उमाकांत त्रिपाठी। देश में पहली बार राज्यपाल ने सीएम पर मानहानि का केस किया है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने शुक्रवार को सीएम ममता बनर्जी और टीएमसी के कुछ नेताओं के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में यह केस किया। एक दिन पहले ममता ने कहा था कि महिलाओं ने उनसे शिकायत की है कि वे राजभवन की गतिविधियों की वजह से वहां जाने से डरती हैं। राज्यपाल-सीएम में लंबे समय से खींचतान चल रही है।
लोकसभा चुनाव के बीच 2 मई को राजभवन की अस्थायी महिलाकर्मी ने राज्यपाल पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। ममता सरकार ने जांच पुलिस को सौंपी थी। वहीं, राज्यपाल ने राजभवन में पुलिस के प्रवेश पर रोक लगा दी। राज्यपाल ने याचिका में कहा है कि घटना राजनीति से प्रेरित थी। पुलिस ने महिला को भड़काया और वीडियो बनाने के लिए प्रेरित किया।
बंगाल गवर्नर पर दर्ज हैं ये केस
पहला केस: राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर राजभवन की महिला कर्मी ने 2 मई को यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। उसने मामले को लेकर हरे स्ट्रीट थाने में लिखित शिकायत दी। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, महिला का आरोप है कि वो 24 मार्च को स्थायी नौकरी का निवेदन लेकर राज्यपाल के पास गई थी। तब राज्यपाल ने बदसलूकी की। गुरुवार को फिर यही हुआ तो वह राजभवन के बाहर तैनात पुलिस अधिकारी के पास शिकायत लेकर गई।
दूसरा केस: राज्यपाल बोस के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट का एक और केस सामने आया है। उन पर एक ओडिसी क्लासिकल डांसर ने दिल्ली के एक 5 स्टार होटल में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। शिकायत अक्टूबर 2023 में दर्ज कराई गई थी।न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, बंगाल पुलिस ने पिछले हफ्ते राज्य सरकार को जांच रिपोर्ट सौंपी है। 14 मई को मामला सामने आया है। ओडिसी डांसर ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह विदेश यात्रा से जुड़ी दिक्कतों को लेकर राज्यपाल से मदद मांगने गई थी।
आरोपों पर क्या बोले राज्यपाल?
राज्यपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महिला के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा, ‘ये मुझे बदनाम करने की साजिश है। मेरे ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। सत्य की जीत होगी। उन्होंने आगे कहा कि मैं बनावटी नरेटिव से डरने वाला नहीं। कोई मुझे बदनाम करके चुनावी फायदा चाहता है तो भगवान भला करे। मैं भ्रष्टाचार-हिंसा के खिलाफ लड़ाई नहीं रोक सकता।’














