दुनियान्यूज़भारतराजनीतिहेडलाइंस

मालदीव ने पीएम मोदी को क्यों बनाया गेस्ट ऑफ ऑनर, भारत की डिप्लोमेसी की हुई जीत, जानें कैसे सुधरे रिश्ते.?

उमाकांत त्रिपाठी।सिर्फ दो साल पहले मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू की सत्ता में एंट्री ने भारत की हिंद महासागर रणनीति को बड़ा झटका दिया था. उनके ‘इंडिया आउट’ कैंपेन ने साफ संकेत दिया था कि मालदीव भारत से दूरी बनाना चाहता है. भारत विरोधी पोस्टर, बयानों और सोशल मीडिया मुहिम ने माहौल गरमा दिया था. उस वक्त कई एक्सपर्ट्स ने कहा था कि- भारत ने मालदीव को खो दिया. कुछ ने इसे चीन की जीत बताया, तो कुछ ने भारत की विदेश नीति की विफलता. मगर उस तूफान के बीच भारत ने कुछ नहीं कहा. बस चुपचाप देखता रहा.

 

शांति से खेला गया गेम
पीएम मोदी ने मुइज्जू को जीत की बधाई दी. कोई धमकी नहीं, कोई कटौती नहीं. धीरे-धीरे, नई सरकार को दिखाया गया कि भारत दुश्मन नहीं, भरोसेमंद साथी है. आर्थिक मदद, इन्फ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट और डिफेंस ट्रेनिंग जारी रही. भारत ने मालदीव को 400 मिलियन डॉलर की आपात सहायता दी. फेरी सर्विस से लेकर डिफेंस कोऑपरेशन तक, भारत का सपोर्ट बिना रुके जारी रहा.

 

अब मोदी ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’
24 जुलाई को पीएम मोदी मालदीव की आजादी की 60वीं वर्षगांठ पर मुख्य अतिथि होंगे. ये वही देश है जिसने ‘इंडिया आउट’ का नारा बुलंद किया था. अब उसी देश में मोदी का रेड कार्पेट वेलकम होगा. ये भारत की ‘साइलेंट डिप्लोमेसी’ की सबसे बड़ी जीत है.

श्रीलंका में भी दोहराई वही रणनीति
मालदीव ही नहीं, श्रीलंका में भी. राष्ट्रपति अनुरा कुमार के आने पर भारत-विरोध की आशंका थी. लेकिन भारत ने वहां भी जल्द और बिना शर्त मदद दी. मोदी पहले विदेशी नेता बने जिन्हें नए राष्ट्रपति ने बुलाया. उन्हें श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी दिया गया.

नतीजा: स्थिर और मजबूत रिश्ते
मोदी की विदेश नीति का असली हथियार है- ‘संयम’. न कोई भावुक प्रतिक्रिया, न बदले की कार्रवाई. सिर्फ भरोसा, सहयोग और वक्त पर मदद. नतीजा ये है कि भारत अब उन देशों का ‘पहला कॉल’ बन गया है, जो संकट में होते हैं.
‘इंडिया आउट’ सिर्फ नारे थे. भारत ने जवाब दिया. काम से, मदद से, भरोसे से. आज वही देश भारत को अपना सबसे खास दोस्त मान रहे हैं. यही है PM मोदी की साइलेंट लेकिन असरदार डिप्लोमेसी.

Related Posts

1 of 816

Leave A Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *