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ट्रंप के गोल्डन डोम की तरह होगा पीएम मोदी का सुरक्षा कवच, जल्द तैयार होगा सुदर्शन चक्र, जानें इसकी खासियत

उमाकांत त्रिपाठी।भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नई रक्षा प्रणाली ‘सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की है, जो देश की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच बन सकती है. मोदी यहां तक कह दिया कि ये सिर्फ दुश्मन के हवाई हमलों से बचाव ही नहीं करेगा, बल्कि हिटबैक भी करेगा. इसकी तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘गोल्डन डोम’ से की जा रही है. लेकिन क्या यह सचमुच वैसी ही होगी? और यह फैसला भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

जानिए- सुदर्शन चक्र क्या है?
‘सुदर्शन चक्र’ भारत की एक नई राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली है यानी एयर डिफेंस सिस्टम, जिसे डीआरडीओ (DRDO) और इसरो (ISRO) ने विकसित किया है. इसका नाम हिंदू पौराणिक कथा के भगवान विष्णु के प्रसिद्ध शस्त्र ‘सुदर्शन चक्र’ से प्रेरित है, जो दुश्मनों को पराजित करने का प्रतीक है. यह एक एडवांस मिसाइल डिफेंस और निगरानी प्रणाली है, जो भारत को हवाई हमलों, मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बचाने के लिए डिजाइन की गई है.

जानिए- सुदर्शन चक्र की विशेषताएं
रेंज: 2500 किलोमीटर तक दुश्मन की मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता.

ऊंचाई: 150 किलोमीटर तक हवा में मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकता है.

प्रौद्योगिकी: इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लेजर-गाइडेड सिस्टम हैं, जो सटीक निशाना लगाते हैं.

गति: 5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से मिसाइल दाग सकता है.

संरचना: यह एक ग्राउंड-बेस्ड और स्पेस-बेस्ड हाइब्रिड सिस्टम है, जिसमें सैटेलाइट और रडार नेटवर्क शामिल हैं.

लक्ष्य: बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और हाइपरसोनिक हथियारों को नष्ट करना.

तैनाती: इसे 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है. लागत करीब 50,000 करोड़ रुपये अनुमानित है.

जानें- गोल्डन डोम क्या है?
‘गोल्डन डोम’ अमेरिका की एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल (2017-2021) में प्रस्तावित किया गया था. इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ढाल के रूप में डिजाइन किया गया था, जो दुश्मन के मिसाइल हमलों से अमेरिका की रक्षा करे. इसका नाम इसके सुनहरे रंग के डोम (गुंबद) से प्रेरित है.

जानें- गोल्डन डोम की विशेषताएं-

रेंज: 3000 किलोमीटर तक मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता.

ऊंचाई: 200 किलोमीटर तक इंटरसेप्ट कर सकता है.

प्रौद्योगिकी: इसमें लेजर और रडार सिस्टम हैं, लेकिन AI का उपयोग सीमित है.

गति: 4.5 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार.

संरचना: पूरी तरह ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम, जो कई स्थानों पर तैनात है.

लक्ष्य: मुख्य रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों पर केंद्रित.

तैनाती: इसे 2023 में आंशिक रूप से लागू किया गया. लागत 70,000 करोड़ रुपये (लगभग 8 बिलियन डॉलर) थी.

 

समानताएं: दोनों प्रणालियां मिसाइल रक्षा के लिए हैं. दुश्मन के हमले को रोकने में सक्षम हैं. दोनों में एडवांस रडार और लेजर तकनीक का इस्तेमाल हुआ है.

अंतर: सुदर्शन चक्र में AI और स्पेस-बेस्ड तकनीक नई है, जो इसे गोल्डन डोम से अलग और आधुनिक बनाती है. गोल्डन डोम की रेंज और ऊंचाई ज्यादा है, लेकिन यह पुरानी तकनीक पर आधारित है. सुदर्शन चक्र की लागत कम है, जो इसे भारत के लिए किफायती बनाता है.

जानिए- यह फैसला कितना अहम है?
सुरक्षा: भारत के पड़ोसी देशों (चीन और पाकिस्तान) के साथ सीमा विवाद को देखते हुए ‘सुदर्शन चक्र’ देश की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा. यह मिसाइल हमलों से बचाव का एक मजबूत कवच होगा.

आत्मनिर्भरता: यह प्रणाली भारत में ही बन रही है, जो डीआरडीओ और इसरो की तकनीकी शक्ति को दर्शाती है. इससे आयात पर निर्भरता कम होगी.

क्षेत्रीय शक्ति: अगर यह सफल होती है, तो भारत एशिया में रक्षा प्रौद्योगिकी में अग्रणी बन सकता है, जो वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को मजबूत करेगा.

चुनौतियां: इसकी ऊंची लागत और तकनीकी जटिलता इसे लागू करने में मुश्किल बना सकती है. साथ ही, दुश्मन देश नई रणनीतियां बना सकते हैं.

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