उमाकांत त्रिपाठी।बेटी प्रेमी के साथ चली गई तो एक परिवार इस कदर टूटा कि- उन्होंने उसे मरा मान लिया। उन्होंने बेटी का पुतला बनाकर अर्थी सजाई। शव यात्रा निकाली। रिश्तेदारों के साथ श्मशान घाट जाकर अंतिम संस्कार किया।मामला विदिशा में चूना वाली गली का है। यहां रहने वाले कुशवाह परिवार की 23 वर्षीय बेटी सविता 13 दिसंबर को अचानक घर छोड़कर चली गई। परिवार वालों ने आसपास तलाश किया। रिश्तेदारों के यहां पता किया लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। परिजन ने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई।
रिश्तेदारों के साथ चौक-चौराहों से निकाली शव यात्रा
मामले का पता चलते ही रिश्तेदारों ने परिजन से संपर्क किया। उन्हें ढांढस बंधाया। इसके बाद सविता के परिजन ने उसे मरा मानकर अंतिम क्रिया करने का फैसला किया।शुक्रवार को कुशवाह परिवार ने रिश्तेदारों को इकट्ठा किया। आटे से सविता का पुतला बनाया। उसे चिता पर लिटाया। फिर गाजे-बाजे के साथ शहर के चौक-चौराहों से अंतिम यात्रा निकाली।
भाई-बहनों में सबसे छोटी है सविता
रिश्तेदारों के मुताबिक, सविता दो भाई और तीन बहनें हैं। वह सबसे छोटी है। एक भाई और एक बहन की शादी हो गई है।
सविता ग्रेजुएशन कम्प्लीट कर चुकी है। संजू मालवीय उसके भाई का परिचित था। घर पर आता-जाता रहता था।
भाई बोले- अपने अरमानों की अर्थी निकाली
सविता के पिता रामबाबू कुशवाहा ने रोते हुए कहा- बेटी के फैसले से हम टूट चुके हैं। ये हमारे जीवन का सबसे दुखद क्षण है। वहीं, भाई राजेश कुशवाहा बोले,
उसे बहुत लाड़-प्यार से पाला था। उसकी हर इच्छा पूरी की थी। बहन के इस फैसले से पूरा परिवार दुखी है। बड़े अरमानों से उसे पढ़ाया-लिखाया था, लेकिन वह सबको छोड़कर चली गई, इसलिए आज हमने अपने ‘अरमानों की अर्थी’ निकाली है।














