उमाकांत त्रिपाठी।पूर्वी भारत के विकास को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन तो पुराना है. इस क्रम में पीएम मोदी फिर बिहार दौरे पर आ रहे हैं और इस दौरान सीमांचल क्षेत्र को विकास की नई उड़ान देने के लिए सोमवार को बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे. 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली योजनाओं में पूर्णिया एयरपोर्ट और रेलवे ट्रेनों का विस्तार शामिल है. यह कदम पूर्वी भारत, खासकर बिहार के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने की मोदी सरकार की योजना का हिस्सा है. चुनावी साल में इस क्षेत्र पर केंद्रित विकास को राजनीति से भी जोड़ा जा रहा है और ऐसे में बिहार की सियासत में सीमांचल की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है. दरअसल, सीमांचल पर उनकी विशेष मेहरबानी के पीछे सामाजिक ही नहीं राजनीतिक कारण भी कहे जा रहे हैं.
दरअसल, सीमांचल बिहार की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पीएम मोदी की यह पहल न सिर्फ यहां के विकास की गति को बढ़ाएगी, बल्कि आगामी चुनावों में एनडीए सरकार की पकड़ भी मजबूत करेगी. पूर्णिया पीएम मोदी के प्रोजेक्ट लॉन्च से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. करीब 40 हजार करोड़ की परियोजनाएं न केवल विकास की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, बल्कि चुनावी रणनीति का भी अहम हिस्सा मानी जा रही हैं.
विकास परियोजनाओं का मेगा लॉन्च
पीएम मोदी करीब 36,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाएंगे. इनमें पूर्णिया एयरपोर्ट का नया टर्मिनल बिल्डिंग, नेशनल मखाना बोर्ड, कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट रिवर लिंक प्रोजेक्ट और कई रेल परियोजनाएं शामिल हैं. इसके साथ ही पीएम चार नई ट्रेनों को फ्लैग ऑफ करेंगे जिनमें जोगबनी-दानापुर वंदे भारत एक्सप्रेस और जोगबनी-इरोड अमृत भारत एक्सप्रेस प्रमुख हैं. इसके अतिरिक्त, अररिया-गलगलिया रेल लाइन का उद्घाटन और बिक्रमशिला-कटारिया रेल लाइन की नींव रखी जाएगी. बता दें कि यह बिहार का चौथा ऑपरेशनल एयरपोर्ट होगा जो सीमांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. पीएम मोदी पूर्वी भारत के विकास पर हमेशा जोर देते रहे हैं और बिहार को देश की टॉप लीग में लाने की उनकी इच्छा स्पष्ट है. लेकिन चुनावी साल में यह दौरा विकास से आगे राजनीतिक संदेश भी देता है.
बिहार का विकास पीएम की प्राथमिकता
सीमांचल के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है. यह पटना और बागडोगरा पर निर्भरता कम करेगा. इसके अलावा, PMAY के तहत 35,000 ग्रामीण और 5,920 शहरी लाभार्थियों के लिए घरों का गृह प्रवेश समारोह होगा. नेशनल मखाना बोर्ड मखाना उत्पादकों को बढ़ावा देगा जो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा. जानकारों का कहना है कि ये परियोजनाएं बिहार की पिछड़ेपन को दूर करने का प्रयास हैं. बता दें कि बिहार में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से कम है और मोदी सरकार का दावा है कि ये कदम रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देंगे.
सियासी मैदान का अहम अखाड़ा सीमांचल
वहीं, दूसरी ओर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के करीब आते ही इस तरह की योजनाएं चुनावी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही हैं. सीमांचल पर खास फोकस से यह संकेत मिलता है कि बीजेपी केंद्र और राज्य सरकार इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. चुनावी दृष्टि से विकास परियोजनाओं का शुभारंभ स्थानीय मतदाताओं के बीच सकारात्मक छवि बनाने का तरीका हो सकता है. दरअसल, बीते वर्षों में सीमांचल की राजनीति में कई दलों ने अपने-अपने प्रभाव को मजबूत करने की कोशिश की है. अब पीएम मोदी की सक्रियता के चलते यह क्षेत्र राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अखाड़ा बन सकता है. इससे आगामी चुनावों में राजनीतिक पार्टियों के रणनीतिक बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं.
चुनावी साल में सियासत साधने की कवायद
जानकार कहते हैं कि- बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह दौरा NDA की रणनीति का हिस्सा है. बीजेपी और जेडीयू गठबंधन सीमांचल में अपनी कमजोर पकड़ मजबूत करना चाहते हैं जहां विकास के नाम पर वोटरों को लुभाने की कवायद है. जानकारों के अनुसार, एयरपोर्ट और ट्रेन जैसी परियोजनाएं प्रवासी मजदूरों और युवाओं को आकर्षित करेंगी जो बेरोजगारी से त्रस्त हैं. लेकिन विपक्ष का आरोप है कि ये ‘इलेक्शन गिफ्ट’ हैं जो महज वादों पर आधारित हैं. महागठबंधन का कहना है कि मोदी सरकार ने बिहार को हमेशा उपेक्षित रखा और अब चुनावी लाभ के लिए प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रही है. इसके साथ ही पोलराइजेशन का खतरा भी है. माना जा रहा है कि मुस्लिमों की बड़ी आबादी के कारण बीजेपी हिंदुत्व और सुरक्षा मुद्दों पर फोकस करेगी.
पीएम मोदी का सीमांचल दौरा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है. यह दौरा विधानसभा चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन का अवसर है जिससे एनडीए को अपने समर्थकों को एकजुट करने और नए वोटरों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है. सीमांचल जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा है और पीएम मोदी का दौरा इस क्षेत्र में पार्टी की स्थिति को और मजबूत करने का एक अवसर है.एनडीए ने सीमांचल के लिए एक विस्तृत प्लान बनाया है, जिसमें प्रचार रणनीति और बूथ मैनेजमेंट पर विशेष जोर दिया जाएगा. पीएम मोदी की सभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए एनडीए के कार्यकर्ता पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. जानकार कहते हैं कि पीएम मोदी की सीमांचल पर विशेष नजर इसलिए है क्योंकि यह क्षेत्र बिहार चुनाव का टर्निंग पॉइंट हो सकता है.















