Petrol Diesel Price को लेकर देशभर के करोड़ों लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही थी। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति स्थिर बनी रहती है, तो आने वाले समय में भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG सिलेंडर की कीमतों में भी राहत मिल सकती है।
US-Iran Peace Deal के बाद कच्चे तेल में बड़ी गिरावट
रविवार देर रात अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड लगभग 3.9 प्रतिशत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड ऑयल करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया।
मार्च के बाद यह कच्चे तेल का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार को लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच किसी सकारात्मक समझौते का इंतजार था। जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौते की घोषणा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के खोलने की बात कही, तेल बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली।
निवेशकों को अब तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम दिखाई दे रहा है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचता है।
फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके चलते तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी।
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई व्यावसायिक जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए भारी शुल्क भी देना पड़ रहा था। इससे तेल की ढुलाई महंगी हो गई थी और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा था।
जानकारों ने चेतावनी दी थी कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती थीं। इससे दुनिया भर में ईंधन महंगा हो जाता।
अब इस मार्ग के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिली है।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है।
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला हर बदलाव सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर असर डालता है।
यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं, तो:
भारत का आयात बिल कम होगा।
विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा।
ट्रांसपोर्टेशन लागत कम होगी।
महंगाई दर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
सरकार को वित्तीय प्रबंधन में राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कम तेल कीमतों का लाभ केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, उद्योग और कई अन्य क्षेत्रों को भी फायदा पहुंचा सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा?
भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले भी संकेत दे चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आने पर तेल और गैस की कीमतों में राहत मिल सकती है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 8 से 8.5 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई थी। अब जब कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, तो तेल विपणन कंपनियों पर कीमतों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का अनुमान है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, इस संबंध में अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या LPG सिलेंडर भी होगा सस्ता?
पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ घरेलू LPG गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
भारत बड़ी मात्रा में LPG का भी आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में गिरावट आने पर LPG की लागत कम हो सकती है।
यदि कच्चे तेल और गैस की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक नियंत्रित रहती हैं, तो घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इससे करोड़ों परिवारों के घरेलू बजट को राहत मिल सकती है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। यदि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता स्थायी रूप से लागू रहता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है।
ऐसी स्थिति में भारत समेत कई तेल आयातक देशों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। वहीं आम जनता को पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद और मजबूत हो जाएगी।
फिलहाल बाजार की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतों को लेकर राहत की खबरें सामने आ सकती हैं।














