उमाकांत त्रिपाठी। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की। कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त अभियान में सुरक्षा बलों ने महज 21 दिनों में 31 कुख्यात नक्सलियों को मार गिराया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि सुरक्षा बलों की सफलता दर्शाती है कि नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए हमारा अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
शाह के ट्वीट पर पीएम का जवाब
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट के जवाब में पीएम मोदी ने एक्स पर कहा, “सुरक्षा बलों की यह सफलता बताती है कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में हमारा अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में शांति की स्थापना के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
गृहमंत्री ने दी बधाई
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षा बलों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह नक्सलवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा अभियान है, जिसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया गया। शाह ने बताया कि जिस कुर्रगुट्टालू पहाड़ पर पहले नक्सलियों का आतंक था, वहां अब गर्व से तिरंगा लहरा रहा है। यह पहाड़ पीएलजीए बटालियन 1, डीकेएसजेडसी, टीएससी और सीआरसी जैसे बड़े नक्सल संगठनों का मुख्यालय था, जहां नक्सलियों को ट्रेनिंग दी जाती थी और हथियार बनाए जाते थे।
21 दिन में पूरा हुआ ऑपरेशन
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक केवल 21 दिनों में पूरा किया गया। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद सीआरपीएफ, एसटीएफ और डीआरजी के जवानों ने बहादुरी से नक्सलियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार 31 मार्च 2026 तक भारत को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि यह लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जाएगा।
18 जवान हुए घायल
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अभियान के दौरान विभिन्न आईईडी विस्फोटों में कोबरा, एसटीएफ और डीआरजी के कुल 18 जवान घायल हुए। सभी घायल जवान अब खतरे से बाहर हैं और उन्हें विभिन्न अस्पतालों में सर्वोत्तम उपचार प्रदान किया जा रहा है। कुर्रेगुट्टालू पहाड़ी की परिस्थितियां बेहद कठिन हैं और वहां दिन का तापमान 45 डिग्री से अधिक होने के कारण अनेक जवान डिहाईड्रेशन के शिकार हुए। इसके बावजूद भी जवानों के मनोबल में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने पूरे साहस और जोश के साथ नक्सलियों के विरूद्ध अभियान जारी रखा।













