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PM Modi on Naxalism: देश में नक्सलवाद आखिरी सांसें गिन रहा है… पीएम मोदी का बड़ा बयान, कहा- आज संविधान हाथ में हिलाते हैं

उमाकांत त्रिपाठी। नई दिल्ली: PM Modi on Naxalism को लेकर दिया गया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ताजा बयान राजनीतिक और सुरक्षा मामलों की चर्चा के केंद्र में आ गया है। सोमवार को एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में दशकों से चली आ रही माओवादी-नक्सली हिंसा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और नक्सलवाद “आखिरी सांसें गिन रहा है”। उन्होंने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज संविधान की प्रति हाथ में लेकर घूमते हैं, वे उस समय मौन थे जब देश नक्सली हिंसा के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था।


प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले 12 वर्षों की केंद्र सरकार की नीतियों, विकास योजनाओं और सुरक्षा अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि “नेशन फर्स्ट” की सोच ने देश के कई जटिल मुद्दों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नक्सलवाद पर प्रधानमंत्री का बड़ा बयान

कार्यक्रम में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक नक्सली हिंसा का सामना किया है। कई दशकों तक यह समस्या देश के अनेक राज्यों में सुरक्षा और विकास दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनी रही।

उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पिछड़ा क्षेत्र मानकर छोड़ दिया था, लेकिन उनकी सरकार ने उन इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों के विस्तार ने इन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी क्षेत्र के लोगों को विकास, शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई देती है, तो हिंसा और भटकाव की विचारधारा कमजोर पड़ने लगती है। यही कारण है कि आज नक्सलवाद का प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष हमला भी बोला। उन्होंने बिना किसी नेता का नाम लिए कहा कि आज कुछ लोग संविधान को हाथ में लेकर राजनीतिक संदेश देने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब नक्सली हिंसा चरम पर थी, तब उनकी आवाज सुनाई नहीं देती थी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह बयान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर संकेत माना जा रहा है। राहुल गांधी को कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और चुनावी सभाओं में संविधान की प्रति हाथ में लिए देखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा केवल भाषणों से नहीं होती, बल्कि देश की सुरक्षा, विकास और जनता के विश्वास को मजबूत करने से होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ काम करते हुए नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती का मुकाबला किया है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि सरकार ने केवल सुरक्षा अभियानों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि विकास को भी प्राथमिकता दी।

उन्होंने बताया कि जिन जिलों को पहले पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था, उन्हें “आकांक्षी जिला” और “आकांक्षी ब्लॉक” के रूप में विकसित करने का अभियान शुरू किया गया। इस योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल कनेक्टिविटी, सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।

प्रधानमंत्री के अनुसार, 100 से अधिक जिलों और 500 से ज्यादा ब्लॉकों को विकास की नई दिशा देने का प्रयास किया गया। इससे लाखों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और विकास का नया माहौल तैयार हुआ।

‘नेशन फर्स्ट’ सरकार का मूल मंत्र

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में “नेशन फर्स्ट” यानी “राष्ट्र प्रथम” को सरकार का मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लिए गए हर बड़े फैसले के केंद्र में यही सोच रही है।

उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत करना भी था।

उन्होंने हाल ही में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि विश्व के नेताओं ने भी महसूस किया है कि भारत अब आत्मविश्वास के साथ “नेशन फर्स्ट” के सिद्धांत पर आगे बढ़ रहा है।

टैक्स राहत और स्वास्थ्य सुविधाओं का जिक्र

प्रधानमंत्री ने मध्यम वर्ग को मिली कर राहत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहां पहले कम आय पर भी टैक्स देना पड़ता था, वहीं अब 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को कर राहत का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने जीएसटी सुधारों और डिजिटल कर प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे कर प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हुई है। इसके साथ ही जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएं उपलब्ध कराकर करोड़ों रुपये की बचत सुनिश्चित की गई है।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि जन औषधि योजना के कारण लोगों को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है।

मेट्रो, रेलवे और एयरपोर्ट नेटवर्क का विस्तार

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के बुनियादी ढांचे में हुए विस्तार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।

उन्होंने वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने का काम कर रही हैं। साथ ही, पिछले वर्षों में एयरपोर्ट की संख्या भी दोगुनी हुई है, जिससे हवाई संपर्क मजबूत हुआ है।

अमित शाह ने भी दिया था नक्सलवाद पर बड़ा बयान

इससे पहले इसी वर्ष 30 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का लक्ष्य लगभग हासिल किया जा चुका है। उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में उल्लेखनीय सफलता मिली है और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद देश को इसकी औपचारिक जानकारी दी जाएगी।

अमित शाह ने यह भी कहा था कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

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