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सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार को झटका: अब MCD में सीधे पार्षद नियुक्त कर सकेंगे LG, कोर्ट ने सरकार से कहा- सलाह और मदद की जरुरत नहीं

उमाकांत त्रिपाठी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम को लेकर अहम टिप्पणी की। दरअसल दिल्ली के LG विनय कुमार सक्सेना ने इस साल जनवरी में 10 एल्डरमैन की नियुक्ति की थी, इसे लेकर दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस पर टिप्पणी करते हुए CJI डी वाय चंद्रचूड़ जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बैंच ने कहा कि MCD में सदस्यों को नामित करने की LG की वैधानिक शक्ति है, न कि कार्यकारी शक्ति। सुप्रीम कोर्ट ने उपराज्यपाल के 10 एल्डरमैन नियुक्त करने के फैसले को बरकरार रखा है। इससे पहले मई 2023 में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।

आपकी सलाह और मदद की जरुरत नहीं
सुप्रीम अदालत ने दिल्ली सरकार को दो टूक कहते हुए साफ किया कि, दिल्ली नगर निगम में 10 मेंबर नॉमिनेट करने के उपराज्यपाल (LG) के फैसले को मंत्रिपरिषद की मदद और सलाह की जरुरत नहीं है। इस फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह का भी बयान सामने आया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र और संविधान के लिए बड़ा झटका बताया है। फैसले पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि कोर्ट का फैसला मामले की सुनवाई से एक दम उलट है। सांसद ने कहा कि दिल्ली को अन्य राज्यों की तरह ये हक मिलना चाहिए।

इस तर्क से बनी बात
पिछले साल 17 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान LG की तरफ से तर्क दिया गया कि संविधान के अनुच्छेद 239(एए) के तहत LG की पावर और दिल्ली के एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर उनकी भूमिका में फर्क है। उन्होंने कहा कि कानून के आधार पर एल्डरमैन के नियुक्ति में LG की भूमिका है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि LG को ये पावर देने से संभावना है कि इलेक्टोरल तरीके से चुनी गई MCD अस्थिर हो जाए, क्योंकि एल्डरमैन के पास नगर निगम में मतदान की शक्ति भी होगी।

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