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त्रिनिदाद और टोबैगो के लिए रवाना हुए पीएम मोदी, इसी देश में रहती है 40% भारतीय मूल की आबादी, यहां ऐसे बढ़ी हमारी जनसंख्या

उमाकांत त्रिपाठी।प्रधानमंत्री मोदी 2 जुलाई से पांच देशों की यात्रा पर हैं। घाना के बाद वे आज त्रिनिदाद और टोबैगो रवाना हो गए हैं, जहां वे 3 और 4 जुलाई को रुकेंगे। खास बात यह है कि 1999 के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यह त्रिनिदाद और टोबैगो की पहली यात्रा है।

प्रधानमंत्री मोदी को त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने न्योता दिया था। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में प्रधानमंत्री कमला के साथ-साथ राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कांगालू से भी मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि दोनों ही शीर्ष नेता भारतीय मूल की हैं।

इस ऐतिहासिक यात्रा का मकसद भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है। PM मोदी की यह यात्रा एक और मायने में बेहद खास है।
दरअसल, इस साल त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भारतीय मजदूरों के पहली बार पहुंचने की 180वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस देश की करीब 40% आबादी भारतीय मूल की है, जिनके पूर्वज 19वीं सदी में वहां काम की तलाश में गए थे।

जानिए- पीएम मोदी के त्रिनिदाद एंड टोबैगो दौरे का शेड्यूल-

3 जुलाई
त्रिनिदाद एंड टोबैगो की संसद के जॉइंट सेशन को संबोधित करेंगे।

भारतीय डायस्पोरा के साथ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।

राष्ट्रपति कांगालू पीएम मोदी के लिए स्टेट डिनर का आयोजन करेंगी।

4 जुलाई
PM मोदी कई मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

रक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, UPI तकनीक, कृषि और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी, कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे।

देर शाम मोदी अर्जेंटीना के लिए रवाना होंगे।
कोलंबस ने त्रिनिदाद की खोज की, ईसाई धर्म से जुड़ा नाम रखा भारत से त्रिनिदाद की दूरी करीब 13,822 किलोमीटर है। यह कैरिबियाई देश कहलाता है। कैरीबियाई देश का मतलब उन देशों से होता है जो कैरिबियन सागर के आस-पास या उसके द्वीपों पर बसे हुए हैं। कैरीबियाई देशों को सामूहिक रूप से ‘वेस्ट इंडीज’ भी कहा जाता है।क्रिस्टोफर कोलंबस ने 1498 में अपने तीसरे समुद्री सफर के दौरान त्रिनिदाद की खोज की थी। कोलंबस ने ही इस द्वीप का नाम त्रिनिदाद रखा, जिसका मतलब ‘त्रिमूर्ति’ होता है। उन्होंने यह नाम ईसाई धर्म के प्रतीक चिन्ह ‘ट्रिनिटी’ पर रखा था।

 

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