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केन्द्रीय इस्पात मंत्री ने मानकों में सुधार के माध्यम से लागत में कमी के निर्देश दिए

केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री रामचंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में कल शाम लोक उपक्रमों (PSU) के उत्पादन में लागत में कमी की स्थिति और भविष्य के लिए कार्य योजना की समीक्षा के लिए इस्पात क्षेत्र के लोक उपक्रमों के अधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित हुई।

मंत्री महोदय ने उत्पादन की लागत को प्रभावित करने वाले मापदंडों का वृहद और सूक्ष्म विश्लेषण करने की आवश्यकता पर जोर दिया और प्रतिकूल परिस्थितियों को अवसरों में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए। श्री सिंह ने निर्देश दिए कि आगामी छह माह में उपरोक्त मापदंडों में सुधार कर लागत में कमी की कार्य योजना तैयार कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

बैठक में यह बताया गया कि कोकिंग कोल, जिसका ज्यादातर आयात किया जाता है, ही सबसे बड़ा लागत तत्व है। मंत्री महोदय ने (लोक सार्वजनिक) उपक्रमों से कोक दर में कमी, चूर्णीकृत कोयला अन्तः क्षेपण (पल्वेराइज्ड कोल इंजेक्शन–पीसीआई) में वृद्धि और कोकिंग कोयले की खपत को कम करने तथा उत्पादन की लागत को कम करने के लिए पैलेटों के उपयोग में वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण लागत कटौती उपायों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। यह भी निर्देश दिया गया कि इन प्रौद्योगिक आर्थिक-मापदंडों की मासिक आधार पर इस्पात डैशबोर्ड के जरिए निगरानी की जाएगी।

बैठक में इस्पात संयंत्रों की दक्षता और उत्पादकता को प्रभावित करने वाले विभिन्न मानदंडों अर्थात ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ )उत्पादकता, ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ) कोक दर, ब्लास्ट फर्नेस चूर्णीकृत कोयला अन्तः क्षेपण (पल्वेराइज्ड कोल इंजेक्शन –पीसीआई)/कोल डस्ट इंजेक्शन (सीडीआई) दर,श्रम उत्पादकता, विशिष्ट ऊर्जा खपत, कार्बन डाई ऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन की तीव्रता, पानी की खपत आदि की समीक्षा की गई ताकि उत्पादन की लागत में कमी लाने के साथ ही ऊर्जा की दक्षता में सुधार किया जा सके, साथ ही ग्रीन हॉउस उत्सर्जन को भी कम किया जा सके और पानी की खपत को न्यूनतम किया जा सके।

भारतीय और वैश्विक मानकों के अनुसार दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने और इस्पात संयंत्रों और खानों के उत्पादन की लागत को कम करने के लिए किए जा रहे उपायों और इन्हें प्राप्त करने के लिए कार्य योजनाओं पर भी इस बैठक में चर्चा की गई।

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