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जानिए आखिर क्यों चर्चा में है वाराणसी का नमो घाट?

वाराणसी (यूपी) में ‘नमो घाट’ पर 10 रुपए का प्रवेश शुल्क लगाए जाने के फैसले को वापस ले लिया गया है।

अधिकारी के मुताबिक, यह शुल्क अराजक तत्वों को घाट से दूर रखने के लिए तय हुआ था। कांग्रेस नेता अजय राय ने ट्वीट किया, “वाह मोदी जी वाह। पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने के बाद अब आस्था का व्यवसायीकरण।”

इससे पहले मंगलवार को नमो घाट पर टिकट सिस्टम लागू कर दिया गया। 10 रुपये का टिकट चार घंटे के लिए मान्य था। स्मार्ट सिटी के इस फैसले का चौतरफा विरोध होने लगा।

गौरतलब है कि साल 2019 में पीएम मोदी ने नमो घाट का उद्घाटन किया था। नमो घाट को दो चरणों में बनाया गया है। नमो घाट काशी का पहला ऐसा घाट होगा जो जल, थल और वायु मार्ग से जुड़ा होगा। सूर्य नमस्कार को समर्पित इस घाट को 34 करोड़ की लागत से बनाया गया है।

नमो घाट करीब आधा किलोमीटर लंबा है जिसमें मेक इन इंडिया और वोकल फॉर लोकल को प्रमोट किया गया है। इस घाट पर गेल इंडिया ने फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन भी बनाया है।

नमो घाट का मूल नाम खिड़किया घाट है। करीब 11.5 एकड़ में दिसंबर 2020 से काम की शुरुआत हुई थी। फेज -1 का काम पूरा हो गया है। नमो घाट पर रोज 4 से 5 हजार लोग पहुंचते हैं।

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