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OPRETION SINDOOR:‘सिंदूर’का हिसाब हुआ पूरा पिक्चर अभी बाकी है, पाकिस्तान की एक गलती लिखेगी उसकी तबाही-पीएम मोदी ;

उमाकांत त्रिपाठी।भारतीय सेना के पराक्रम के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम भी चर्चा है. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इस मिशन का नाम ऑपरेशन सिंदूर रखा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नाम का सुझाव पीएम मोदी ने सेना को दिया था. ऑपरेशन सिंदूर का पैगाम साफ है कि आतंकियों ने अगर फिर किसी हिंंदुस्तानी का सुहाग मिटाया तो वो दुनिया से मिटा दिया जाएगा. भारतीय सेना ने साफ कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी ओवर नहीं हुआ है. इसका मतलब साफ है अगर पाकिस्तान ने कोई गलती को तो उसकी तबाही तय है.

पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को डर था कि भारत इसका बदला जरूर लेगा. भारत ने बदला लिया भी लेकिन सिर्फ पहलगाम का नहीं. बल्कि बीते 25 सालों के हर उस जख्म का जिसे पाकिस्तान और उसके पाले आतंकियों ने भारत को दिया था.बीती रात भारत ने जिस भी ठिकाने को टारगेट किया, उसके पीछे आतंक की एक लंबी कहानी थी. जिसे सालों से पाकिस्तानी हुक्मरान और सेना के जनरल लिख रहे थे लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने इस कहानी का आखिरी अध्याय लिख दिया.

लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा आतंकी कैंप तबाह
भारत के टारगेट पर मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का बड़ा आतंकी कैंप रकज तैयबा था. ये इंटरनेशनल बॉर्डर से 18 से 25 KM दूर है. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने यहां एक के बाद एक 4 मिसाइलें दागी. इस आतंकी कैंप की तबाही भारत के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रहा है, जिसकी वजह 2008 में हुए 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का इस कैंप का कनेक्शन है. दरअसल 26/11 मुंबई में हमलों में शामिल आतंकियों की ट्रेनिंग यही पर हुई थी. इसमें कसाब और हेडली भी शामिल था. ये लश्कर का सबसे कुख्यात टैरर कैंप था. यहां आतंकवाद की ट्रेनिंग दी जाती थी. दावा है कि हाफिज के सबसे खतरनाक आतंकी यही तैयार होते थे लेकिन अब भारत ने इस मिट्टी में मिला दिया है.इसके बाद अगला टारगेट था LoC से 30 KM दूर कोटली में गुलपुर कैंप. ये लश्कर-ए-तैयबा का बेस कैंप था. ऑपरेशन सिंदूर में इस बेस कैंप को भी नष्ट कर दिया गया.

 

रियासी आतंकी हमले का लिया बदला
इस कैंप को नष्ट करने के लिए भारत ने ड्रोन का इस्तेमाल किया. दावा है कि इस हमले में कैंप में मौजूद ज्यादातर आतंकी मारे गए. इस हमले के साथ भारत ने उस जख्म का बदले लिया जो पाकिस्तान ने कश्मीर में करीब 1 साल पहले दिया था. 20 जून 2024 को लश्कर आतंकियो ने रियासी में श्रद्धालुओं से भरी बस पर हमला किया था, जिसमें 9 लोग मारे गए थे.हमले में शामिल आतंकियों की ट्रेनिंग इसी कैंप में हुई थी. 20 अप्रैल 2023 को पूंछ में हुए हमले में शामिल आतंकी को भी यहीं पर प्रशिक्षण दिया गया था. इसके बाद अगला टारगेट था इंटरनेशनल बॉर्डर से 18 KM दूर सियालकोट में महमूना जाया कैंप. ये हिज्बुल मुजाहिद्दीन का टेरर कैंप था.

 

सलाहुद्दीन की आतंकी फैक्ट्री पर सबसे बड़ा प्रहार
ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैयद सलाहुद्दीन की आतंकी फैक्ट्री पर सबसे बड़ा प्रहार है. भारतीय सेना ने यहां करीब 2 ड्रोन दागे. ये ड्रोन सीधा हिजबुल मुजाहिद्दीन के टेरर कैंप से टकराए और कैंप का नामोनिशान मिट गया. इस कैंप पर हमले के जरिए भारत ने पठानकोट एयरफोर्स बेस पर हुए हमले का बदला लिया, जिसे 2 जनवरी 2016 को आतंकियों ने अंजाम दिया था.

एयरफोर्स बेस पर हुए हमले की योजना इसी टेरर कैंप में बनी थी. इसके अलावा कठुआ में आतंक फैलाने का प्रमुख केंद्र भी यही टेरर कैंप था. अगला टारगेट था PoK में LoC से 30 KM दूर मुजफ्फराबाद में सवाई नाला कैंप. ऑपरेशन सिंदूर में सवाई नाला कैंप प्राइमरी टारगेट्स में से एक था क्योंकि ये वहीं कैंप है जहां पहलगाम आतंकी हमले का प्लान बना और इस हमले में शामिल आतंकियों को ट्रेनिंग दी गई. सवाई नाला कैंप में सेना ने पिन प्वाइंट टारगेटेड अटैक किया और पूरे के पूरे कैंप को उड़ा डाला.

जैश का टेरर कैंप हुआ नष्ट
इसी कैंप में 20 अक्टूबर 2024 को हुए में सोनमर्ग हमले और 24 अक्टूबर 2024 को हुए गुलमर्ग हमले में शामिल आतंकियों की ट्रेनिंग भी हुई थी. ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हिंदुस्तान के वायुवीरों ने उन 4 कैंपों को भी नष्ट कर दिया, जिसमें भारत को दहलाने के लिए कई और आतंकियों को ट्रेन्ड किया गया था. इसमें मुजफ्फराबाद में मौजूद सैयदना बिलाल कैंप शामिल है. जहां जैश का टेरर कैंप था. भिंबर में मौजूद बरनाला कैंप को भी तबाह कर दिया. ये कैंप लश्कर के जुड़ा था.

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