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अब इसलिए नहीं आती आतंकवादियों के जनाजों में भीड़, अमित शाह ने बताया

उमाकांत त्रिपाठी। संसद में जम्मू कश्मीर से जुड़े दो बिलों पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कई बातें देश की जनता के सामने रखी। उन्होंने कहा कि- पहले एन्काउंटर में मारे गए आतंकवादियों के जनाजे में 25-25 हजार लोगों की भीड़ आती थी। अनुच्छेद 370 हटने के बाद ऐसा कोई नजारा अब सामने नहीं आता हैय़ इसकी वजह है कि सरकार ने फैसला किया है कि जो भी आतंकवादी मारा जाएगा उसी जगह पर धार्मिक सम्मान और रीति-रिवाज के मुताबिक दफना भी दिया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने फैसला किया है कि अगर पत्थर फेंकने का कोई मामला दर्ज है तो उस व्यक्ति के परिवार में किसी को भी नौकरी नहीं मिलेगी।

आतंकियों को नहीं मिल रही फंडिंग

गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद ही नहीं बल्कि आतंकवाद को पैसा देने वाले नेटवर्क पर भी प्रहार किया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने आतंकवाद को फाइनेंस करने वालों पर 32 केस और स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 51 केस दर्ज किए हैं। इन मामलों में 229 लोगों की गिरफ्तारी और 150 करोड़ की संपत्ति जब्त और 134 बैंक अकाउंट में 100 करोड़ रुपए से अधिक सीज किए गए हैं। इसके बाद अमित शाह ने जो बात बताई वो अपने आप में हैरान कर देने वाली थी, गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पहले पत्थरबाजी की घटनाओं के लिए कुख्यात था। लेकिन इधर बीते कई सालों से ऐसी कोई भी घटना सामने नहीं आई है।

अब कोई पत्थर नहीं फेंकता

शाह ने बताया कि- साल 2010 में पत्थर फेंकने की संगठित वारदातें 2,656 हुईं जिनकी वजह से 112 की मौत और 6,235 लोग जख्मी हुए थे। वहीं अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद से बीते चार साल में पत्थर फेंकने की एक भी घटना नहीं हुई। कांग्रेस की सरकारों को घेरते हुए अमित शाह ने बताया कि यूपीए सरकार के 10 सालों के कार्यकाल 2004 से 2014 के बीच कश्मीर में 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं। वहीं मोदी सरकार के कार्यकाल में साल 2014 से 2023 के बीच 2,197 आतंकवादी घटनाएं हुई हैं यानी 70 फीसदी की कमी आई है।

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