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PM Modi Chinmaya Amrit Mahotsav: पीएम मोदी ने की स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बात, कहा- खुशनसीब हूं, फिर दर्शन का सौभाग्य मिला

PM Modi Chinmaya Amrit Mahotsav। उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने आधुनिक तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम से संवाद किया। स्वामी चिन्मयानंद का निधन 3 अगस्त 1993 को हुआ था। कार्यक्रम में उनके साथ फरवरी 1993 में हुई मुलाकात को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें दोबारा गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला।


प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, युवाओं की भूमिका और 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब चिन्मय मिशन भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा। उनके मुताबिक, विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।

1. होलोग्राम के जरिए स्वामी चिन्मयानंद से किया संवाद

कार्यक्रम का सबसे खास पल तब आया, जब प्रधानमंत्री मोदी ने तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के होलोग्राम से बातचीत की। इस दौरान स्वामीजी के होलोग्राम ने फरवरी 1993 में हुई पहली मुलाकात का जिक्र किया।

होलोग्राम के जरिए स्वामीजी ने कहा कि प्रधानमंत्री उनसे पहली बार फरवरी 1993 में मिले थे। उस समय मोदी उन्हें अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद के शताब्दी कार्यक्रम में आमंत्रित करने पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब दिया कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें एक बार फिर गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला। उन्होंने अपने संबोधन में 1993 की उस मुलाकात को भी याद किया और कहा कि स्वामीजी के निधन के समय वह सैन डिएगो में मौजूद थे।

क्या है होलोग्राम तकनीक?

होलोग्राम एक ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति या वस्तु की त्रिआयामी यानी 3D जैसी छवि प्रस्तुत की जा सकती है। इसे देखने पर व्यक्ति या वस्तु अलग-अलग कोणों से मौजूद होने का आभास दे सकती है।

इस तकनीक का इस्तेमाल कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और विशेष आयोजनों में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की छवि प्रस्तुत करने के लिए भी किया जाता है। चिन्मय अमृत महोत्सव में इसका इस्तेमाल स्वामी चिन्मयानंद की स्मृति को विशेष रूप से सामने लाने के लिए किया गया।

2. पीएम मोदी बोले- विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जब आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश को विकसित भारत बनाने का लक्ष्य भी महत्वपूर्ण पड़ाव पर होगा। इसी समय के आसपास चिन्मय मिशन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत और चिन्मय मिशन का रास्ता एक है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि मिशन से जुड़े लोग देश के विकास में अपनी भूमिका निभाएंगे।

मोदी ने कहा कि बीते दशकों में समय बदला है और देश के सामने नई चुनौतियां आई हैं। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए देश को जागरूक करने और 2047 के विकसित भारत के संकल्प से लोगों को जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री का संदेश केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक विचारों और सामाजिक जिम्मेदारी को भी देश के भविष्य से जोड़कर देखा।

3. ‘देश अब ऋषियों और राष्ट्रभक्तों की राह पर आगे बढ़ रहा’

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सांस्कृतिक पुनर्जागरण देखने को मिल रहा है।

मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर, उज्जैन के महाकाल धाम और केदारनाथ-बद्रीनाथ जैसे धार्मिक स्थलों का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने विदेशों में पहुंचाई गई भारतीय मूर्तियों की वापसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में भारत करीब 600 ऐसी मूर्तियां वापस लाया है।

उन्होंने कहा कि देश अब उस रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, जिसका सपना ऋषियों और राष्ट्रभक्तों ने देखा था।

भारतीय पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी का मुद्दा लंबे समय से देश की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण से जुड़ा रहा है। ऐसी वस्तुओं की वापसी से उनके संरक्षण, अध्ययन और भारतीय इतिहास से जुड़े संदर्भों को समझने में मदद मिलती है।

4. वेदों का संदेश- राष्ट्र को महान बनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में वेदों का उल्लेख करते हुए राष्ट्र के हित और उसके विकास से जुड़े विचारों पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन का अमृत महोत्सव भारत के अमृत काल से जुड़ रहा है। उनके मुताबिक, देश के विकास के लिए सामूहिक प्रयास और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने वेदों के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र का हित चाहने वाले लोगों को राष्ट्र को महान बनाने के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने गीता के ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया था। प्रधानमंत्री के मुताबिक, आज अनेक युवा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

5. नई शिक्षा नीति में संस्कृति और तकनीक दोनों पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति के साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीक को भी महत्व दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य नई पीढ़ी को आधुनिक ज्ञान देने के साथ भारतीय परंपराओं और मूल्यों से परिचित कराना भी है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा, बहुविषयक अध्ययन, कौशल विकास और तकनीकी ज्ञान को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान शामिल हैं।

प्रधानमंत्री के संबोधन में यह विचार प्रमुख रहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

चिन्मय मिशन के शैक्षणिक संस्थान भी बच्चों और युवाओं तक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कारों और आध्यात्मिक विचारों को पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

6. चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने पर तीन दिवसीय आयोजन

चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन का उद्देश्य भगवद्गीता, उपनिषद और वेदांत की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है।

मिशन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के अलग-अलग हिस्सों में सालभर कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव का कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक चलना निर्धारित है।

मिशन की गतिविधियों में आध्यात्मिक अध्ययन, सत्संग, बच्चों और युवाओं के कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थान तथा सामाजिक सेवा से जुड़ी पहल शामिल हैं।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने मिशन के योगदान को याद करते हुए युवाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

7. स्वामी चिन्मयानंद की विरासत और युवाओं की भूमिका

स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने भगवद्गीता और वेदांत की शिक्षाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। उनके विचारों का प्रभाव आध्यात्मिक अध्ययन, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के क्षेत्र में देखने को मिलता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वामीजी के जीवन और विचारों को याद करते हुए उनके गुरु से मिले संदेश ‘गो, रोर लाइक अ लॉयन’ यानी ‘जाओ, शेर की तरह दहाड़ो’ का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरणा लेकर देश के युवाओं को आत्मनिर्भरता, नवाचार और राष्ट्रीय विकास में योगदान देना चाहिए।

चिन्मय अमृत महोत्सव का संदेश भारतीय आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और आधुनिक भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को मजबूत करने से जुड़ा रहा।

निष्कर्ष: भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तकनीक के जरिए स्वामी चिन्मयानंद की स्मृति को जीवंत करने के साथ भारतीय संस्कृति, शिक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 2047 के भारत के निर्माण में युवाओं, शिक्षा संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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