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देश की इकोनॉमी करेगी बूस्ट: अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने की ये बड़ी भविष्यवाणी, होगा ये फायदा

उमाकांत त्रिपाठी।भारत की इकोनॉमी को लेकर अमेरिका से गुड न्यूज आई है. ये गुड न्यूज रेटिंग एजेंसी फिच की ओर से दी गई है. फिच ने भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान में 0.2 फीसदी का इजाफा किया है. वहीं भरोसा जताया है कि भारत में खर्च में सुधार और निवेश में इजाफा देखने को मिल सकता है. वहीं वित्त वर्ष 2026 और 2027 में भी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ 6 फीसदी से ऊपर रह सकती है. इससे पहले आरबीआई की मॉरेटरी पॉलिसी ने भी भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर अनुमान बताया था. जिसमें देश की इकोनॉमी 7.2 फीसदी रह सकती है. ये अनुमान देश की इकोनॉमिक ग्रोथ के उस आंकड़े से कम है, जो बीते वित्त वर्ष में देखने को मिले थे.

फिच ने जारी किया अनुमान
फिच रेटिंग्स ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है. मार्च में उसने इसके 7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था. रेटिंग एजेंसी ने उपभोक्ता खर्च में सुधार और निवेश में वृद्धि का हवाला देते हुए अनुमान में संशोधन किया. वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए फिच ने क्रमशः 6.5 प्रतिशत और 6.2 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है. फिच ने अपनी ग्लोबल इकोनॉमिक सिनेरियो रिपोर्ट में कहा कि हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि होगी.

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि निवेश में वृद्धि जारी रहेगी, लेकिन हाल की तिमाहियों की तुलना में यह वृद्धि धीमी रहेगी, जबकि उपभोक्ता विश्वास बढ़ने के साथ उपभोक्ता खर्च में सुधार होगा. क्रय प्रबंधकों के सर्वेक्षण के आंकड़े चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में निरंतर वृद्धि की ओर इशारा करते हैं. इसने कहा कि आने वाले मानसून के मौसम के सामान्य रहने के संकेत वृद्धि को बढ़ावा देंगे और मुद्रास्फीति को कम अस्थिर बनाएंगे. हालांकि हाल ही में भीषण गर्मी ने जोखिम उत्पन्न किया है. गत वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय अर्थव्यवस्था 8.2 प्रतिशत बढ़ी थी.

आरबीआई ने जताया था अनुमान
फिच का अनुमान आरबीआई के अनुमान के अनुरूप है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस महीने की शुरुआत में अनुमान लगाया था कि ग्रामीण मांग में सुधार और मुद्रास्फीति में नरमी से चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. खास बात तो ये है कि आरबीआई का ये अनुमान बीते वित्त वर्ष जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ें से कम था. वहीं दूसरी ओर आरबीआई ने लगातार 8वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव ना करने कर ऐलान किया था. आरबीआई ने कहा था कि अभी महंगाई से जंग जारी है. वैसे लगातार तीन महीनों से भारत की रिटेल महंगाई 5 फीसदी से नीचे बनी हुई है.

 

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