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NEET UG Re-Exam 2026: NEET परीक्षा की वजह से PM मोदी ने 45 मिनट एयरपोर्ट पर किया इंतजार, वजह जान चौंक जाएंगे आप

उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली: PM Modi NEET Students से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। NEET-UG री-एग्जाम 2026 के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कदम उठाया, जिसकी सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में व्यापक चर्चा हो रही है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने दिल्ली एयरपोर्ट से अपने आवास के लिए रवाना होने में देरी की ताकि परीक्षा देने जा रहे लाखों छात्रों को ट्रैफिक जाम या सुरक्षा व्यवस्था के कारण किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के री-एग्जाम में 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। ऐसे में राजधानी दिल्ली सहित कई शहरों में परीक्षा केंद्रों की ओर जाने वाले छात्रों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा के समय में बदलाव किया।

छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता देने का फैसला

जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार दोपहर करीब 1:15 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे थे। आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले की आवाजाही के दौरान सुरक्षा कारणों से कई मार्गों पर ट्रैफिक प्रबंधन और अस्थायी प्रतिबंध लगाए जाते हैं।

हालांकि उस समय हजारों छात्र और उनके अभिभावक परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे थे। चूंकि NEET-UG री-एग्जाम दोपहर 2 बजे शुरू होना था, इसलिए प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट से तुरंत रवाना होने के बजाय कुछ समय वहीं रुकने का निर्णय लिया।

अधिकारियों के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा देने जा रहे छात्रों को किसी भी प्रकार की देरी या असुविधा का सामना न करना पड़े। परीक्षा शुरू होने के बाद ही प्रधानमंत्री अपने आवास के लिए रवाना हुए।

यह कदम छात्रों और अभिभावकों के हितों को प्राथमिकता देने के रूप में देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर कई प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

NEET-UG री-एग्जाम में शामिल हुए 22 लाख से अधिक छात्र

इस वर्ष NEET-UG परीक्षा कई विवादों और कथित अनियमितताओं के कारण चर्चा में रही। पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद संबंधित प्राधिकरणों ने री-एग्जाम आयोजित करने का फैसला लिया।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में देशभर के 5,440 परीक्षा केंद्रों और विदेशों के 14 केंद्रों पर 22 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। यह भारत की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।

मेडिकल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल कोर्सों में प्रवेश के लिए NEET परीक्षा अनिवार्य है। ऐसे में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाने के लिए विशेष तैयारी की गई।

परीक्षा के लिए बनाए गए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम

NEET-UG री-एग्जाम को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत बनाया गया। NTA और संबंधित एजेंसियों ने परीक्षा केंद्रों पर तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की।

अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार:

1.38 लाख से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए।
95,000 से ज्यादा परीक्षा कक्षों की निगरानी की गई।
51,000 से अधिक सिग्नल जैमर लगाए गए।
6,700 से ज्यादा ऑब्जर्वर नियुक्त किए गए।
100 से अधिक वर्चुअल मॉनिटर तैनात किए गए।
लगभग 39,000 फ्रिस्किंग स्टाफ की नियुक्ति हुई।
48,000 से अधिक बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मी लगाए गए।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य परीक्षा में किसी भी प्रकार की नकल, तकनीकी हस्तक्षेप या अनियमितता को रोकना था। सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को भी विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।

परीक्षा केंद्रों पर सख्त नियम लागू

री-एग्जाम के दौरान कई परीक्षा केंद्रों पर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए गए। उम्मीदवारों को निर्धारित समय से पहले केंद्र पर पहुंचने के निर्देश दिए गए थे।

कई स्थानों पर देर से पहुंचने वाले छात्रों को प्रवेश नहीं मिल पाया, जिसके वीडियो और तस्वीरें सोशल media पर वायरल हुईं। कुछ केंद्रों पर ‘नो-धागा जोन’ जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की गईं ताकि सुरक्षा जांच पूरी तरह प्रभावी रहे।

अभिभावकों से भी परीक्षा केंद्रों के आसपास भीड़ न लगाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई थी।

शिक्षा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना प्रधानमंत्री का कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी रवानगी में देरी करने का निर्णय शिक्षा जगत और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह निर्णय प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है।

हालांकि इस फैसले को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, लेकिन छात्रों की सुविधा सुनिश्चित करने के प्रयास को व्यापक रूप से सकारात्मक नजरिए से देखा जा रहा है।

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