SBI Mutual Fund: खबर इंडिया की।बैंक FD और म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले इनके जोखिम और टैक्स नियमों को समझना जरूरी है। बैंक FD में तय ब्याज दर के आधार पर रिटर्न मिलता है, जबकि डेट म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार की स्थितियों के अनुसार बदल सकता है। इनमें ब्याज दर, क्रेडिट और लिक्विडिटी से जुड़े जोखिम भी होते हैं। इसलिए डेट म्यूचुअल फंड को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता।
टैक्स के मामले में भी दोनों निवेश विकल्पों के नियम अलग हैं। FD से मिलने वाला ब्याज आमतौर पर निवेशक की लागू आयकर दर के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है। वहीं, म्यूचुअल फंड पर टैक्स उसके प्रकार, खरीद की तारीख और लागू आयकर नियमों पर निर्भर करता है। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी गई अधिकांश डेट-उन्मुख म्यूचुअल फंड यूनिट्स पर धारा 50AA के तहत लागू नियमों के अनुसार लाभ पर निवेशक की लागू टैक्स दर से कर लग सकता है। ऐसे निवेश पर सामान्य तौर पर इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलता।
इसलिए केवल संभावित रिटर्न या टैक्स बचत के आधार पर निवेश का फैसला न लें। निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, निवेश की अवधि, जोखिम उठाने की क्षमता और संबंधित स्कीम के दस्तावेजों की जांच जरूर करें।















