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फिलहाल किस पद पर हैं राम मंदिर पर फैसला सुनाने वाले पांचों जज, जानिए इन जजों के बारे में सब-कुछ

उमाकांत त्रिपाठी। 9 नवंबर 2019 के इस दिन देश की सर्वोच्च अदालत ने ‘राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद’ पर अंतिम फैसला सुना विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया था। फैसला सुनाने वाले उन सभी पांचों जजों को 22 जनवरी के समारोह के लिए निमंत्रण पत्र भेजा गया है। जानिए ये पांचों फिलहाल किस पद पर हैं। तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर फैसला सुनाने वाली बेंच में शामिल रहें।

डीवाई चंद्रचूड़
डीवाई चंद्रचूड़ साहब के बारे में तो आप जानते ही हैं कि वह अभी सुप्रीम कोर्ट में हैं और देश के मुख्य न्यायधीश के तौर पर काम कर रहे हैं। वह देश के 50वें चीफ जस्टिस बनें

रंजन गोगोई
देश के 46वें चीफ जस्टिस रहे रंजन गोगोई साहब 17 नवंबर को यानी फैसले के अगले ही हफ्ते सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत हो गए। रंजन गोगोई 13 महीने से कुछ अधिक दिन तक सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश रहें। रिटायरमेंट के चार महीने के बाद ही (16 मार्च 2020) को उन्हें तब के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्यसभा के लिए मनोनीत कर दिया। एक आरटीआई के जरिये ये जानकारी साल 2020 में आई थी कि वह राज्यसभा के इकलौते ऐसे सदस्य हैं जो एक सांसद के तौर पर न तो कोई तनख्वाह लेते हैं और न ही कोई अलावेंस।

शरद अरविंद बोबडे
पूर्व मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के रिटायर हो जाने के बाद 18 नवंबर 2019 को शरद अरविंद बोबडे देश के मुख्य न्यायधीश हुए। हम जानते हैं यह पद सीनियॉरिटी को ध्यान में रखकर मिलता है. चूंकि बोबडे साहब ही कोर्ट में गोगोई साहब के बाद सबसे वरिष्ठ जज थे। ऐसे में वह देश के 47वें चीफ जस्टिस बन गए. 23 अप्रैल 2021 तक यानी करीब 17 महीने वह इस पद पर रहें। वह फिलहाल मुंबई के महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और नागपुर के महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के तौर पर काम कर रहे हैं।

अशोक भूषण
राम जन्मभूमि के पक्ष में फैसला देने वाली पीठ में शामिल रहे पूर्व न्यायधीश अशोक भूषण 4 जुलाई 2021 के सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गए। पांच साल से कुछ महीने अधिक सर्वोच्च अदालत में बिताने के बाद जब अशोक भूषण साहब सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए, चार महीने के बाद ही केंद्र सरकार ने इन्हें नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) यानी राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बना दिया।

एस अब्दुल नजीर
एस. अब्दुल नजीर भी अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीछ का हिस्सा थे। पिछले साल करीब 6 साल देश की सबसे बड़ी अदालत में बिताने के बाद 4 जनवरी 2023 को वे सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हो गए। रिटायर होने के दो महीने के भीतर एस. अब्दुल नजीर को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। नजीर साहब फिलहाल आंध्र प्रदेश के 24वें राज्यपाल के तौर पर अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

 

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