उमाकांत त्रिपाठी।केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां राजमाता माधवी राजे सिंधिया का निधन हो गया। वे 75 साल की थीं। पिछले दो महीने से बीमार होने से दिल्ली एम्स में भर्ती थीं। उन्होंने बुधवार सुबह 9.28 बजे अंतिम सांस ली। पार्थिव देह बुधवार दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक उनके दिल्ली वाले आवास पर रखी जाएगी। फिर गुरुवार सुबह 11 बजे ग्वालियर लाई जाएगी, यहां दोपहर तीन बजे तक अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी। अंतिम संस्कार ग्वालियर में शाम 5 बजे किया जाएगा। माधवी राजे के निधन पर सीएम डॉ. मोहन यादव, पूर्व सीएम कमलनाथ समेत कई नेताओं ने दुख जताया।राजमाता माधवी राजे मूलत: नेपाल की रहने वाली थीं। वे नेपाल राजघराने से संबंध रखती थीं। उनके दादा जुद्ध शमशेर बहादुर नेपाल के प्रधानमंत्री थे। राणा वंश के मुखिया भी रहे थे। 1966 में माधवराव सिंधिया के साथ उनका विवाह हुआ था।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने दी श्रद्धांजलि
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने दी श्रद्धांजलि
शिवराज बोले-ग्वालियर की जनता की चिंता की, परिवार को संभाला
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- वे सक्रिय राजनीति में नहीं थी लेकिन ग्वालियर की जनता की चिंता उन्होंने हमेशा की। माधवराव जी के जाने के बाद परिवार को संभाला। ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को मार्गदर्शन दिया। मैं ऐसी स्नेहमयी राजमाता के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
सिंधिया के दिल्ली आवास पर राजमाता को श्रद्धांजलि की चार तस्वीरें
शिवराज ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिंधिया के दिल्ली स्थित आवास पहुंचकर राजमाता को श्रद्धांजलि दी।
ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के फैसले में दिया था साथ
मार्च 2020 में जब सिंधिया राजघराने के मुखिया ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने का निर्णय लिया था, उस समय पूरा परिवार उनके साथ था। बेटा और पत्नी तो उनके फैसले में साथ थे ही, पर सबसे ज्यादा सपोर्ट उनकी मां माधवी राजे सिंधिया ने किया था।
ज्योतिरादित्य कांग्रेस में पिता की विरासत छोड़कर जाने में संकोच कर रहे थे। ऐसे में माधवी राजे ने मार्गदर्शक बनकर राह दिखाई थी। इसके बाद ही ज्योतिरादित्य ने अपनी दादी विजयाराजे सिंधिया की तरह बड़ा कदम उठाया था।
राजमाता माधवी राजे सिंधिया का अंतिम संस्कार कल
सुबह 10 बजे: पार्थिव देह नई दिल्ली एयरपोर्ट से ग्वालियर के लिए रवाना की जाएगी। सुबह 10.45 बजे: ग्वालियर एयरपोर्ट पहुंचेगी। सुबह 11.15 बजे: यहां से रानी महल के लिए रवानगी। सुबह 11.45 बजे: रानी महल आगमन। दोपहर 12.30 से 2.30 बजे तक: अंतिम दर्शन। दोपहर 2.30 से 3 बजे तक: अंतिम यात्रा की तैयारी। दोपहर 3.30 बजे: अंतिम यात्रा छत्री के लिए रवाना होगी। शाम 5 बजे: छत्री में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा ने लिखा- हमारे परिवार के लिए अपूरणीय क्षति
पूर्व मंत्री यशोधरा राजे का ट्वीट
ज्योतिरादित्य के कार्यालय ने ट्वीट कर दी जानकारी
बड़े दुःख के साथ ये साझा करना चाहते हैं कि राजमाता साहब नहीं रहीं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की माता व ग्वालियर राजघराने की राजमाता माधवी राजे सिंधिया जी का इलाज पिछले दो महीनों से दिल्ली के एम्स अस्पताल में चल रहा था। पिछले दो सप्ताह स्थिति बेहद क्रिटिकल थीं। आज सुबह 9.28 बजे उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली। ॐ शान्ति।
पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताया
सिंधिया राजवंश से जुड़े अशोक कुमार मोहिते ने शेयर किए माधवी राजे के जीवन से जुड़े किस्से
सिंधिया परिवार ने जारी किया शोक संदेश
माधवी राजे को आज दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक उनके दिल्ली निवास पर रखा जाएगा। इसके बाद ग्वालियर लाया जाएगा।
मां-बेटे के बीच में सेतु थीं माधवी राजे
माधव राव सिंधिया और उनकी माता विजयाराजे सिंधिया के बीच कई सालों तक संबंध ठीक नहीं थे। यहां तक कि एक बार राजमाता विजयाराजे ने माधवराव को उनके अंतिम संस्कार में शामिल न होने के लिए भी कहा था, पर साल 2001 में विजयाराजे के निधन पर माधवराव ने ही उनको मुखाग्नि दी थी। मां (विजयाराजे) और बेटे (माधवराव) के बीच माधवी राजे एक सेतु का काम करती थीं। वियजाराजे सिंधिया, बेटे माधवराव सिंधिया से चाहें जितनी भी नाराज हों मतभेद हों, लेकिन बहू और सास के बीच कभी कोई मतभेद नहीं पनपा।
बारात के लिए ग्वालियर से दिल्ली स्पेशल ट्रेन चलाई गई थी
1966 में माधवराव सिंधिया के साथ राजमाता माधवी राजे सिंधिया का विवाह हुआ था।
उस दौरान तय हुआ की विवाह दिल्ली से सम्पन्न होगा। ऐसे में बारात ले जाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए। ग्वालियर से दिल्ली के बीच विशेष ट्रेन चलाई गई, जिससे ग्वालियर के महाराज माधवराव सिंधिया अपनी बारात लेकर गए थे। 8 मई 1966 को परंपरागत रूप से शादी संपन्न हुई थी और किरण राज लक्ष्मी विवाह पश्चात सिंधिया घराने की बहू और सिंधिया राजवंश की रानी बनकर ग्वालियर आ गईं।














