PM Modi Shares Madhavi Madhukar Jha Song:उमाकांत त्रिपाठी। बिहार के भागलपुर जिले के सबौर की बेटी और झारखंड के गोड्डा की बहू माधवी मधुकर झा की भक्ति संगीत साधना को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि पर मां कात्यायनी को नमन करते हुए उनकी आवाज में गाए गए आदि शंकराचार्य रचित प्रसिद्ध ‘भवान्यष्टकम’ स्तोत्र का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। प्रधानमंत्री की इस पोस्ट के बाद माधवी के परिवार और उनके प्रशंसकों में खुशी का माहौल है।
पीएम मोदी ने मां कात्यायनी को नमन कर साझा किया वीडियो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवरात्र की षष्ठी पर मां कात्यायनी के श्रीचरणों में नमन करते हुए देशवासियों के जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा के संचार की कामना की। इस शुभकामना संदेश के साथ उन्होंने यूट्यूब पर उपलब्ध ‘भवान्यष्टकम’ स्तोत्र का वीडियो लिंक साझा किया।
इस वीडियो में माधवी मधुकर झा की आवाज सुनाई देती है। हालांकि, प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट में गायिका का नाम सीधे तौर पर नहीं लिखा गया, लेकिन वीडियो के थंबनेल और क्रेडिट में उनका नाम और तस्वीर दिखाई देती है। इस तरह उनकी संस्कृत भक्ति संगीत प्रस्तुति को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिला।
‘जीवन का सबसे बड़ा तोहफा और सम्मान’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी प्रस्तुति साझा किए जाने पर माधवी मधुकर झा ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने उनकी आवाज सुनी और उसे देशवासियों के साथ साझा किया। उनके मुताबिक, यह उनके जीवन और संगीत साधना के लिए सबसे बड़ा तोहफा और सम्मान है।
माधवी ने इस उपलब्धि को माता रानी की कृपा बताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य संस्कृत के समृद्ध आध्यात्मिक साहित्य और प्राचीन श्लोकों को आज की युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है। वह चाहती हैं कि युवा भी सरल और मधुर संगीत के माध्यम से संस्कृत के स्तोत्रों से जुड़ें और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को समझें।
500 से अधिक स्तोत्रों को दे चुकी हैं अपनी आवाज
माधवी मधुकर झा पिछले एक दशक से अधिक समय से संस्कृत भक्ति संगीत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने दुर्गा सप्तशती और आदि शंकराचार्य द्वारा रचित कई स्तोत्रों को अपनी आवाज दी है। जटिल संस्कृत श्लोकों को मधुर संगीत में प्रस्तुत करना उनकी साधना का अहम हिस्सा है।
अब तक वह 500 से अधिक स्तोत्रों को स्वर दे चुकी हैं। संस्कृत के प्राचीन साहित्य को संगीत के जरिए आम लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने ‘मधुरम वृंद’ नाम से संस्कृत संगीत बैंड भी स्थापित किया है। इसके माध्यम से संस्कृत के श्लोकों और भक्ति रचनाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हर महीने करीब 2 करोड़ श्रोता
माधवी मधुकर झा की प्रस्तुतियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी संख्या में लोग सुनते हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके भक्ति गीतों को हर महीने करीब दो करोड़ श्रोता मिलते हैं। उनकी प्रस्तुतियां अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े उत्सवों, काशी विश्वनाथ धाम और मिथिलांचल के प्रमुख सांस्कृतिक मंचों पर भी हो चुकी हैं।
इसके अलावा, वह विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस समारोहों सहित कई सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति दे चुकी हैं। संस्कृत भक्ति संगीत के प्रति उनकी रुचि और लगातार प्रयासों ने उन्हें इस क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
सबौर से दिल्ली तक का सफर
माधवी मधुकर झा का मायका बिहार के भागलपुर जिले के सबौर में है। वह यूको बैंक के एक सेवानिवृत्त अधिकारी की बेटी हैं। उनका विवाह झारखंड के गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड स्थित डांडै गांव के निवासी पीयूष झा से हुआ है।
वर्तमान में माधवी अपने परिवार के साथ दिल्ली में रहकर संगीत साधना को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक भारतीय संगीत और संस्कृत साहित्य को आधुनिक माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उनकी प्रस्तुति साझा किया जाना माधवी मधुकर झा के लिए व्यक्तिगत सम्मान के साथ-साथ संस्कृत भक्ति संगीत को व्यापक पहचान दिलाने का अवसर भी है। उनकी साधना का केंद्र प्राचीन स्तोत्रों को मधुर स्वर में प्रस्तुत करना और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।















