उमाकांत त्रिपाठी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार (3 जुलाई) को लोकसभा में सांसदों के शपथ के नियमों में बदलाव कर दिया। नए नियम के मुताबिक, अब सांसदों की शपथ के बाद अब कोई भी नारा लगाने की अनुमति नहीं होगी। ओम बिरला ने ‘अध्यक्ष के निर्देशों’ में ‘निर्देश-1’ में एक नया क्लॉज जोड़ा है। इसके मुताबिक, अब सदस्य सिर्फ शपथ लेंगे और शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। इस दौरान वे किसी भी अन्य शब्द या किसी मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकेंगे।
दरअसल, 18वीं लोकसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन सांसदों के शपथ ग्रहण के दौरान AIMIM के सांसद ओवैसी ने जय फिलिस्तीन का नारा लगाया था। इस पर बाकी सांसदों ने आपत्ति जताई थी। ओवैसी के अलावा कई अन्य सांसदों ने भी अलग-अलग नारे लगाए थे।
कई सांसदों ने लगाए थे नारे
राहुल गांधी ने शपथ के बाद जय हिन्द और जय संविधान का नारा लगाया था। वहीं बरेली से भाजपा सांसद छत्रपाल गंगवार ने हिंदू राष्ट्र की जय का नारा लगाया था। इसके अलावा अयोध्या से सपा सांसद अवधेश राय ने शपथ ली तो जय अयोध्या, जय अवधेश के नारे लगा लगाए। हेमा मालिनी ने शपथ की शुरुआत राधे-राधे से की थी। इन नारों को लेकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया था कि सांसद शपथ ग्रहण के जरिए अपना-अपना राजनीतिक संदेश भेज रहे हैं।
ओवैसी की शपथ पर हुआ था विवाद
ओवैसी ने शपथ के बाद ”जय भीम, जय मीम, जय तेलंगाना, जय फिलिस्तीन, तकबीर अल्ला-हु-अकबर” कहा। फिर प्रोटेम स्पीकर से हाथ मिलाने पहुंच गए। NDA सांसदों ने नियमों के खिलाफ बताया और हंगामा किया। इस पर सभापति ने ओवैसी के नारे को रिकॉर्ड से हटा दिया था। उस समय सभापति राधा मोहन सिंह ने सदस्यों को आश्वासन दिया था कि शपथ के अलावा कोई भी बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी। कुछ देर बाद प्रोटेम स्पीकर भर्तृहरि महताब ने कहा कि केवल शपथ और प्रतिज्ञान ही रिकॉर्ड किया जा रहा है। उन्होंने कहा- मैंने पहले भी कहा है कि कृपया शपथ और प्रतिज्ञान के अलावा कुछ भी कहने से बचें। केवल इसे रिकॉर्ड किया जाना है, इसका पालन किया जाना चाहिए।














