खबर इंडिया की। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में कथित तौर पर फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों से ठगी करने के मामले में गिरफ्तार Trupti Singh Rajput Case में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े कुछ नए वीडियो सामने आए हैं, जिनमें वह अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर में नजर आ रही है। एक वीडियो में तृप्ति लाल साड़ी पहने दिखाई देती है और उसकी सहेली उसे ‘सीनियर’ बताती है। वहीं तृप्ति खुद को प्रोबेशनर बताते हुए मजाक करती नजर आती है।
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इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस की जांच का दायरा भी बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट का इस्तेमाल लोगों के बीच सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव बनाने के लिए किया जाता था। तृप्ति पर चंदेरी में चार युवकों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। इसके अलावा भोपाल के बागसेवनिया थाने में भी 39.17 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की FIR दर्ज है।
विधानसभा परिसर का VIDEO सामने आने से बढ़ी हलचल
**Trupti Singh Rajput Case** में सामने आए नए वीडियो में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर के बाहर दिखाई देती है। वीडियो में उसकी एक सहेली बताती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं और उन्होंने सोचा कि इस दौरान अपना पहला ब्लॉग बनाया जाए।

सहेली यह भी कहती है कि विधानसभा के अंदर फोटो और वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है, इसलिए वे बाहर ही वीडियो शूट कर रही हैं। इसके बाद वीडियो में तीनों के बीच बातचीत और हंसी-मजाक होता दिखाई देता है।
एक अन्य हिस्से में तृप्ति कहती है कि उनकी हरकतों को देखकर कोई उन्हें अधिकारी नहीं समझेगा। वह मजाकिया अंदाज में खुद को प्रोबेशनर बताती है और कहती है कि वे थोड़े ‘बेवकूफ’ हैं।
इसके बाद उसकी एक सहेली तृप्ति को अपनी सीनियर बताती है। तृप्ति भी बातचीत में खुद को सीनियर बताते हुए कहती है कि वह उनके साथ दोस्त की तरह रहती है। अब पुलिस इन दोनों सहेलियों से भी पूछताछ कर सकती है और यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि वे तृप्ति के बारे में क्या जानती थीं।
लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए VIDEO बनाने का आरोप
नए वीडियो सामने आने के बाद **Trupti Singh Rajput Case** में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या तृप्ति सोशल मीडिया और सार्वजनिक जगहों पर अपनी मौजूदगी का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए करती थी।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि तृप्ति ने खुद को कथित तौर पर IAS अधिकारी और अन्य बड़े सरकारी पदों पर तैनात अधिकारी बताने की कहानी कब से तैयार की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि उसने किन लोगों के सामने अपने कथित सरकारी संपर्कों का इस्तेमाल किया।
अगर जांच में यह बात सामने आती है कि सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सरकारी संस्थानों से जुड़ी तस्वीरों का इस्तेमाल लोगों को प्रभावित करने के लिए किया गया था, तो यह पूरे मामले की जांच में महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली किसी गतिविधि से अपने आप कोई अपराध साबित नहीं होता। पुलिस को आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र दस्तावेजी, डिजिटल और अन्य साक्ष्य जुटाने होंगे।
खुद को IAS और MPT की अधिकारी बताने का आरोप
**Trupti Singh Rajput Case** की जांच में पुलिस के सामने आरोप है कि तृप्ति अलग-अलग मौकों पर खुद को IAS अधिकारी, ट्रेनी IAS और मध्य प्रदेश पर्यटन (MPT) की एडिशनल डायरेक्टर जैसे पदों पर तैनात अधिकारी बताती थी।

आरोप है कि इस पहचान के जरिए वह लोगों पर प्रभाव डालती थी और उन्हें सरकारी नौकरी या सरकारी संपत्ति से जुड़े काम कराने का भरोसा देती थी।
चंदेरी में दर्ज मामले के अनुसार, तृप्ति पर चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुल 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान पुलिस ने उसके भोपाल स्थित घर और ससुराल की तलाशी भी ली। पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान कथित फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज, लेटरहेड और अन्य सामग्री बरामद हुई।
‘भारत सरकार’ लिखी कार और कथित फर्जी पहचान
जांच में एक इनोवा कार का भी जिक्र सामने आया है, जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा होने की जानकारी दी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कार का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था और क्या इससे लोगों के सामने सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव बनाने की कोशिश की जाती थी।

इसके अलावा कथित तौर पर CBI लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड भी बरामद होने की बात सामने आई है। इन दस्तावेजों की वास्तविकता और इस्तेमाल की जांच पुलिस कर रही है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना अहम है कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, उनका इस्तेमाल किन परिस्थितियों में किया गया और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।
IAS अधिकारियों की सूची रखने का भी आरोप
**Trupti Singh Rajput Case** में जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, तृप्ति के पास मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की सूची होने की जानकारी मिली है।
आरोप है कि वह जरूरत के मुताबिक अलग-अलग अधिकारियों के नाम लेकर खुद को उनके संपर्क में या करीबी बताती थी। इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया जाता था।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सूची में शामिल अधिकारियों के नामों का वास्तव में किस तरह इस्तेमाल किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इनमें से किसी अधिकारी से तृप्ति का वास्तविक संपर्क था या केवल उनके नाम का इस्तेमाल किया जाता था।
भोपाल में 39.17 लाख की दूसरी FIR
चंदेरी मामले के अलावा **Trupti Singh Rajput Case** का एक दूसरा पहलू भोपाल से जुड़ा है। बागसेवनिया थाने में बालाघाट जिले के खैरलांजी तहसील के चिचोली निवासी रोहित लिल्हारे की शिकायत पर 39.17 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की FIR दर्ज की गई है।
शिकायत के मुताबिक, तृप्ति ने खुद को ट्रेनी IAS अधिकारी और MPT की एडिशनल डायरेक्टर बताया था। आरोप है कि उसने MPT की होटल-रिसॉर्ट संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35.30 लाख रुपये और नौकरी लगवाने के नाम पर 3.87 लाख रुपये लिए।
इस तरह शिकायतकर्ता के अनुसार कुल 39.17 लाख रुपये दिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो होटल-रिसॉर्ट की लीज का काम हुआ और न ही नौकरी लग पाई।
जब शिकायतकर्ता ने पैसे वापस मांगे तो कथित तौर पर सिर्फ 1 लाख रुपये ऑनलाइन लौटाए गए। बाकी 38.17 लाख रुपये वापस नहीं किए गए। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और जांच के बाद FIR दर्ज हुई।
भाई और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच
भोपाल वाले मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि तृप्ति के बताए सरकारी पद की पुष्टि उसके भाई और प्रखर ने भी की थी।
इससे शिकायतकर्ता और उसके परिचितों को तृप्ति के सरकारी अधिकारी होने पर भरोसा हुआ और कथित तौर पर इसके बाद रकम का लेनदेन हुआ।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और किसकी क्या भूमिका थी। जांच एजेंसियां मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल कर सकती हैं।
अब पूरे नेटवर्क की तलाश में पुलिस
नए विधानसभा वीडियो, कथित फर्जी पहचान पत्र, सरकारी लेटरहेड, ‘भारत सरकार’ लिखी कार और अलग-अलग मामलों में सामने आए सरकारी पद के दावों ने **Trupti Singh Rajput Case** की जांच को और व्यापक कर दिया है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति ने कथित तौर पर फर्जी अधिकारी की पहचान कितने समय से बना रखी थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पहचान के जरिए कितने लोगों को प्रभावित किया गया और उनसे कितनी रकम ली गई।
सोशल मीडिया पर मौजूद तस्वीरों और वीडियो की भी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि ऐसे कंटेंट से किसी व्यक्ति की गतिविधियों, संपर्कों और सार्वजनिक मौजूदगी से जुड़े सुराग मिल सकते हैं।
फिलहाल पुलिस का फोकस कथित ठगी के मामलों में साक्ष्य जुटाने और दूसरे संभावित आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने पर है। किसी भी आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। **Trupti Singh Rajput Case** में आने वाले दिनों में नए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद पूरे कथित नेटवर्क की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।














