US Midterm Election 2026 अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन 2026 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी प्रतिनिधि सभा, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इन नतीजों को ट्रम्प प्रशासन के लिए अहम राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद (Abdul El-Sayed) ने जीत दर्ज कर अमेरिकी राजनीति में नया इतिहास रच दिया है। वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे।
अब्दुल अल-सैयद की जीत इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनके खिलाफ विवादित बयान दिए थे। ट्रम्प ने उन्हें खुले मंच से ‘जिहादी’ तक कह दिया था। इसके बावजूद मिशिगन के मतदाताओं ने उन्हें जीत दिलाई। इस चुनाव में कई अन्य नेताओं ने भी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की पार्टी को बड़ा झटका
अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर मतदान हुआ था। सामने आए नतीजों के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी ने 231 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को 144 सीटें मिलीं। बाकी सीटों पर चुनावी प्रक्रिया और मतगणना की स्थिति के अनुसार आंकड़े अपडेट किए जा रहे हैं।
सीनेट में भी डेमोक्रेट्स ने बढ़त बनाई है। यहां कुल 100 सीटें हैं, जिनमें से 35 सीटों पर चुनाव हुआ था। उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, 33 सीटों के परिणाम सामने आए हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं।
कुल सीटों के आंकड़ों में डेमोक्रेट्स 54 सीटों के साथ बहुमत में बताए गए हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के पास 44 सीटें हैं। दो सीटों के नतीजे आने बाकी बताए गए हैं।
अब्दुल अल-सैयद बने अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर
मिशिगन से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद की जीत इस चुनाव की सबसे बड़ी खबरों में शामिल है। उनकी जीत के साथ वह अमेरिकी इतिहास में सीनेटर चुने जाने वाले पहले मुस्लिम बनेंगे।
अब्दुल अल-सैयद का चुनावी सफर काफी चर्चा में रहा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें निशाना बनाया था। 25 अक्टूबर को मिशिगन में आयोजित एक चुनावी रैली में ट्रम्प ने कहा था कि वह एक ऐसे व्यक्ति को अमेरिकी सीनेटर बनने से रोकने आए हैं, जिसे उन्होंने ‘जिहादी’ और मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताया।
ट्रम्प ने अब्दुल अल-सैयद पर आतंकियों का समर्थन करने जैसे आरोप भी लगाए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि अगर अल-सैयद सीनेटर बनते हैं, तो उन्हें संसद में प्रवेश करने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए।
ट्रम्प ने अपने भाषण में 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों का भी जिक्र किया और अल-सैयद की तुलना विमान हाईजैक करने वाले आतंकियों से की। हालांकि, ये ट्रम्प के चुनाव प्रचार के दौरान लगाए गए आरोप और बयान थे।
इन विवादों के बीच अब्दुल अल-सैयद की जीत ने अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
चुनाव में चार नेताओं ने रचे नए इतिहास
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में अब्दुल अल-सैयद के अलावा तीन अन्य नेताओं ने भी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अलग-अलग राज्यों में उनकी जीत ने अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व के नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
1. अब्दुल अल-सैयद: मिशिगन से सीनेट चुनाव जीतकर वह अमेरिकी इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। उनकी जीत को मुस्लिम समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2. कीशा लांस बॉटम्स: जॉर्जिया में गवर्नर का चुनाव जीतकर वह अमेरिका की पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनेंगी। उनकी जीत से अमेरिकी राजनीति में महिलाओं और अश्वेत समुदाय का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।
3. क्रिस पप्पास: न्यू हैम्पशायर से चुनाव जीतने के बाद वह अमेरिकी सीनेट में पहुंचने वाले पहले समलैंगिक पुरुष होंगे। उनकी जीत LGBTQ समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम है।
4. डेब हालैंड: न्यू मैक्सिको में गवर्नर का चुनाव जीतकर वह अमेरिका की पहली मूल अमेरिकी महिला गवर्नर बनी हैं। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में मूल निवासी समुदाय की भागीदारी के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है।
मेन में 30 साल से सीनेटर रहीं सुसान कॉलिन्स को हार
मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कई महत्वपूर्ण सीटों पर नुकसान उठाना पड़ा। मेन राज्य में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स को हरा दिया।
सुसान कॉलिन्स करीब 30 साल से सीनेट में प्रतिनिधित्व कर रही थीं। वह छठी बार चुनाव जीतने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी हार स्वीकार कर ली है।
इस जीत से डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट में एक और महत्वपूर्ण सीट हासिल हुई। लंबे समय से रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाली सीट पर डेमोक्रेट्स की जीत को पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है।
युवाओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी को ज्यादा वोट दिए
चुनाव के दौरान युवा मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। उपलब्ध चुनावी रुझानों और रिपोर्टों के मुताबिक, युवाओं का समर्थन डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर अधिक रहा।
ट्रम्प प्रशासन की नीतियां, ईरान के साथ युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतें चुनावी मुद्दों में शामिल रहीं। महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर मतदाताओं की नाराजगी का असर भी नतीजों में दिखाई दिया।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन मुद्दों को चुनाव प्रचार में प्रमुखता से उठाया। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी को अपने पारंपरिक समर्थक क्षेत्रों में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
रिपब्लिकन सीनेटर ने हार के लिए ट्रम्प को जिम्मेदार ठहराया
रिपब्लिकन सीनेटर रॉन जॉनसन ने भी चुनावी नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी के प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भूमिका पर सवाल उठाए।
जॉनसन 2011 से विस्कॉन्सिन के सीनेटर हैं। उन्होंने रेडियो 4 के ‘टुडे’ कार्यक्रम में कहा कि ईरान के साथ युद्ध और इसके कारण ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ा है। मतदाता इन मुद्दों को लेकर परेशान थे।
उन्होंने ट्रम्प के चुनावी बयान का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने मतदाताओं से अपील की थी कि वे चुनाव को ऐसा समझें जैसे उनका नाम भी उम्मीदवारों की सूची में शामिल है। जॉनसन के मुताबिक, मतदाताओं ने उनकी बात मान ली और चुनावी नतीजे सामने हैं।
ट्रम्प प्रशासन के लिए क्यों अहम हैं ये नतीजे?
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच होने वाले चुनाव होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की कुछ सीटों पर मतदान कराया जाता है। इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति की लोकप्रियता और उनकी नीतियों के प्रति जनता के रुख का संकेत देते हैं।
सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत मिलने से ट्रम्प प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। संसद में बहुमत विपक्ष के पास होने पर राष्ट्रपति की नीतियों, बजट और प्रस्तावित कानूनों पर बहस तेज हो सकती है।
इसके अलावा, संसदीय समितियों के जरिए सरकार के फैसलों की जांच और निगरानी भी बढ़ सकती है। ऐसे में आने वाले समय में ट्रम्प प्रशासन और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
अब्दुल अल-सैयद की जीत ने इस चुनाव को एक और वजह से ऐतिहासिक बना दिया है। उनकी सफलता के साथ अमेरिकी सीनेट में पहली बार मुस्लिम प्रतिनिधित्व का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।














