका है, तो लोन क्लोजर लेटर और बकाया खत्म होने का प्रमाण भी देखें।
यह सुनिश्चित करें कि प्रॉपर्टी पर बैंक का कोई दावा, गिरवी या बकाया चार्ज बाकी न हो। जरूरत पड़ने पर संबंधित रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड में बैंक का चार्ज हटाए जाने की पुष्टि भी कराएं।
10. सेलर की पहचान, पावर ऑफ अटॉर्नी और सोसायटी के दस्तावेज देखें
फ्लैट बेचने वाले व्यक्ति की पहचान की जांच करना भी जरूरी है। उसके आधार, पैन और दूसरे पहचान दस्तावेजों में दर्ज नाम का संपत्ति की रजिस्ट्री से मिलान करें।
अगर कोई व्यक्ति पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) के आधार पर फ्लैट बेच रहा है, तो यह जरूर जांचें कि पावर ऑफ अटॉर्नी वैध है या नहीं और उसमें संपत्ति बेचने का अधिकार दिया गया है या नहीं। केवल POA के आधार पर मालिकाना हक अपने नाम होने की धारणा न बनाएं।
रीसेल फ्लैट के मामले में हाउसिंग सोसायटी का शेयर सर्टिफिकेट, ट्रांसफर से जुड़े नियम और सोसायटी की जरूरी मंजूरियां भी देखें।
इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि फ्लैट के ट्रांसफर में कोई कानूनी या प्रशासनिक बाधा तो नहीं है।
फ्लैट खरीदने से पहले इन बातों का भी रखें ध्यान
फ्लैट खरीदने का फैसला करने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच एक साथ करना बेहतर रहता है। किसी एक सर्टिफिकेट या बिल्डर के भरोसे पूरी प्रॉपर्टी को सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
खासकर बड़ी रकम का भुगतान करने या रजिस्ट्री कराने से पहले स्वतंत्र प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेजों की जांच कराएं। जरूरत पड़ने पर संबंधित सरकारी विभाग, RERA कार्यालय और सब-रजिस्ट्रार से जानकारी की पुष्टि करें।
याद रखें, घर खरीदना सिर्फ चार दीवारें खरीदना नहीं है, बल्कि अपनी जिंदगीभर की कमाई को एक बड़ी संपत्ति में निवेश करना है। इसलिए थोड़ी सी सावधानी आपको भविष्य के बड़े कानूनी और आर्थिक नुकसान से बचा सकती है। बुकिंग से पहले दस्तावेज जांचें, शर्तें समझें और पूरी संतुष्टि के बाद ही फ्लैट खरीदने का फैसला करें।















