उत्तर प्रदेशदिल्ली

देख लो योगी जी आपके अफसर तो खुद को मुख्यमंत्री समझते हैं, फैसला सुनकर हैरान रह जाओगे आप

यूपी के संतकबीर नगर के जिलाधिकारी महोदय को जज बनने का चस्का लग गया है। इनका नाम है प्रेम रंजन सिंह। इन्हें जिले के विकास के लिए डीएम बनाया गया है, लेकिन लगता है ये ज्यूडिशियरी सेवा में जाना चाहते थें। किसी कारणवश वहां नही जा पाए तो जहां हैं वहीं जज बनने की कोशिश कर रहे हैं। किसी की शिकायत मिलती है तो जज साहब की तरह फैसला सुना देते हैं। एक ऐसा ही फैसला सुनाकर वो सुर्खियों में आ गए हैं। जिसके बाद लोग उनकी खुब फजीहत हो रही है।

दरअसल यूपी में बोर्ड परीक्षाओं का दौर शुरु होने वाला है। इसके लिए सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी है। इसी क्रम में संत कबीर नगर के 99 विद्यालयों को बोर्ड परीक्षा के लिए चयनित किया गया है। जहां बोर्ड परिक्षाओं का आयोजन होना है। इसपर मेंहदावल विधायक अनिल त्रिपाठी ने आपत्ति जताई है। बोर्ड परिक्षाओं के लिए चुने जाने वाले विद्यालयों की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लगाते हुए विधायक जी ने संत कबीर नगर के जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह से इसकी शिकायत कर दी।

शिकायत मिलते ही जिलाधिकारी महोदय आग बबूला हो गए। डीएम ने जिला विकास निरीक्षक मनमोहन शर्मा को अपने ऑफिस बुलाया। ऑफिस में ही वे मनमोहन शर्मा पर भड़क गए। विद्यालय चयन में अनियमितता पर भड़कते हुए डीएम ने मनमोहन शर्मा को कह दिया उल्टा लटका दूंगा। डांटते हुए कहा कि उल्टा लटका दूंगा अगर अनियमितता पाई गई, बिना जांच पड़ताल किए हुए सेंटर नहीं बनाए जा सकते हैं, ये बड़ी अनियमितता है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

अब इसमें जितनी मुंह उतनी बात हो रही है। विधायक अनिल त्रिपाठी का कहना है कि 2022-23 के बोर्ड परीक्षा सेंटर के चयन में भारी अनियमितता की गई है, जिन स्कूलों में बाउंड्री वाल, कैमरे समेत कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, उन्हें सेंटर बना दिया गया है, ऐसे विद्यालयों को निरस्त करते हुए संपूर्ण सुविधा वाले विद्यालयों का चयन किया जाए।

वहीं स्कूल प्रबंधक राकेश कुमार मिश्रा का कहना है कि जिला विद्यालय निरीक्षक का व्यवहार ठीक नहीं है और कार्यशैली भी इनकी उचित नहीं है, इस पर कार्रवाई होनी चाहिए, मानक विहीन विद्यालयों को सेंटर बनाया गया है, इसकी जांच करा कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है।

ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि आखिर इसमें कौन दोषी है लेकिन डीएम साहब के इस रवैये पर सवाल तो खड़े होते हैं कि क्या इस तरह एक अधिकारी को दूसरे अधिकारी के साथ व्यवहार करना उचित है या नही?

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